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पहाड़ से तराई तक घाटे में गांधी आश्रम
Updated Tue, 05 Sep 2017 10:48 PM IST
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अल्मोड़ा। खादी को बढ़ावा देने के लिए खोले गए गांधी आश्रम अब घाटे में चल रहे हैं। पिछले तीन साल में पहाड़ और तराई के छह जिलों के क्षेत्रीय उत्पादन केंद्रों में बिक्री और उत्पादन दोनों घट गया है। प्रदेश सरकार की ओर से मिलने वाली दस प्रतिशत छूट भी तीन सालों से नहीं मिली है। आलम यह है कि कच्चा माल नहीं आने के कारण बुनकर भी खाली बैठे हैं।
अल्मोड़ा, बागेश्वर, चंपावत, पिथौरागढ़ के अलावा नैनीताल और ऊधमसिंह नगर के मुख्यालय चनौदा गांधी आश्रम की हालत खस्ता है। गांधी आश्रम को 2015 से अब तक सरकार की ओर से छूट नहीं मिल पाई है। जिससे पंजाब और राजस्थान से कच्चा माल नहीं आ रहा और करीब चार सौ बुनकरों को देने के लिए पैसे नहीं होने से वह भी बेरोजगार हो गए हैं। तीन सालों में उत्पादन और बिक्री दोनों घट गए हैं। प्रबंधक गांधी आश्रम प्रमोद वर्मा ने बताया कि कच्चा माल नहीं आ रहा है और बुनकर रोजगार विहीन हो गए हैं। मालूम हो कि गांधी आश्रम के उत्पादित माल उत्तराखंड के अलावा बाहरी राज्यों को भी जाते हैं।
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अल्मोड़ा, बागेश्वर, चंपावत, पिथौरागढ़ के अलावा नैनीताल और ऊधमसिंह नगर के मुख्यालय चनौदा गांधी आश्रम की हालत खस्ता है। गांधी आश्रम को 2015 से अब तक सरकार की ओर से छूट नहीं मिल पाई है। जिससे पंजाब और राजस्थान से कच्चा माल नहीं आ रहा और करीब चार सौ बुनकरों को देने के लिए पैसे नहीं होने से वह भी बेरोजगार हो गए हैं। तीन सालों में उत्पादन और बिक्री दोनों घट गए हैं। प्रबंधक गांधी आश्रम प्रमोद वर्मा ने बताया कि कच्चा माल नहीं आ रहा है और बुनकर रोजगार विहीन हो गए हैं। मालूम हो कि गांधी आश्रम के उत्पादित माल उत्तराखंड के अलावा बाहरी राज्यों को भी जाते हैं।
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