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पहाड़ के पशुपालकों को भी मिलेंगी हॉलिस्टन फ्रिजन नस्ल की गाय
Updated Tue, 24 Jul 2018 11:16 PM IST
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अल्मोड़ा। पर्वतीय जिलों के पशुपालक भी हालिस्टन फ्रीजन नस्ल की गाय पाल सकेंगे। भारतीय सेना के डेरी फार्मों की यह गायें दुग्ध संघ की समितियों में पंजीकृत दुग्ध उत्पादक (पशुपालक) सस्ती दरों पर खरीद सकेंगे। सेना से मिल रही इन गायों को पशुपालकों को देने की योजना अभी तक मैदानी क्षेत्रों तक के लिए ही सीमित थीं।
सेना अपने डेरी फार्मों को बंद करने जा रही है। इन डेरी फार्मों में स्वीटजरलैंड की हालिस्टन फ्रीजन नस्ल की गायें हैं। पूर्व में सरकार ने मैदानी इलाकों में इन गायों को दुग्ध संघों में पंजीकृत पशुपालकों को आवंटित किया था। सरकार ने अब पर्वतीय जिलों अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, बागेश्वर, चंपावत और श्रीनगर में भी यह गाय आवंटित करने का निर्णय लिया है।
एक पशुपालक को सेना डेरी फार्म से पांच पशुओं की इकाई जिसमें दो दुधारू पशु, दो प्रजनन योग्य और एक बछिया खरीदनी होगी। इसके लिए पशुपालक का दुग्ध समिति में पंजीकृत होना और समितियों के माध्यम से दुग्ध संघ को दूध की आपूर्ति करने की शर्त है। पशुपालक को मात्र पांच हजार रुपये देने हाेंगे। दुग्ध संघ अल्मोड़ा के प्रधान प्रबंधक डॉ. एलएम जोशी ने बताया कि पहले आवेदन करने वाले पशुपालकों को यह पशु मिलेंगे। अब तक अल्मोड़ा जिले में 12 पशुपालकों ने आवेदन किए हैं।
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सेना अपने डेरी फार्मों को बंद करने जा रही है। इन डेरी फार्मों में स्वीटजरलैंड की हालिस्टन फ्रीजन नस्ल की गायें हैं। पूर्व में सरकार ने मैदानी इलाकों में इन गायों को दुग्ध संघों में पंजीकृत पशुपालकों को आवंटित किया था। सरकार ने अब पर्वतीय जिलों अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, बागेश्वर, चंपावत और श्रीनगर में भी यह गाय आवंटित करने का निर्णय लिया है।
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एक पशुपालक को सेना डेरी फार्म से पांच पशुओं की इकाई जिसमें दो दुधारू पशु, दो प्रजनन योग्य और एक बछिया खरीदनी होगी। इसके लिए पशुपालक का दुग्ध समिति में पंजीकृत होना और समितियों के माध्यम से दुग्ध संघ को दूध की आपूर्ति करने की शर्त है। पशुपालक को मात्र पांच हजार रुपये देने हाेंगे। दुग्ध संघ अल्मोड़ा के प्रधान प्रबंधक डॉ. एलएम जोशी ने बताया कि पहले आवेदन करने वाले पशुपालकों को यह पशु मिलेंगे। अब तक अल्मोड़ा जिले में 12 पशुपालकों ने आवेदन किए हैं।
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