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संभल कर चलिए! कुते और बंदरों की है आप पर नजर
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अल्मोड़ा। अगर आप नगर की गलियों, मोहल्लों में घूम रहें हैं तो सावधान हो जाएं। यहां कब लावारिस कुत्ते या बंदर झपट पड़ें कुछ कहा नहीं जा सकता। सरकारी अस्पतालों में एंटी रेबीज के इंजेक्शन लगाने वालों की हर रोज बढ़ती संख्या यही बता रही है। 18 दिन में 115 लोगों को बंदर और कुत्ते काट चुके हैं। लेकिन इस समस्या से निपटने के लिए प्रशासन या पालिका की ओर से कोई इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं।
ऐसा कोई दिन नहीं जिस दिन कुत्ते या बंदर ने किसी को काटा ना हो। जिस मोहल्ले में भी जाएं वहां बंदरों और कुत्तों का आतंक है। बीते बुधवार को सात और बृहस्पतिवार को आठ लोगों पर हमला हो चुका है। इसके अलावा बिल्ली और अन्य जीव के काटे मरीज भी हर रोज जिला अस्पताल में एंटी रेबीज के इंजेक्शन लगाने पहुंच रहे हैं। जिला अस्पताल के फार्मासिस्ट जितेंद देवड़ी ने बताया कि एंटीरेबीज के इंजेक्शन कुछ दिन पहले ही मंगाए गए थे अब वो भी कम होने लगे हैं। नगर में घूमने वाले लावारिस कुत्तों और बंदरों पर नियंत्रण के लिए प्रशासन या पालिका की ओर से कोई इंतजाम नहीं किया गया है।
इधर जिला अस्पताल के पीएमएस डॉ. प्रकाश वर्मा ने बताया कि यह नगर में एक बड़ी समस्या हो गई है। हर रोज बंदर और कुत्ते के काटे मरीज पहुंच रहे हैं।
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ऐसा कोई दिन नहीं जिस दिन कुत्ते या बंदर ने किसी को काटा ना हो। जिस मोहल्ले में भी जाएं वहां बंदरों और कुत्तों का आतंक है। बीते बुधवार को सात और बृहस्पतिवार को आठ लोगों पर हमला हो चुका है। इसके अलावा बिल्ली और अन्य जीव के काटे मरीज भी हर रोज जिला अस्पताल में एंटी रेबीज के इंजेक्शन लगाने पहुंच रहे हैं। जिला अस्पताल के फार्मासिस्ट जितेंद देवड़ी ने बताया कि एंटीरेबीज के इंजेक्शन कुछ दिन पहले ही मंगाए गए थे अब वो भी कम होने लगे हैं। नगर में घूमने वाले लावारिस कुत्तों और बंदरों पर नियंत्रण के लिए प्रशासन या पालिका की ओर से कोई इंतजाम नहीं किया गया है।
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इधर जिला अस्पताल के पीएमएस डॉ. प्रकाश वर्मा ने बताया कि यह नगर में एक बड़ी समस्या हो गई है। हर रोज बंदर और कुत्ते के काटे मरीज पहुंच रहे हैं।