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कोसी, रामगंगा, गगास और सुयाल नदी में मिली मत्स्य आखेट की मंजूरी
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अल्मोड़ा। ईको टूरिज्म और एंगलिंग को बढ़ावा देने के लिए जिले की कोसी, रामगंगा, गगास और सुयाल नदी में जनसहभागिता से एंगलिंग संचालित करने को शासन से अनुमति मिल गई है। मत्स्य विभाग जनसहभागिता से स्थानीय महिला, युवक मंगल दलों, स्वयं सहायता समूहों और मत्स्य जीवी सहकारी समितियों के माध्यम से एंगलिंग कार्यक्रम संचालित करेगा।
मत्स्य निमयावली 2013 के अनुसार शासन ने कोसी नदी में सोमेश्वर से कोसी बैराज तक, रामगंगा नदी में खीड़ा में जोग्यारी गधेरे से गगास नदी के संगम तक, गगास नदी में बिंता से दुगोड़ा तक, सुयाल नदी में विश्वनाथ पुल से सरसों गांव तक एंगलिंग कार्यक्रम को स्वीकृति दी है। इको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए एंगलिंग कार्यक्रम स्थानीय स्तर पर गठित महिला मंगल दल, युवक मंगल दल, स्वयं सहायता समूह, मत्स्य जीवी सहकारी समिति के अलावा समितियों और सोसायटियों के सहयोग से तीन वर्ष के लिए कराया जाएगा।
स्थानीय मंगल दलों, समूहों और समितियों को नदियों में बीट आवंटित करने के लिए विभाग द्वारा आवेदन मांगे गए हैं। विभाग आवेदनों को सूचीबद्ध कर मत्स्य निदेशालय भेजेगा।
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जहां लाटरी निकालकर क्षेत्र आवंटित किए जाएंगे। मंगल दलों और समितियों की जिम्मेदारी होगी कि वह अपने-अपने क्षेत्रों में नदियों में हो रहे मछलियों के अवैध शिकार को भी रोकेंगे।
मंगल दल एंगलिंग करने वाले लोगों से एक निश्चित शुल्क भी वसूलेंगे और तीन वर्ष बाद नदियों में उत्पादित बड़ी मछलियों की बिक्री भी कर सकेंगे। सहायक निदेशक मत्स्य रितेश चंद्र ने बताया कि विकास भवन स्थित कार्यालय से आवेदन पत्र प्राप्त किए जा सकते हैं।
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मत्स्य निमयावली 2013 के अनुसार शासन ने कोसी नदी में सोमेश्वर से कोसी बैराज तक, रामगंगा नदी में खीड़ा में जोग्यारी गधेरे से गगास नदी के संगम तक, गगास नदी में बिंता से दुगोड़ा तक, सुयाल नदी में विश्वनाथ पुल से सरसों गांव तक एंगलिंग कार्यक्रम को स्वीकृति दी है। इको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए एंगलिंग कार्यक्रम स्थानीय स्तर पर गठित महिला मंगल दल, युवक मंगल दल, स्वयं सहायता समूह, मत्स्य जीवी सहकारी समिति के अलावा समितियों और सोसायटियों के सहयोग से तीन वर्ष के लिए कराया जाएगा।
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स्थानीय मंगल दलों, समूहों और समितियों को नदियों में बीट आवंटित करने के लिए विभाग द्वारा आवेदन मांगे गए हैं। विभाग आवेदनों को सूचीबद्ध कर मत्स्य निदेशालय भेजेगा।
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जहां लाटरी निकालकर क्षेत्र आवंटित किए जाएंगे। मंगल दलों और समितियों की जिम्मेदारी होगी कि वह अपने-अपने क्षेत्रों में नदियों में हो रहे मछलियों के अवैध शिकार को भी रोकेंगे।
मंगल दल एंगलिंग करने वाले लोगों से एक निश्चित शुल्क भी वसूलेंगे और तीन वर्ष बाद नदियों में उत्पादित बड़ी मछलियों की बिक्री भी कर सकेंगे। सहायक निदेशक मत्स्य रितेश चंद्र ने बताया कि विकास भवन स्थित कार्यालय से आवेदन पत्र प्राप्त किए जा सकते हैं।