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बाल वैज्ञानिक विनय का राष्ट्रीय विज्ञान प्रदर्शनी के लिए चयन
Updated Sun, 19 Nov 2017 10:19 PM IST
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अल्मोड़ा। एनसीईआरटी और एससीईआरटी देहरादून की ओर से 15 से 18 नवंबर तक भरत मंदिर कालेज ऋषिकेश में हुए राज्य स्तरीय विज्ञान महोत्सव के सीनियर वर्ग में राजकीय इंटर कालेज लमगड़ा के छात्र विनय नगरकोटी ने बहुउद्देश्यीय जूते को प्रदर्शित किया। विनय नगरकोटी का चयन अब राष्ट्रीय विज्ञान प्रदर्शनी के लिए हुआ है।
बाल वैज्ञानिक विनय नगरकोटी ने बहुउद्देश्यीय जूते का निर्माण अपने मार्गदर्शक शिक्षक विनोद कुमार राठौर के निर्देशन में सैनिकों को ध्यान में रखकर किया है। जूते से मोबाइल चार्ज होने के साथ-साथ रात में एलईडी के माध्यम से उजाला भी मिलेगा। जूते में लगाई गई बैटरी विद्युत ऊर्जा को संरक्षित करेगी और उस ऊर्जा का प्रयोग आवश्यकता होने पर किया जा सकता है। जूते में एक छोटा गेयर बॉक्स लगाया गया है। इसके अलावा पांच वोल्ट की मोटर लगाई गई जो एक डायनमों का कार्य करती है। जूते को इस तरह डिजाइन किया गया है कि सारे सर्किट जूते के तले में फिट आ जाते हैं। जूता पहन कर चलने पर तले में लगाया गया गियर चलेगा साथ ही पांच बोल्ट के डायनमो से जुड़ा गियर घूमने लगेगा। डायनमो एक छोटी मोटर से जुड़ा है। इसके चलने से मोटर चलेगी और विद्युत उर्जा पैदा होगी।
मार्गदर्शक शिक्षक विनोद कुमार राठौर ने बताया कि जूते को खास तौर पर आर्मी को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। क्योंकि सैनिक कई-कई दिनों तक सरहद के जंगलों में रहते है जहां विद्युत की कोई व्यवस्था नहीं हो पाती है, वहां पर वह आसानी से अपने मोबाइल को चार्ज कर सकते हैं। रात को टार्च की रोशनी से दुश्मनों द्वारा देखने का डर रहता है। जूते के आगे लगी एलईडी के प्रकाश के माध्यम से जंगलों में रात को आसानी से कांबिंग की जा सकती है। विनय ने अपनी उपलब्धि का श्रेय मार्गदर्शक शिक्षक विनोद कुमार राठौर, माता पिता, प्रधानाचार्य दिनेश मोहन बिष्ट, शिक्षकों को दिया है।
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बाल वैज्ञानिक विनय नगरकोटी ने बहुउद्देश्यीय जूते का निर्माण अपने मार्गदर्शक शिक्षक विनोद कुमार राठौर के निर्देशन में सैनिकों को ध्यान में रखकर किया है। जूते से मोबाइल चार्ज होने के साथ-साथ रात में एलईडी के माध्यम से उजाला भी मिलेगा। जूते में लगाई गई बैटरी विद्युत ऊर्जा को संरक्षित करेगी और उस ऊर्जा का प्रयोग आवश्यकता होने पर किया जा सकता है। जूते में एक छोटा गेयर बॉक्स लगाया गया है। इसके अलावा पांच वोल्ट की मोटर लगाई गई जो एक डायनमों का कार्य करती है। जूते को इस तरह डिजाइन किया गया है कि सारे सर्किट जूते के तले में फिट आ जाते हैं। जूता पहन कर चलने पर तले में लगाया गया गियर चलेगा साथ ही पांच बोल्ट के डायनमो से जुड़ा गियर घूमने लगेगा। डायनमो एक छोटी मोटर से जुड़ा है। इसके चलने से मोटर चलेगी और विद्युत उर्जा पैदा होगी।
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मार्गदर्शक शिक्षक विनोद कुमार राठौर ने बताया कि जूते को खास तौर पर आर्मी को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। क्योंकि सैनिक कई-कई दिनों तक सरहद के जंगलों में रहते है जहां विद्युत की कोई व्यवस्था नहीं हो पाती है, वहां पर वह आसानी से अपने मोबाइल को चार्ज कर सकते हैं। रात को टार्च की रोशनी से दुश्मनों द्वारा देखने का डर रहता है। जूते के आगे लगी एलईडी के प्रकाश के माध्यम से जंगलों में रात को आसानी से कांबिंग की जा सकती है। विनय ने अपनी उपलब्धि का श्रेय मार्गदर्शक शिक्षक विनोद कुमार राठौर, माता पिता, प्रधानाचार्य दिनेश मोहन बिष्ट, शिक्षकों को दिया है।
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