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लावारिस कुतों ने एक ही दिन में एक दर्जन लोगों को काटा
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अल्मोड़ा। अल्मोड़ा नगर में लावारिस कुत्तों का आतंक इतना बढ़ता जा रहा है कि लोगों का पैदल चलना मुश्किल हो गया है। हर गली और रास्तों में कुत्ते लोगों का पीछा करने लगते हैं और कई बार उन्हें काट लेते हैं। मंगलवार को कुत्तों ने एक ही दिन में एक दर्जन लोगों को काट लिया। इनमें से 10 लोग एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने जिला अस्पताल पहुंचे।
इस महीने अब तक कुत्ते और बंदर करीब 150 लोगों को काट चुके हैं। इनमें से 119 लोग जिला अस्पताल में एंटी रेबीज के इंजेक्शन लगवा चुके हैं। उधर बेस अस्पताल में एंटी रेबीज इंजेक्शन समाप्त हो चुके हैं जबकि जिला अस्पताल में भी सिर्फ 10 दिन का स्टॉक बचा है। लोगों का कहना है कि कुत्तों को पकड़कर कहीं दूर भेजना ही एक मात्र उपाय है।
अल्मोड़ा में नगर में लोग काफी लंबे समय से कुत्तों और बंदरों की समस्या से परेशान हैं। यह मुद्दा काफी समय से उठ रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में कुत्तों के बधियाकरण के अलावा कुछ नहीं हो सका है। जबकि बधियाकरण से तत्काल कोई फायदा मिलने की संभावना नहीं है।
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हालत यह है कि आवारा कुत्ते आए दिन लोगों पर हमला कर रहे हैं और काटने वाले कुत्तों की संख्या में लगातार बढ़ती जा रही है। स्थिति यह हो गई है कि लोग पैदल निकलने में डर रहे हैं। मंगलवार को कुत्तों के काटने से घायल 10 लोग जिला अस्पताल में इंजेक्शन लगवाने पहुंचे। जानकारी के मुताबिक मई में अब तक आवाराकुत्ते और बंदर आदि 150 से अधिक लोगों को काट चुके हैं। इनमें से 119 लोग जिला अस्पताल में इंजेक्शन लगवा चुके हैं। लगभग दो दर्जन लोगों ने बेस अस्पताल में इलाज कराया है। जबकि अप्रैल में कुत्ते, बंदर आदि के काटने से जिला अस्पताल में ही 180 लोगों इंजेक्शन लगवाए। जबकि दो दर्जन से अधिक लोगों ने बेस अस्पताल में इंजेक्शन लगवाए थे।
कुत्ते-बंदर हर रोज इतने लोगों को काट रहे हैं कि अस्पतालों में एंटी रेबीज इंजेक्शन का स्टॉक भी ज्यादा समय नहीं चल पा रहा है। बेस अस्पताल के पीएमएस डॉ.एचएस गड़कोटी ने बताया कि अस्पताल में तीन-चार दिन पहले एंटी रेबीज इंजेक्शन समाप्त हो चुके हैं। इंजेक्शन मंगाने के लिए पत्र लिखा गया है। वहीं जिला अस्पताल से मिली जानकारी के मुताबिक वहां भी सिर्फ 10 दिन का स्टॉक बचा हुआ है।
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इस महीने अब तक कुत्ते और बंदर करीब 150 लोगों को काट चुके हैं। इनमें से 119 लोग जिला अस्पताल में एंटी रेबीज के इंजेक्शन लगवा चुके हैं। उधर बेस अस्पताल में एंटी रेबीज इंजेक्शन समाप्त हो चुके हैं जबकि जिला अस्पताल में भी सिर्फ 10 दिन का स्टॉक बचा है। लोगों का कहना है कि कुत्तों को पकड़कर कहीं दूर भेजना ही एक मात्र उपाय है।
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अल्मोड़ा में नगर में लोग काफी लंबे समय से कुत्तों और बंदरों की समस्या से परेशान हैं। यह मुद्दा काफी समय से उठ रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में कुत्तों के बधियाकरण के अलावा कुछ नहीं हो सका है। जबकि बधियाकरण से तत्काल कोई फायदा मिलने की संभावना नहीं है।
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हालत यह है कि आवारा कुत्ते आए दिन लोगों पर हमला कर रहे हैं और काटने वाले कुत्तों की संख्या में लगातार बढ़ती जा रही है। स्थिति यह हो गई है कि लोग पैदल निकलने में डर रहे हैं। मंगलवार को कुत्तों के काटने से घायल 10 लोग जिला अस्पताल में इंजेक्शन लगवाने पहुंचे। जानकारी के मुताबिक मई में अब तक आवाराकुत्ते और बंदर आदि 150 से अधिक लोगों को काट चुके हैं। इनमें से 119 लोग जिला अस्पताल में इंजेक्शन लगवा चुके हैं। लगभग दो दर्जन लोगों ने बेस अस्पताल में इलाज कराया है। जबकि अप्रैल में कुत्ते, बंदर आदि के काटने से जिला अस्पताल में ही 180 लोगों इंजेक्शन लगवाए। जबकि दो दर्जन से अधिक लोगों ने बेस अस्पताल में इंजेक्शन लगवाए थे।
कुत्ते-बंदर हर रोज इतने लोगों को काट रहे हैं कि अस्पतालों में एंटी रेबीज इंजेक्शन का स्टॉक भी ज्यादा समय नहीं चल पा रहा है। बेस अस्पताल के पीएमएस डॉ.एचएस गड़कोटी ने बताया कि अस्पताल में तीन-चार दिन पहले एंटी रेबीज इंजेक्शन समाप्त हो चुके हैं। इंजेक्शन मंगाने के लिए पत्र लिखा गया है। वहीं जिला अस्पताल से मिली जानकारी के मुताबिक वहां भी सिर्फ 10 दिन का स्टॉक बचा हुआ है।