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बुनकरों की टूटती आस पर मरहम की दरकार

Thu, 10 Mar 2016 12:24 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला संतकबीरनगर
ब्यूरो/अमर उजाला संतकबीरनगर Updated Thu, 10 Mar 2016 12:24 AM IST
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Stretching around the needs of weavers ointmen
पावरलूम बंदी के कगार पर। - फोटो : अंबरीश‌ मिश्रा

 छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार भले ही बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन बुनकरी कारोबार अब भी संकट में है। बुनकर अपना पुस्तैनी धंधा छोड़ने को विवश है, क्योंकि न तो बुनकरों को मांग के अनुरूप बिजली मिल पा रही है और न ही बाजार। बाजार उपलब्ध कराने के लिए जो डिपो खुले भी वह भी बेकार साबित हो रहे हैं। ऐसे में बुनकरों की रोजी-रोटी छिन रही है। कच्चे माल के दाम में बढ़ोत्तरी ने रही सही कसर पूरी कर दी है। खुले बाजार में लागत ही नहीं निकल पा रही है। इसके कारण बुनकर मशीन बंद कर अन्य धंधा अपनाने को मजबूर हो रहे हैं। कुछ ऐसी ही स्थिति मेंहदावल, अमरडोभा, लेडुआ  महुआ, पठान टोला, बेलहर सहित अन्य स्थानों की है। जरूरत है बुनकरों के लिए पैकेज की, लेकिन किसी को भी इसकी चिंता नहीं है। अमर उजाला ने कुछ बुनकरों से बात की तो उनका दर्द जुबां पर आ गया। उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया कुछ यूं  व्यक्त की....

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24 घंटे चाहिए बिजली 
बुनकरों की सबसे बड़ी समस्या बिजली की है। बुनकरों के क्षेत्र में भी बिजली पर्याप्त नहीं मिल रही है, जिससे माल तैयार करने में समस्या खड़ी हो रही है। कभी-कभी तक मात्र आठ से 10 घंटे ही बिजली मिल पाती है। जरूरत है बुनकरों के क्षेत्र में स्वतंत्र फीडर लगाने की ताकि चौबीस घंटे बिजली मिले। 
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-मोहम्मद शमीम अंसारी  
बाजार उपलब्ध कराए जाने की जरूरत 
कई प्रकार की समस्याओं को झेलते हुए बुनकर माल तैयार कर रहे हैं, लेकिन उन्हें बाजार ही नहीं मिल पा रहा है, जहां उनका माल उचित मूल्य पर बिक सके।  कुछ स्थानों पर डिपो की स्थापना की गई थी, लेकिन वह भी बेकार साबित हो रहे हैं। ऐसे में उत्पादन और बिक्री तक खर्च इतना अधिक हो जा रहा है कि लागत निकाल पाना मुश्किल हो रहा है। 
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-मोहम्मद अली अंसारी 
महंगाई के कारण भी पड़ रहा असर 
पिछले  कुछ वर्षों में महंगाई बढ़ी है। इसके कारण रंगाई और सूत बनाने में खर्च बढ़ गया है। इसके बाद भी बाजार में वाजिब मूल्य नहीं मिल पा रहा है। खलीलाबाद के बरदहिया बाजार में माल लाकर बेचने में खर्च बढ़ रहा है। इस पर ध्यान देने के साथ ही बुनकरों के लिए सरकार को कुछ अलग से व्यवस्था करनी चाहिए। 

-अजमेरुन्निशा 
बुनकरों को मिले पैकेज 
जिस प्रकार से बनारस के बुनकरों के लिए पैकेज दिए जाने के लिए पहल की गई है, उसी प्रकार सभी क्षेत्रों में बुनकरों की समस्याओं को ध्यान में रखकर पैकेज दिए जाने की जरूरत है। पैकेज मिलने से बुनकरों की आर्थिक समस्या का निदान हो सकेगा और सरकार का ध्यान भी बुनकरों की भलाई पर रहेगा। सरकार का साथ मिला तो बुनकर उद्योग देश के आर्थिक विकास में मददगार साबित होगा। 
-अब्दुल्ला अंसारी

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