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75 सालों में 'अखंडज्योति' ने ऐसा क्या छापा...
अमर उजाला, डॉ. योगेश योगी, हरिद्वार
Updated Wed, 21 Aug 2013 06:07 PM IST
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गायत्री पीठ शांतिकुंज के संस्थापक पंडित श्री राम शर्मा आचार्य ने जिस दृढ़ संकल्प की ज्योति के साथ ‘अखंड ज्योति’ का प्रकाशन शुरू किया था वह लौ तमाम झंझावातों के बावजूद मद्धिम नहीं पड़ी है।
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जहां एक ओर विज्ञापन के अभाव में अनेक नामी पत्र-पत्रिकाएं दम तोड़ चुकी हैं वहीं अखंड ज्योति का सफर इससे संस्थापक-संपादक आचार्य के ब्रह्मलीन होने के बाद भी बिना रुके, बिना थमे जारी है। अब इसने हीरक जयंती (75 साल) पूरी कर ली है।
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1937 से शुरू हुआ था प्रकाशन
अखंड ज्योति पत्रिका का पहला अंक आचार्य श्री राम शर्मा ने 1937 में प्रकाशित किया। हालांकि इसकी प्रतियां शांतिकुंज के पास सुरक्षित नहीं हैं। लेकिन जनवरी 1940 से पत्रिका के सभी अंक शांतिकुंज में सुरक्षित हैं।
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इसका एक भी अंक बाधित नहीं रहा। यह पत्रिका अल्प सहयोग राशि से चलती है। इतनी पाठक संख्या के साथ बिना विज्ञापन प्रकाशित होने वाली यह देश की एकमात्र पत्रिका है।
क्या छपता है अखंड ज्योति में
अखंड ज्योति वैदिक ज्ञान, भारतीय दर्शन और संस्कृति, उपनिषदों, पुराणों, कर्मकांडों, संस्कारों, धार्मिक आख्यानों, संत चरित्र के साथ ही विश्व के प्रेरक चरित्रों, उनके कृतित्व और व्यक्तित्व को रेखांकित करते हुए लेखों और सामग्रियों पर आधारित है।
इसकी खास बात यह है कि इसमें सभी धर्मों के महापुरुषों के अनुकरणीय और प्रेरक प्रसंगों पर आधारित लेख और सामग्री भी बहुधा छपती रहती है।
विज्ञापन क्यों नहीं
विज्ञापन को लेकर पंडित श्री राम शर्मा आचार्य ने अखंड ज्योति के नवंबर 1978 के अंक में लिखा था कि ‘विज्ञापन एक भी नहीं छपता, जबकि अन्य पत्रिकाओं की प्राय: आधी आमदनी विज्ञापन से ही होती है।
सोचा यह गया कि पत्रिकाओं को मात्र विक्रेताओं की मंडी बनाकर उनके लाभांश से जो टुकड़ा मिल जाता है, उसे महत्व न दिया जाए और किसी प्रकार कागज, छपाई का मूल्य पाठकों से लेकर उन्हें सर्वोत्कृष्ट पाठ्य सामग्री पहुंचाई जाए।’
दो जून 1990 में जब आचार्य श्री राम शर्मा ने शरीर त्यागा, उस वक्त जून और जुलाई का विशेषांक एक साथ प्रकाशित किया गया। इसके अलावा कभी अखंड ज्योति का अंक रुका नहीं है।
अखंड ज्योति : एक नजर में
प्रकाशन अवधि : मासिक
वार्षिक सदस्यता शुल्क 120 रुपये
पृष्ठ लगभग 70 पृष्ठ
आठ भाषाओं में प्रकाशन
(हिंदी-अंग्रेजी, तमिल, तेलगु, गुजराती, बंगाली, कन्नड़, उड़िया)
हिंदी पाठकों की संख्या : 11 लाख से ज्यादा
वितरण की व्यवस्था भी अनूठी
पत्रिका को शांतिकुंज से जुड़े कार्यकर्र्ता घर-घर गांव-गांव जाकर इसका वितरण करते हैं। वही सदस्य भी बनाते हैं। संस्था को दान करने वालों को यह पत्रिका निशुल्क भेजी जाती है। कई क्षेत्रों में एक-एक कार्यकर्ता से लाखों पाठक जुड़े हैं।
‘अखंड ज्योति अखंड है, वह खंडित नहीं होगी। तेल निबट जाएगा तो बत्ती जलेगी, बत्ती निबट जाएगी तो जीवट जलेगी। जब तक जीवन रहेगा, जला जाएगा।’
-आचार्य श्रीराम शर्मा (अखंड ज्योति निकालने का संकल्प)