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अल्मोड़ा नगर के सरकारी स्कूलों का प्रदर्शन फीका रहा
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अल्मोड़ा। उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा परिणामों में जहां नगर के विवेकानंद इंटर कॉलेज के कई छात्र-छात्राओं ने स्थान प्राप्त करके लाज बचाई, लेकिन अल्मोड़ा नगर के जीआईसी, जीजीआईसी समेत सभी राजकीय विद्यालयों का प्रदर्शन काफी फीका रहा। नगर के किसी भी विद्यालय का कोई छात्र राज्य स्तर की मेरिट में स्थान नहीं बना सका।
आज से करीब एक दशक पहले तक अल्मोड़ा नगर में स्थित जीआईसी का परीक्षा परिणाम काफी शानदार रहता था। राज्य स्तर की मेरिट में यहां के कई बच्चे शामिल रहते थे। आईसीएस अधिकारी रहे पूर्व राज्यपाल स्व. बीडी पांडे सहित कई हस्तियों ने इसी विद्यालय से पढ़कर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई थी।
नगर में स्थित जीजीआईसी, एआईसी और एडम्स गर्ल्स स्कूल के छात्र-छात्राएं भी राज्य स्तर की मेरिट में स्थान प्राप्त करते थे, लेकिन पिछले कुछ सालों से राजकीय इंटर कॉलेजों की स्थिति खराब होती जा रही है। पिछले साल तक नगर के राजकीय इंटर कॉलेजों के इक्का दुक्का छात्र फिर भी मेरिट में कहीं न कहीं स्थान हासिल करने में सफल रहे लेकिन इस साल तो नगर क्षेत्र के किसी भी विद्यालय के छात्र-छात्रा राज्य स्तर की मेरिट में 25वें स्थान तक कहीं भी जगह नहीं बना सके।
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जानकारों का मानना है कि सरकारी स्कूलों में अब पढ़ाई का स्तर पहले जैसा नहीं रह गया है। दूसरी तरफ यह भी तथ्य सही है कि पिछले कुछ सालों से अधिकांश मेधावी बच्चे पब्लिक स्कूलों में प्रवेश ले लेते हैं। जिनकी आर्थिक स्थिति बेहतर नहीं है उन्हीं परिवारों के बच्चे सरकारी विद्यालयों में प्रवेश लेते हैं।
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आज से करीब एक दशक पहले तक अल्मोड़ा नगर में स्थित जीआईसी का परीक्षा परिणाम काफी शानदार रहता था। राज्य स्तर की मेरिट में यहां के कई बच्चे शामिल रहते थे। आईसीएस अधिकारी रहे पूर्व राज्यपाल स्व. बीडी पांडे सहित कई हस्तियों ने इसी विद्यालय से पढ़कर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई थी।
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नगर में स्थित जीजीआईसी, एआईसी और एडम्स गर्ल्स स्कूल के छात्र-छात्राएं भी राज्य स्तर की मेरिट में स्थान प्राप्त करते थे, लेकिन पिछले कुछ सालों से राजकीय इंटर कॉलेजों की स्थिति खराब होती जा रही है। पिछले साल तक नगर के राजकीय इंटर कॉलेजों के इक्का दुक्का छात्र फिर भी मेरिट में कहीं न कहीं स्थान हासिल करने में सफल रहे लेकिन इस साल तो नगर क्षेत्र के किसी भी विद्यालय के छात्र-छात्रा राज्य स्तर की मेरिट में 25वें स्थान तक कहीं भी जगह नहीं बना सके।
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जानकारों का मानना है कि सरकारी स्कूलों में अब पढ़ाई का स्तर पहले जैसा नहीं रह गया है। दूसरी तरफ यह भी तथ्य सही है कि पिछले कुछ सालों से अधिकांश मेधावी बच्चे पब्लिक स्कूलों में प्रवेश ले लेते हैं। जिनकी आर्थिक स्थिति बेहतर नहीं है उन्हीं परिवारों के बच्चे सरकारी विद्यालयों में प्रवेश लेते हैं।