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नाम के उच्चारण से यह नहीं बन पाई राष्ट्रीय पक्षी
प्रेम प्रताप सिंह/देहरादून
Updated Thu, 21 Feb 2013 09:49 AM IST
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खूबसूरत ग्रेट इंडियन बस्टर्ड पक्षी का वजूद संकट में है। इसे सोन चिरइया अथवा सोनपक्षी भी कहा जाता है। देहरादून स्थित भारतीय वन्यजीव संस्थान के 2011 में किए गए अध्ययन के मुताबिक देश भर में इस प्रजाति के लगभग 300 पक्षी ही बचे हैं। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने इसी साल जनवरी के आखिरी हफ्ते में वन्य जीव संस्थान को इसके संरक्षण की जिम्मेदारी सौंपी है।
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भारत का सबसे वजनदार पक्षी
भारत में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड जैसे वजन का कोई दूसरा पक्षी नहीं है। इसका भार आठ से 10 किलोग्राम होता है। इतना भारी-भरकम होने के बावजूद यह तेज उड़ान भरता है। यह गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र में पाया जाता है।
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घटते घास के मैदानों और अवैध शिकार से बढ़ा संकट
बड़े घास के मैदान पक्षी के लिए उपयुक्त वास स्थल होते हैं। मानसून से ठीक पहले इसका अंडे देने का समय होता है। लेकिन घटते मैदानों और बढ़ते अवैध शिकार से इस पक्षी के अस्तित्व पर ही खतरा मंडराने लगा है। इसी के मद्देनजर केंद्र सरकार ने संरक्षण की कवायद शुरू की है।
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पक्षी विशेषज्ञ प्रतीक पंवार बताते हैं कि ये पक्षी उड़ते तो हैं लेकिन मौसमी प्रवास (माइग्रेट) नहीं करते। मौसमी प्रवास न करना भी इस पक्षी के अस्तित्व के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। इससे अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले पक्षियों का आपसी मेल-मिलाप नहीं हो पाता। यह भी इनकी संख्या तेजी से घटने का प्रमुख कारण है।
पहले सैटेलाइट मैपिंग, फिर जीपीएस सिस्टम से जोड़ेंगे
इसके संरक्षण की अगुवाई कर रहे वन्य जीव संस्थान के वैज्ञानिक डा. वाईएस झाला बताते हैं कि सबसे पहले इन पक्षियों के वास स्थल की सैटेलाइट मैपिंग होगी। इससे उनकी वास्तविक वासस्थल की जानकारी होगी। इसके पश्चात उन्हें पकड़कर जीपीएस (ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम) लगाया जाएगा। इससे पक्षी के मूवमेंट का पता लगेगा। शिकार पर भी नियंत्रण लगेगा। इसके बाद संस्थान द्वारा संरक्षण के लिए प्लान तैयार किया जाएगा।
उच्चारण की वजह से नहीं बनी राष्ट्रीय पक्षी
बताया जाता है कि देश स्वतंत्र होने के बाद ग्रेट इंडियन बस्टर्ड पक्षी को राष्ट्रीय पक्षी घोषित किए जाने का प्रस्ताव था। लेकिन कमेटी के एक सदस्य ने आपत्ति की कि बस्टर्ड को अपभ्रंशित करके कुछ लोग ‘बास्टर्ड’ भी बोल सकते हैं। इससे राष्ट्र का अपमान होगा। राजस्थान में इस पक्षी को गोंडावन भी कहा जाता है।
अरब देशों में इसकी कीमत लाखों में
घास के मैदानों और रेगिस्तानी इलाकों में पाया जाने वाले ये पक्षी गुजरात और राजस्थान की सीमा पार करके अक्सर पाकिस्तान चले जाते हैं। वहां इनका शिकार किया जाता है। पाकिस्तान में इनके शिकार के लिए बकायदा परमिट जारी किए जाते हैं। इनके शिकार के लिए अरब देशों के अमीर शेख खासा पैसा देते हैं।