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वन श्रमिकों का नियमितीकरण नहीं होने पर नाराजगी
Updated Sun, 28 Jan 2018 10:08 PM IST
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अल्मोड़ा। कुमाऊं वन श्रमिक संघ की चिंतन सभागार में हुई बैठक में वक्ताओं ने लंबे समय बाद भी वन श्रमिकों का नियमितीकरण नहीं होने पर नाराजगी जताई। उन्होंने श्रमिकों की मांगें पूरी नहीं होने पर न्यायालय जाने की चेतावनी दी। कहा कि इसके बाद भी मांग पूरी नहीं हुई तो कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि न्यायालय के आदेशों के बाद भी 1991 से काम कर रहे श्रमिकों को नियमित नहीं किया जा रहा है। कई वन श्रमिक पिछले 30 सालों से सेवाएं दे रहे हैं। वन श्रमिकों को न्यूनतम वेतन भी नहीं दिया जा रहा है। इस कारण उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वन श्रमिकों को 15 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन देने की मांग की। उन्होंने कहा कि वन श्रमिकों को वर्दी, जूता, बेल्ट, टोपी आदि नहीं दी जा रही है।
वर्दी नहीं होने के कारण फायर सीजन और गश्त के दौरान लोग उनकी पहचान नहीं कर पाते हैं। बैठक में वन श्रमिकों का नियमितीकरण करने, महंगाई भत्ते का भुगतान करने की मांग की। उन्होंने कहा कि वन श्रमिकों को सातवें वेतनमान के एरियर का लाभ नहीं दिया गया तो वह न्यायालय की शरण में जाएंगे। इसके बाद भी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो मार्च से कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया जाएगा।
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अध्यक्षता बसंत बल्लभ पांडे ने और संचालन महामंत्री त्रिलोचन भट्ट ने किया। बैठक में त्रिलोक चंद्र, चंद्रमोहन जोशी, बसंत बल्लभ पांडे, कैलाश चंद्र जोशी, नवीन चंद्र तिवारी, भीम सिंह, बालम सिंह, ललित तिवारी, संजय सिंह, दर्शन सिंह, श्याम कुमार, रणजीत सिंह आदि मौजूद थे।
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उन्होंने कहा कि न्यायालय के आदेशों के बाद भी 1991 से काम कर रहे श्रमिकों को नियमित नहीं किया जा रहा है। कई वन श्रमिक पिछले 30 सालों से सेवाएं दे रहे हैं। वन श्रमिकों को न्यूनतम वेतन भी नहीं दिया जा रहा है। इस कारण उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वन श्रमिकों को 15 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन देने की मांग की। उन्होंने कहा कि वन श्रमिकों को वर्दी, जूता, बेल्ट, टोपी आदि नहीं दी जा रही है।
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वर्दी नहीं होने के कारण फायर सीजन और गश्त के दौरान लोग उनकी पहचान नहीं कर पाते हैं। बैठक में वन श्रमिकों का नियमितीकरण करने, महंगाई भत्ते का भुगतान करने की मांग की। उन्होंने कहा कि वन श्रमिकों को सातवें वेतनमान के एरियर का लाभ नहीं दिया गया तो वह न्यायालय की शरण में जाएंगे। इसके बाद भी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो मार्च से कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया जाएगा।
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अध्यक्षता बसंत बल्लभ पांडे ने और संचालन महामंत्री त्रिलोचन भट्ट ने किया। बैठक में त्रिलोक चंद्र, चंद्रमोहन जोशी, बसंत बल्लभ पांडे, कैलाश चंद्र जोशी, नवीन चंद्र तिवारी, भीम सिंह, बालम सिंह, ललित तिवारी, संजय सिंह, दर्शन सिंह, श्याम कुमार, रणजीत सिंह आदि मौजूद थे।