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मुनिचर्या के आहार पर उमड़े धर्मप्रेमी
ब्यूरो/अमर उजाला शामली
Updated Mon, 07 Mar 2016 02:17 AM IST
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जैन मुनि नयन सागर जी महाराज प्रवचन करते हुए।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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कांधला में श्री दिगंबर जैन समाज द्वारा आयोजित पंचकल्याणक महोत्सव के पांचवें दिन तीर्थंकर भगवान ऋषभ देव के मुनिचर्या के दौरान प्रथम आहार पर हजारों धर्मप्रेमियों ने भाग लिया।
रविवार की सुबह बेला पर अयोध्या नगरी में देव स्तवन जिनाभिषेक नित्यार्चन के पश्चात परम पूज्य संत उपाध्याय श्री 108 श्री नयन सागर जी महाराज ने जिनशासन व प्रथम आहार विधि के बाद सभी अयोध्यानगरी वासियों को ज्ञान से अवगत कराया।
दस बजे मुनि चर्चा के दौरान लंबी तपस्या करने के पश्चात ऋषभ मुनि आहार के लिए नगर में आते हैं। पूरे नगर वासी उनके रत्ना फल खाने की विनती करते हैं, लेकिन मुनिराज मुस्कुराते हुए विधि न मिलने के कारण निकल जाते हैं।
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नगरी नगरी गांव गांव विचरण कर हस्तिनापुर पहुंचते है, जहां श्रेयांश राजकुमार के यहां विधि मिलने पर उन्हें रस का आहार मिलता है। प्रथम आहार दाता श्रेयांस बने मिल्न परिवार को मिला।
जैसे ही आहार के रुप में रस की बूंदें मुनिराज की अंजली में आती है, वैसे ही आसमान से वर्षा रूपी अमृत की वर्षा होती है। जब तक आहार चलता है वर्षा चलती रहती है।
आहार पूरा होने के पश्चात वर्षा रुक जाती है। इस दौरान दोपहर को भगवान ऋषभ देव मूर्ति में महाराज श्री ने सूर्य मंत्रों का आत्म क्रियाओं से समावेश किया।
इस दौरान नत्थूमल जैन, कुलदीप जैन, दीपक जैन, नरेंद्र जैन, हंस कुमार जैन, मनोज जैन, अतुल जैन, दैविक जैन आदि लोग मौजूद रहे।
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रविवार की सुबह बेला पर अयोध्या नगरी में देव स्तवन जिनाभिषेक नित्यार्चन के पश्चात परम पूज्य संत उपाध्याय श्री 108 श्री नयन सागर जी महाराज ने जिनशासन व प्रथम आहार विधि के बाद सभी अयोध्यानगरी वासियों को ज्ञान से अवगत कराया।
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दस बजे मुनि चर्चा के दौरान लंबी तपस्या करने के पश्चात ऋषभ मुनि आहार के लिए नगर में आते हैं। पूरे नगर वासी उनके रत्ना फल खाने की विनती करते हैं, लेकिन मुनिराज मुस्कुराते हुए विधि न मिलने के कारण निकल जाते हैं।
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नगरी नगरी गांव गांव विचरण कर हस्तिनापुर पहुंचते है, जहां श्रेयांश राजकुमार के यहां विधि मिलने पर उन्हें रस का आहार मिलता है। प्रथम आहार दाता श्रेयांस बने मिल्न परिवार को मिला।
जैसे ही आहार के रुप में रस की बूंदें मुनिराज की अंजली में आती है, वैसे ही आसमान से वर्षा रूपी अमृत की वर्षा होती है। जब तक आहार चलता है वर्षा चलती रहती है।
आहार पूरा होने के पश्चात वर्षा रुक जाती है। इस दौरान दोपहर को भगवान ऋषभ देव मूर्ति में महाराज श्री ने सूर्य मंत्रों का आत्म क्रियाओं से समावेश किया।
इस दौरान नत्थूमल जैन, कुलदीप जैन, दीपक जैन, नरेंद्र जैन, हंस कुमार जैन, मनोज जैन, अतुल जैन, दैविक जैन आदि लोग मौजूद रहे।