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कब लौटेगा पटाल बाजार का प्राचीन स्वरूप!
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अल्मोड़ा। मुख्यमंत्री की घोषणा के साढ़े पांच साल बाद भी शहर की मुख्य पटाल बाजार में स्थानीय पत्थर की खानों से निकलने वाले पटाल बिछाने की योजना धरातल पर नहीं उतरी है। जिससे बाजार का प्राचीन स्वरूप नहीं लौट सका है।
कुमाऊं मंडल में सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा में पल्टन बाजार से मिलन चौक तक करीब एक किमी लंबा पटाल बाजार है। नगर की स्थापना के समय से ही इस बाजार में स्थानीय खानों के निकलने वाले पत्थर की पटालें बिछाई गई थीं। इस मार्ग पर वाहन नहीं चलते हैं।
पूर्व में कई स्थानों पर यह पटालें टूटकर खराब हो गई थीं। पालिका परिषद ने लगभग डेढ़ दशक पहले बाजार में स्थानीय पटालों को हटाकर कोटा स्टोन बिछा दिया था।
बाजार में कोटा स्टोन में कई बार लोग फिसलकर चोटिल भी हो चुके हैं। पालिका परिषद ने कोटा स्टोन की पटाल को हालांकि खुरदरा जरूर किया है, लेकिन अब कई स्थानों पर कोटा स्टोन की पटालें भी टूट गई हैं। लंबे समय से लोग मुख्य बाजार में कोटा स्टोन के स्थान पर स्थानीय पत्थरों की पटाल भी बिछाने की मांग करते आ रहे हैं।
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10 सितंबर 2013 को भारत रत्न पं. गोविंद बल्लभ पंत जयंती कार्यक्रम में खूंट पहुंचे तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने स्थानीय पटालें बिछाने की घोषणा की थी, परंतु अब तक स्थानीय पटालें मुख्य बाजार में नहीं बिछाई जा सकी हैं।
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कुमाऊं मंडल में सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा में पल्टन बाजार से मिलन चौक तक करीब एक किमी लंबा पटाल बाजार है। नगर की स्थापना के समय से ही इस बाजार में स्थानीय खानों के निकलने वाले पत्थर की पटालें बिछाई गई थीं। इस मार्ग पर वाहन नहीं चलते हैं।
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पूर्व में कई स्थानों पर यह पटालें टूटकर खराब हो गई थीं। पालिका परिषद ने लगभग डेढ़ दशक पहले बाजार में स्थानीय पटालों को हटाकर कोटा स्टोन बिछा दिया था।
बाजार में कोटा स्टोन में कई बार लोग फिसलकर चोटिल भी हो चुके हैं। पालिका परिषद ने कोटा स्टोन की पटाल को हालांकि खुरदरा जरूर किया है, लेकिन अब कई स्थानों पर कोटा स्टोन की पटालें भी टूट गई हैं। लंबे समय से लोग मुख्य बाजार में कोटा स्टोन के स्थान पर स्थानीय पत्थरों की पटाल भी बिछाने की मांग करते आ रहे हैं।
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10 सितंबर 2013 को भारत रत्न पं. गोविंद बल्लभ पंत जयंती कार्यक्रम में खूंट पहुंचे तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने स्थानीय पटालें बिछाने की घोषणा की थी, परंतु अब तक स्थानीय पटालें मुख्य बाजार में नहीं बिछाई जा सकी हैं।