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गांव मुड़िया बिलहरा पहुंची स्वास्थ्य टीम
ब्यूरो/ बिलसंडा।
Updated Mon, 14 Mar 2016 11:31 PM IST
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स्वाइन फ्लू
- फोटो : अमर उजाला
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टीम ने 32 लोगों के लिए ब्लड सैंपल
- स्वाइन फ्लू से मासूम की मौत के बाद हरकत में आया स्वास्थ्य विभाग
- लार्वा साइड दवा का किया छिड़काव
गांव मुडिया बिलहरा में स्वाइन फ्लू से मासूम बालिका की मौत होने की पुष्टि के बाद स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप है। हरकत में आए महकमे की एक टीम सीएमओ के आदेश पर गांव पहुंची। टीम ने 32 लोगों के ब्लड सैंपल लिए और गांव में लार्वा साइड दवाई का छिड़काव किया।
तीन मार्च को गांव मुड़िया बिलहरा निवासी राजीव पटेल की 18 माह की पुत्री शुभि तीन मार्च को तेज बुखार आने से बीमार हो गई थी। घरवालों ने उसे सीएचसी में भर्ती कराया था। हालत गंभीर होने पर डॉक्टर ने शुभि को जिला अस्पताल रेफर किया, लेकिन परिवार के लोग जिला अस्पताल न ले जाकर चार मार्च को मासूम को राममूर्ति मेडिकल इंस्टीट्यूट भोजीपुरा (बरेली) ले गए। जहां डाक्टरों ने स्वाइन फ्लू की आशंका जताते हुए बालिका के रक्त का सैंपल जांच के लिए लखनऊ भेज दिया। पांच मार्च को ब्लड सैंपल की आई जांच रिपोर्ट में स्वाइन फ्लू होने की पुष्टि हुई थी। इसी दिन उपचार के दौरान दोपहर करीब 3:30 बजे बालिका की अस्पताल में मौत हो गई थी। भोजीपुरा के डाक्टरों ने बरेली के सीएमओ को बालिका की स्वाइन फ्लू से मृत्यु होने की सूचना दी थी। इससे सेहत महकमे में हड़कंप मच गया था। बरेली के सीएमओ ने पीलीभीत के सीएमओ डॉ. ओपी सिंह को इस मामले की जानकारी दी थी। सीएमओ के निर्देश पर सोमवार को जिला मुख्यालय से मुख्य मलेरिया निरीक्षक चंद्रेश पटेल, एसएफडब्ल्यू रविशंकर अवस्थी, लैब टेक्नीशियन अमित सक्सेना, राजेंद्र गंगवार, राजेश कुमार और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के पर्यवेक्षक कालीचरन की एक टीम गांव पहुंची। टीम ने 32 लोगों के रक्त के नमूने लिए। इसके अलावा गांव में लार्वा साइड दवा का छिड़काव किया। सीएचसी अधीक्षक डॉ. श्रीराम ने बताया कि गांव मुडिय़ा बिलहरा के तमाम लोग मजदूरी करने हरियाणा और पंजाब जाते हैं। उन्होंने आशंका जताई है कि इन्हीं लोगों के जरिए स्वाइन फ्लू की बीमारी गांव तक आ पहुंची है। फिलहाल सेहत महकमा गांव तक स्वाइन फ्लू किसके जरिये व कैसे पहुंचा इसकी पड़ताल में जुटा हुआ है।
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- स्वाइन फ्लू से मासूम की मौत के बाद हरकत में आया स्वास्थ्य विभाग
- लार्वा साइड दवा का किया छिड़काव
गांव मुडिया बिलहरा में स्वाइन फ्लू से मासूम बालिका की मौत होने की पुष्टि के बाद स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप है। हरकत में आए महकमे की एक टीम सीएमओ के आदेश पर गांव पहुंची। टीम ने 32 लोगों के ब्लड सैंपल लिए और गांव में लार्वा साइड दवाई का छिड़काव किया।
तीन मार्च को गांव मुड़िया बिलहरा निवासी राजीव पटेल की 18 माह की पुत्री शुभि तीन मार्च को तेज बुखार आने से बीमार हो गई थी। घरवालों ने उसे सीएचसी में भर्ती कराया था। हालत गंभीर होने पर डॉक्टर ने शुभि को जिला अस्पताल रेफर किया, लेकिन परिवार के लोग जिला अस्पताल न ले जाकर चार मार्च को मासूम को राममूर्ति मेडिकल इंस्टीट्यूट भोजीपुरा (बरेली) ले गए। जहां डाक्टरों ने स्वाइन फ्लू की आशंका जताते हुए बालिका के रक्त का सैंपल जांच के लिए लखनऊ भेज दिया। पांच मार्च को ब्लड सैंपल की आई जांच रिपोर्ट में स्वाइन फ्लू होने की पुष्टि हुई थी। इसी दिन उपचार के दौरान दोपहर करीब 3:30 बजे बालिका की अस्पताल में मौत हो गई थी। भोजीपुरा के डाक्टरों ने बरेली के सीएमओ को बालिका की स्वाइन फ्लू से मृत्यु होने की सूचना दी थी। इससे सेहत महकमे में हड़कंप मच गया था। बरेली के सीएमओ ने पीलीभीत के सीएमओ डॉ. ओपी सिंह को इस मामले की जानकारी दी थी। सीएमओ के निर्देश पर सोमवार को जिला मुख्यालय से मुख्य मलेरिया निरीक्षक चंद्रेश पटेल, एसएफडब्ल्यू रविशंकर अवस्थी, लैब टेक्नीशियन अमित सक्सेना, राजेंद्र गंगवार, राजेश कुमार और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के पर्यवेक्षक कालीचरन की एक टीम गांव पहुंची। टीम ने 32 लोगों के रक्त के नमूने लिए। इसके अलावा गांव में लार्वा साइड दवा का छिड़काव किया। सीएचसी अधीक्षक डॉ. श्रीराम ने बताया कि गांव मुडिय़ा बिलहरा के तमाम लोग मजदूरी करने हरियाणा और पंजाब जाते हैं। उन्होंने आशंका जताई है कि इन्हीं लोगों के जरिए स्वाइन फ्लू की बीमारी गांव तक आ पहुंची है। फिलहाल सेहत महकमा गांव तक स्वाइन फ्लू किसके जरिये व कैसे पहुंचा इसकी पड़ताल में जुटा हुआ है।
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