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महर्षि वेद व्यास की जयंती धूमधाम से मनाई
Updated Sat, 08 Jul 2017 09:43 PM IST
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अल्मोड़ा। संकुल केंद्र सरस्वती शिशु मंदिर जीवनधाम में गुरु पूर्णिमा पर्व पर महर्षि वेद व्यास की जयंती धूमधाम से मनाई गई। वक्ताओं ने कहा कि महर्षि वेद व्यास ने संस्कृत साहित्य में जितना कार्य किया उतना किसी ने नहीं किया।
प्रधानाचार्य भैरव सिंह कार्की ने कहा कि विद्वान बनने के लिए कठोर तप की आवश्यकता होती है। परोपकार सबसे बड़ा धर्म है। मुख्य वक्ता विनोद जोशी ने कहा कि वेद व्यास ने 12 वर्ष की तपस्या करके वेदों की रचना की। वेदों का विभाजन करने के कारण इनका नाम वेद व्यास पड़ा। वेदों का अर्थ समझाने के लिए उन्होंने ब्रह्मसूत्र लिखा। ब्रह्मसूत्र का अर्थ समझाने के लिए 18 पुराण लिखे। इस मौके पर गिरिजा पाठक, महेश जोशी, हरीश मेहता, राजेश लोहनी, भुवन पांडे, संजय जोशी, हरीश बिष्ट, विशन बिष्ट, ओम प्रकाश लोहनी, आनंद उप्रेती, आनंद भट्ट, पूनम जशी, पुष्पा मेहरा आदि मौजूद थे।
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प्रधानाचार्य भैरव सिंह कार्की ने कहा कि विद्वान बनने के लिए कठोर तप की आवश्यकता होती है। परोपकार सबसे बड़ा धर्म है। मुख्य वक्ता विनोद जोशी ने कहा कि वेद व्यास ने 12 वर्ष की तपस्या करके वेदों की रचना की। वेदों का विभाजन करने के कारण इनका नाम वेद व्यास पड़ा। वेदों का अर्थ समझाने के लिए उन्होंने ब्रह्मसूत्र लिखा। ब्रह्मसूत्र का अर्थ समझाने के लिए 18 पुराण लिखे। इस मौके पर गिरिजा पाठक, महेश जोशी, हरीश मेहता, राजेश लोहनी, भुवन पांडे, संजय जोशी, हरीश बिष्ट, विशन बिष्ट, ओम प्रकाश लोहनी, आनंद उप्रेती, आनंद भट्ट, पूनम जशी, पुष्पा मेहरा आदि मौजूद थे।
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