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वन विभाग ने पशु पालकों को करना है दो करोड़ से अधिक का भुगतान
Updated Tue, 20 Jun 2017 04:51 PM IST
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तेंदुआ मारे जा रहा मवेशी पर मुआवजे को धन नहीं
अल्मोड़ा। जंगली जानवरों के हमलों से लगातार काश्तकारों के पशु मारे जा रहे हैं, लेकिन शासन से बजट नहीं मिलने के कारण उन्हें मुआवजा नहीं मिल पा रहा है। पिछले तीन साल में पशुपालकों के करीब 1612 मवेशियों की मौत हो चुकी है। इसके लिए वन विभाग ने मुआवजे के तौर पर दो करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान करना है, लेकिन बजट के अभाव में पशु पालकों को तीन साल से मुआवजा नहीं मिल पाया है।
अल्मोड़ा वन प्रभाग में अल्मोड़ा, सोमेश्वर, रानीखेत, जौरासी, द्वाराहाट और मोहान मिलाकर छह रेंज हैं। इन रेंजों में पिछले तीन सालों में जंगली जानवरों ने 985 पालतू जानवरों को मार दिया गया। वहीं सिविल सोयम विभाग के बिंसर, जागेश्वर, कनारीछीना, कोसी, गणानाथ, चौबटिया, लमगड़ा और मृग विहार मिलाकर आठ रेंज हैं। इसमें पशुपालकों के 627 पशु मारे जा चुके हैं। इनमें अधिकांश मवेशियों को तेंदुओं ने मारा है। इक्का दुक्का ही अन्य जानवरों के हमलों में मारे गए। वन विभाग मारे जा चुके पालतू पशु के मुआवजे के तौर पर प्रत्येक पशु पालक को कुछ आर्थिक सहायता उपलब्ध कराता रहा है, लेकिन पिछले तीन सालों से पैसा नहीं आने के कारण पशु पालकों को मुआवजा नहीं मिल सका है। वन विभाग ने इस बार फिर करीब दो करोड़ रुपये के बजट की मांग की है। अल्मोड़ा वन प्रभाग ने करीब एक करोड़ 36 लाख और सिविल सोयम ने 70 लाख 86 हजार रुपये का प्रस्ताव भेजा है। फिलहाल आर्थिक सहायता के लिए इन दिनों हर रोज पशु पालक वन विभाग के चक्कर काट रहे हैं।
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अल्मोड़ा। जंगली जानवरों के हमलों से लगातार काश्तकारों के पशु मारे जा रहे हैं, लेकिन शासन से बजट नहीं मिलने के कारण उन्हें मुआवजा नहीं मिल पा रहा है। पिछले तीन साल में पशुपालकों के करीब 1612 मवेशियों की मौत हो चुकी है। इसके लिए वन विभाग ने मुआवजे के तौर पर दो करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान करना है, लेकिन बजट के अभाव में पशु पालकों को तीन साल से मुआवजा नहीं मिल पाया है।
अल्मोड़ा वन प्रभाग में अल्मोड़ा, सोमेश्वर, रानीखेत, जौरासी, द्वाराहाट और मोहान मिलाकर छह रेंज हैं। इन रेंजों में पिछले तीन सालों में जंगली जानवरों ने 985 पालतू जानवरों को मार दिया गया। वहीं सिविल सोयम विभाग के बिंसर, जागेश्वर, कनारीछीना, कोसी, गणानाथ, चौबटिया, लमगड़ा और मृग विहार मिलाकर आठ रेंज हैं। इसमें पशुपालकों के 627 पशु मारे जा चुके हैं। इनमें अधिकांश मवेशियों को तेंदुओं ने मारा है। इक्का दुक्का ही अन्य जानवरों के हमलों में मारे गए। वन विभाग मारे जा चुके पालतू पशु के मुआवजे के तौर पर प्रत्येक पशु पालक को कुछ आर्थिक सहायता उपलब्ध कराता रहा है, लेकिन पिछले तीन सालों से पैसा नहीं आने के कारण पशु पालकों को मुआवजा नहीं मिल सका है। वन विभाग ने इस बार फिर करीब दो करोड़ रुपये के बजट की मांग की है। अल्मोड़ा वन प्रभाग ने करीब एक करोड़ 36 लाख और सिविल सोयम ने 70 लाख 86 हजार रुपये का प्रस्ताव भेजा है। फिलहाल आर्थिक सहायता के लिए इन दिनों हर रोज पशु पालक वन विभाग के चक्कर काट रहे हैं।
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