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जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने सुनाया फैसला
Updated Thu, 13 Sep 2018 12:27 AM IST
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अल्मोड़ा। जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने बच्ची के उपचार में लापरवाही के मामले में बेस अस्पताल की चिकित्सक डॉ. प्रीति पंत को धारा 269, 336 में बरी कर दिया है, जबकि नर्स गीता आर्या को धारा 269 में छह माह की सजा और 10 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है।
रमेश जीना ने 22 दिसंबर 2013 को पुत्री दिशा जीना को बुखार और खांसी के इलाज के लिए बेस अस्पताल में भर्ती कराया था। दिशा के हाथ में इंजेक्शन देने के लिए कैथ लगा था। आरोप है कि 23 दिसंबर को सायं चार बजे ड्यूटी नर्स गीता आर्या ग्राम मासी (भिकियासैंण) ने कैथ को टाइट कर दिया और उसमें इजेक्शन लगते रहे। बच्ची के हाथ में काफी सूजन आ गई। आगे की अंगुलियां नीली हो गई थीं। नर्स ने कहा कि डॉक्टर के राउंड पर आने पर उन्हें बताना। उसके बाद भी नर्स ने उसी हाथ में दो इंजेक्शन लगा दिए।
सुबह डॉक्टर अस्पताल पहुंचीं तो बच्ची को सुशीला तिवारी अस्पताल हल्द्वानी रेफर कर किया गया। एंबुलेंस मांगने पर नहीं दी गई। इसके बाद पिता ने दिशा को सुशीला तिवारी अस्पताल में भर्ती कराया, तो पता चला कि दिशा के हाथ में गैगरीन हो गया है और दाहिने हाथ से अपाहिज हो चुकी है। पिता ने इसकी तहरीर अल्मोड़ा कोतवाली में दी। विवेचक ने विवेचना पूर्ण कर आरोप पत्र न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में प्रस्तुत किया। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पूर्व में दिए फैसले में आरोपी डॉ. प्रीति पंत और नर्स गीता आर्या को धारा 269 में छह-छह माह की सजा और 10-10 हजार अर्थदंड, धारा 336 में तीन-तीन माह की सजा और 250-250 अर्थदंड की सजा सुनाई थी। इस निर्णय के विरुद्ध दोनों ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश के न्यायालय में अपील की थी।
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जिला सत्र न्यायाधीश डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने पत्रावली में मौजूद दस्तावेजी और मौखिक साक्ष्यों का परिशीलन कर डॉ. प्रीति पंत को दोनों धाराओं में बरी कर दिया, जबकि नर्स गीता आर्या को धारा 269 में दोषी पाते हुए छह माह की सजा और 10 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है। जबकि धारा 336 में नर्स पर दोष सिद्ध नहीं हुआ। राज्य सरकार की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी गिरीश चंद्र फुलारा, सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता शेखर चंद्र नैल्वाल, विशेष लोक अभियोजक भूपेंद्र कुमार जोशी ने पैरवी की।
रमेश जीना ने 22 दिसंबर 2013 को पुत्री दिशा जीना को बुखार और खांसी के इलाज के लिए बेस अस्पताल में भर्ती कराया था। दिशा के हाथ में इंजेक्शन देने के लिए कैथ लगा था। आरोप है कि 23 दिसंबर को सायं चार बजे ड्यूटी नर्स गीता आर्या ग्राम मासी (भिकियासैंण) ने कैथ को टाइट कर दिया और उसमें इजेक्शन लगते रहे। बच्ची के हाथ में काफी सूजन आ गई। आगे की अंगुलियां नीली हो गई थीं। नर्स ने कहा कि डॉक्टर के राउंड पर आने पर उन्हें बताना। उसके बाद भी नर्स ने उसी हाथ में दो इंजेक्शन लगा दिए।
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सुबह डॉक्टर अस्पताल पहुंचीं तो बच्ची को सुशीला तिवारी अस्पताल हल्द्वानी रेफर कर किया गया। एंबुलेंस मांगने पर नहीं दी गई। इसके बाद पिता ने दिशा को सुशीला तिवारी अस्पताल में भर्ती कराया, तो पता चला कि दिशा के हाथ में गैगरीन हो गया है और दाहिने हाथ से अपाहिज हो चुकी है। पिता ने इसकी तहरीर अल्मोड़ा कोतवाली में दी। विवेचक ने विवेचना पूर्ण कर आरोप पत्र न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में प्रस्तुत किया। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पूर्व में दिए फैसले में आरोपी डॉ. प्रीति पंत और नर्स गीता आर्या को धारा 269 में छह-छह माह की सजा और 10-10 हजार अर्थदंड, धारा 336 में तीन-तीन माह की सजा और 250-250 अर्थदंड की सजा सुनाई थी। इस निर्णय के विरुद्ध दोनों ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश के न्यायालय में अपील की थी।
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जिला सत्र न्यायाधीश डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने पत्रावली में मौजूद दस्तावेजी और मौखिक साक्ष्यों का परिशीलन कर डॉ. प्रीति पंत को दोनों धाराओं में बरी कर दिया, जबकि नर्स गीता आर्या को धारा 269 में दोषी पाते हुए छह माह की सजा और 10 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है। जबकि धारा 336 में नर्स पर दोष सिद्ध नहीं हुआ। राज्य सरकार की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी गिरीश चंद्र फुलारा, सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता शेखर चंद्र नैल्वाल, विशेष लोक अभियोजक भूपेंद्र कुमार जोशी ने पैरवी की।