{"_id":"5966511c4f1c1bce1f8b45e6","slug":"181499877660-almora-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कुमाऊं में प्रसिद्ध हरेला पर्व की तैयारियां जोरों पर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कुमाऊं में प्रसिद्ध हरेला पर्व की तैयारियां जोरों पर
Updated Wed, 12 Jul 2017 10:11 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अल्मोड़ा। सावन माह में होने वाला कुमाऊं का प्रसिद्ध हरेला पर्व इस बार 16 जुलाई को मनाया जाएगा। यह त्यौहार सुख समृद्धि और हरियाली का प्रतीक है। इस पर्व की तैयारियां कई दिन पहले ही शुरू हो जाती हैं। हरेले पर्व पर कई स्थानों पर मेला भी लगता है।
कुमाऊं में हरेला पर्व श्रावण माह की पहली तिथि को मनाया जाता है। त्यौहार से दस दिन पहले सभी घरों में धान, गेहूं, मक्का, जौ, सरसों पांच अथवा सात प्रकार के अनाज को मिलाकर पत्तों से बनी छोटी-छोटी टोकरियों में हरेला बो दिया जाता है। दस दिनों तक हरेले में रोज पानी छिड़का जाता है। हरेले को घर के भीतर प्रकाश रहित जगह पर रखा जाता है। इस कारण इसका रंग पीला हो जाता है। जिसे शुभ माना जाता है। मान्यता है कि हरेला जितना अच्छा उगेगा फसल भी उतनी ही अच्छी होगी।
परिवार के मुखिया द्वारा हरेला काटा जाता है। शिरोधारण करने से पूर्व हरेले को मंदिरों में चढ़ाया जाता है। हरेला शिरोधारण करते समय विशेष आशीष दी जाती है। हरेला सिर में रखकर कुमाऊंनी में लाग हर्याल, लाग बग्वाल, जी रया जागि रया, यो दिन बार भेटने रया... कहकर आशीर्वाद दिया जाता है। नव विवाहितों को हरेले का बेसब्री से इंतजार रहता है। यह भी परंपरा है कि नव विवाहिता अपना पहला हरेला त्यौहार मायके में ही मनाती है। इस दिन लोग जगह-जगह पौधारोपण भी करते हैं। इसके अलावा अनेक स्थानों पर मेले भी लगते हैं। इधर जागेश्वर धाम में सावन के पूरे माह श्रावणी मेला चलता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
कुमाऊं में हरेला पर्व श्रावण माह की पहली तिथि को मनाया जाता है। त्यौहार से दस दिन पहले सभी घरों में धान, गेहूं, मक्का, जौ, सरसों पांच अथवा सात प्रकार के अनाज को मिलाकर पत्तों से बनी छोटी-छोटी टोकरियों में हरेला बो दिया जाता है। दस दिनों तक हरेले में रोज पानी छिड़का जाता है। हरेले को घर के भीतर प्रकाश रहित जगह पर रखा जाता है। इस कारण इसका रंग पीला हो जाता है। जिसे शुभ माना जाता है। मान्यता है कि हरेला जितना अच्छा उगेगा फसल भी उतनी ही अच्छी होगी।
विज्ञापन
परिवार के मुखिया द्वारा हरेला काटा जाता है। शिरोधारण करने से पूर्व हरेले को मंदिरों में चढ़ाया जाता है। हरेला शिरोधारण करते समय विशेष आशीष दी जाती है। हरेला सिर में रखकर कुमाऊंनी में लाग हर्याल, लाग बग्वाल, जी रया जागि रया, यो दिन बार भेटने रया... कहकर आशीर्वाद दिया जाता है। नव विवाहितों को हरेले का बेसब्री से इंतजार रहता है। यह भी परंपरा है कि नव विवाहिता अपना पहला हरेला त्यौहार मायके में ही मनाती है। इस दिन लोग जगह-जगह पौधारोपण भी करते हैं। इसके अलावा अनेक स्थानों पर मेले भी लगते हैं। इधर जागेश्वर धाम में सावन के पूरे माह श्रावणी मेला चलता है।
विज्ञापन