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तीन साल से जिले को आरटीई में नहीं मिले 5.58 करोड़
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अल्मोड़ा। शिक्षा का अधिकार अधिनियम में निजी विद्यालयों में 25 फीसदी सीटों पर सामान्य वर्ग के गरीब बच्चों के अलावा एससी, एसटी वर्ग के बच्चों के लिए प्रवेश अनिवार्य है। इन विद्यार्थियों की शिक्षा का खर्च सरकार द्वारा वहन किया जाता है, लेकिन पिछले तीन शिक्षा सत्रों से सरकार से शिक्षा विभाग को 5.58 करोड़ रुपये नहीं मिले हैं।
जिससे शिक्षा विभाग निजी विद्यालयों में पढ़ने वाले इन बच्चों की फीस, स्कूल ड्रेस, कापी-किताबें और मध्याह्न भोजन का खर्च अदा नहीं कर पाया है। जिस कारण गरीब बच्चों के अभिभावक स्वयं के खर्च पर कापी किताबें और ड्रेस खरीद रहे हैं।
सरकार ने आरटीई लागू कर 2011 से निजी विद्यालयों में कक्षा एक से गरीब बच्चों के लिए 25 फीसदी सीटें आरक्षित की हैं। वर्तमान में जिले के निजी विद्यालयों में कक्षा एक से आठवीं तक इन वर्गों के करीब पांच हजार बच्चे पढ़ रहे हैं।
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सरकार पात्र बच्चों की फीस, मध्याह्न भोजन, ड्रेस और कापी किताबों का खर्च स्वयं वहन करती है। फीस की धनराशि निजी विद्यालयों को भुगतान की जाती है। मध्याह्न भोजन, ड्रेस और कापी किताबों की धनराशि बच्चे के बैंक खाते में भुगतान जमा की जाती है।
शासन ने शैक्षिक सत्र 2015-16 की 28 लाख, शैक्षिक सत्र 2016-17 की 2.30 करोड़, 2017-18 की करीब तीन करोड़ धनराशि अब तक शिक्षा विभाग को जारी नहीं की है।
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जिससे शिक्षा विभाग निजी विद्यालयों में पढ़ने वाले इन बच्चों की फीस, स्कूल ड्रेस, कापी-किताबें और मध्याह्न भोजन का खर्च अदा नहीं कर पाया है। जिस कारण गरीब बच्चों के अभिभावक स्वयं के खर्च पर कापी किताबें और ड्रेस खरीद रहे हैं।
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सरकार ने आरटीई लागू कर 2011 से निजी विद्यालयों में कक्षा एक से गरीब बच्चों के लिए 25 फीसदी सीटें आरक्षित की हैं। वर्तमान में जिले के निजी विद्यालयों में कक्षा एक से आठवीं तक इन वर्गों के करीब पांच हजार बच्चे पढ़ रहे हैं।
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सरकार पात्र बच्चों की फीस, मध्याह्न भोजन, ड्रेस और कापी किताबों का खर्च स्वयं वहन करती है। फीस की धनराशि निजी विद्यालयों को भुगतान की जाती है। मध्याह्न भोजन, ड्रेस और कापी किताबों की धनराशि बच्चे के बैंक खाते में भुगतान जमा की जाती है।
शासन ने शैक्षिक सत्र 2015-16 की 28 लाख, शैक्षिक सत्र 2016-17 की 2.30 करोड़, 2017-18 की करीब तीन करोड़ धनराशि अब तक शिक्षा विभाग को जारी नहीं की है।