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हाईकोर्ट के न्यायाधीश धानिक के पैतृक गांव में बुनियादी सुविधाओं का अभाव
Updated Sat, 01 Dec 2018 11:04 PM IST
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जैंती (अल्मोड़ा)। उत्तराखंड हाईकोर्ट में न्यायाधीश नियुक्त किए गए न्यायमूर्ति नारायण सिंह धानिक का जन्म 20 मई 1960 को जैंती तहसील के पुभाऊं गांव में हुआ था। उनका पैतृक गांव पुभाऊं में बुनियादी सुविधा का अभाव बना है। गांव से रोजगार की तलाश में ग्रामीण लगातार पलायन कर रहे हैं। कभी इस गांव में 150 परिवार रहते थे, लेकिन वर्तमान में 50 परिवार पलायन कर गए हैं। अब 100 परिवार ही रह गए हैं। स्वास्थ्य व्यवस्था की भी बेहतर सुविधा नहीं है।
स्वास्थ्य सुविधा का लाभ लेने के लिए गांव के लोगों को 20 किमी दूर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जैंती आना पड़ता है। पुभाऊं गांव से तीन किमी दूर बाराकोट में एलोपैथिक चिकित्सालय है। इसमें सिर्फ एक मात्र फार्मासिस्ट तैनात है। इस कारण गांव के लोगों को उपचार नहीं मिल पाता है।
गांव में राजकीय इंटर कालेज है। इस विद्यालय में विज्ञान वर्ग के शिक्षक नहीं हैं। विज्ञान की पढ़ाई के लिए गांव के बच्चों को 20 किमी दूर सर्वोदय इंटर कालेज जयंती जाना पड़ता है। जीआईसी पुभाऊं में पानी का संयोजन भी नहीं है। जिससे मध्यान्ह भोजन बनाने में दिक्कतें हो रही हैं।
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गांव में पेयजल व्यवस्था बेहतर नहीं हैं। रोजगार की कमी है। गांव में पंचायत घर तो है, लेकिन यह जीर्ण शीर्ण हालत में है। गांव में करीब 300 साल पुराना पावनेश्वर शिव मंदिर है। ग्रामीणों का कहना है कि पुरातत्व विभाग की अनदेखी के चलते यह पौराणिक मंदिर धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से विकसित नहीं हो पा रहा है। पुभाऊं के प्रधान चंदन शर्मा ने बताया कि न्यायमूर्ति धानिक ने गांव से ही प्राथमिक शिक्षा लेकर उच्च मुकाम हासिल किया है, लेकिन आज गांव में शिक्षा व्यवस्था बदहाल है। उन्होंने कहा कि श्री धानिक के उत्तराखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश बनने से गांव की समस्याओं का समाधान होने की उम्मीद जगी है।
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स्वास्थ्य सुविधा का लाभ लेने के लिए गांव के लोगों को 20 किमी दूर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जैंती आना पड़ता है। पुभाऊं गांव से तीन किमी दूर बाराकोट में एलोपैथिक चिकित्सालय है। इसमें सिर्फ एक मात्र फार्मासिस्ट तैनात है। इस कारण गांव के लोगों को उपचार नहीं मिल पाता है।
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गांव में राजकीय इंटर कालेज है। इस विद्यालय में विज्ञान वर्ग के शिक्षक नहीं हैं। विज्ञान की पढ़ाई के लिए गांव के बच्चों को 20 किमी दूर सर्वोदय इंटर कालेज जयंती जाना पड़ता है। जीआईसी पुभाऊं में पानी का संयोजन भी नहीं है। जिससे मध्यान्ह भोजन बनाने में दिक्कतें हो रही हैं।
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गांव में पेयजल व्यवस्था बेहतर नहीं हैं। रोजगार की कमी है। गांव में पंचायत घर तो है, लेकिन यह जीर्ण शीर्ण हालत में है। गांव में करीब 300 साल पुराना पावनेश्वर शिव मंदिर है। ग्रामीणों का कहना है कि पुरातत्व विभाग की अनदेखी के चलते यह पौराणिक मंदिर धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से विकसित नहीं हो पा रहा है। पुभाऊं के प्रधान चंदन शर्मा ने बताया कि न्यायमूर्ति धानिक ने गांव से ही प्राथमिक शिक्षा लेकर उच्च मुकाम हासिल किया है, लेकिन आज गांव में शिक्षा व्यवस्था बदहाल है। उन्होंने कहा कि श्री धानिक के उत्तराखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश बनने से गांव की समस्याओं का समाधान होने की उम्मीद जगी है।