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73वें संशोधन की मूल भावना के उल्लंघन से पंचायती राज को खतरा
Updated Sat, 11 Aug 2018 11:08 PM IST
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अल्मोड़ा। नगर पालिका सीमा विस्तार के विरोध में गठित कुमाऊं, गढ़वाल गांव बचाओ संघर्ष समिति का शिष्टमंडल केंद्रीय पंचायती राज मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से मिला और उन्हें ज्ञापन सौपा। समिति ने कहा कि उत्तराखंड में संविधान के 73वें संशोधन की मूल भावना के घोर उल्लंघन के चलते पंचायती राज के अस्तित्व को खतरा हो गया है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार ने शहरीकरण की नीति को बढ़ावा देने के अंतर्गत एक साथ कई अधिसूचनाएं जारी कर राज्य की नगर पालिकाओं के विस्तार की घोषणा कर दी। नगर पालिकाओं की स्थिति पहले से काफी खराब है। पालिका में नए गांवों के शामिल होने पर स्थिति और भी बिगड़ सकती है। कई स्थानों पर इसके विरोध में प्रदर्शन किया गया, लेकिन इसके बावजूद पंचायत क्षेत्र को संक्रमणशील क्षेत्र घोषित कर नगर पालिका में विलय किया जा रहा है।
उन्होंने नगर पालिका सीमा विस्तार की अधिसूचनाओं को शीघ्र निरस्त करने की मांग की है। शिष्टमंडल में अंबी राम आर्य, प्रधान राजेश कुमार, सागर मनवाल, शेर सिंह, योगी सुंदरनाथ, अनीता असवाल, हेमंत ध्यानी, खुशवंत सेठी, मलिका, लाल चंद्र आदि शामिल थे।
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उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार ने शहरीकरण की नीति को बढ़ावा देने के अंतर्गत एक साथ कई अधिसूचनाएं जारी कर राज्य की नगर पालिकाओं के विस्तार की घोषणा कर दी। नगर पालिकाओं की स्थिति पहले से काफी खराब है। पालिका में नए गांवों के शामिल होने पर स्थिति और भी बिगड़ सकती है। कई स्थानों पर इसके विरोध में प्रदर्शन किया गया, लेकिन इसके बावजूद पंचायत क्षेत्र को संक्रमणशील क्षेत्र घोषित कर नगर पालिका में विलय किया जा रहा है।
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उन्होंने नगर पालिका सीमा विस्तार की अधिसूचनाओं को शीघ्र निरस्त करने की मांग की है। शिष्टमंडल में अंबी राम आर्य, प्रधान राजेश कुमार, सागर मनवाल, शेर सिंह, योगी सुंदरनाथ, अनीता असवाल, हेमंत ध्यानी, खुशवंत सेठी, मलिका, लाल चंद्र आदि शामिल थे।
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