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सरकार के धन पर चले थे शहर स्मार्ट बनाने
मुरादाबाद/ अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 07 Mar 2016 01:59 AM IST
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स्मार्ट सिटी
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एक कहावत है- हींग लगे न फिटकरी रंग चोखा...। नगर निगम मुरादाबाद ने स्मार्ट सिटी के लिए अपना प्रोजेक्ट इसी कहावत पर तैयार किया था। 500 करोड़ केंद्र सरकार दे देगी, 500 करोड़ राज्य सरकार दे देगी... 50-100 करोड़ तेरहवें वित्त का नगर निगम के पास पैसा रहेगा और शहर स्मार्ट बना लेंगे।
महज 1000-1100 करोड़ की सरकारी धनराशि में शहर को स्मार्ट बनाने का ख्वाब ही नगर निगम को पहले चरण में पीछे ले गया था। अब दूसरे चरण की दौड़ शुरू हो रही है तो नए प्रपोजल में सरकारी धन की जगह पीपीपी माडल प्रमुखता से अपनाने पर मंथन शुरू हो चुका है।
दरअसल पहले चरण में स्मार्ट सिटी चुने गए भुवनेश्वर, जयपुर जैसे शहरों ने छोटे से छोटे प्रोजेक्ट भी पीपीपी माडल पर तैयार किये थे। पीपीपी माडल पर परोक्ष अथवा अपरोक्ष रूप से जनता पर टैक्स की मार पड़ेगी। उदाहरण के तौर पर यदि पीपीपी माडल पर मल्टीलेवल पार्किंग बनती है तो उसमें वाहन पार्किंग पर प्रति घंटे के हिसाब से शुल्क लगेगा।
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यह निर्धारित शुल्क लोगों को सीधे तौर पर देना होगा। कुछ ऐसे भी टैक्स होंगे जो सीधे जनता से नहीं लिये जा सकते। ऐसे में गृहकर, जलकर आदि के जरिये वह कर वसूला जाएगा। नगर निगम मुरादाबाद ने स्मार्ट सिटी के प्रपोजल में पीपीपी माडल का लगभग बायकाट किया ताकि जनता पर कोई कर न लगे।
इसके साथ ही जितना अधिक काम राज्य, केंद्र सरकार और नगर निगम की धनराशि से हो सके उस पर जोर रहेगा। अभी बहुत कुछ करने को है। नगर निगम के साथ जिला प्रशासन, एमडीएम सहित अन्य विभागों के साथ मिलकर नए सिरे से प्रयास होगा।
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महज 1000-1100 करोड़ की सरकारी धनराशि में शहर को स्मार्ट बनाने का ख्वाब ही नगर निगम को पहले चरण में पीछे ले गया था। अब दूसरे चरण की दौड़ शुरू हो रही है तो नए प्रपोजल में सरकारी धन की जगह पीपीपी माडल प्रमुखता से अपनाने पर मंथन शुरू हो चुका है।
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दरअसल पहले चरण में स्मार्ट सिटी चुने गए भुवनेश्वर, जयपुर जैसे शहरों ने छोटे से छोटे प्रोजेक्ट भी पीपीपी माडल पर तैयार किये थे। पीपीपी माडल पर परोक्ष अथवा अपरोक्ष रूप से जनता पर टैक्स की मार पड़ेगी। उदाहरण के तौर पर यदि पीपीपी माडल पर मल्टीलेवल पार्किंग बनती है तो उसमें वाहन पार्किंग पर प्रति घंटे के हिसाब से शुल्क लगेगा।
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यह निर्धारित शुल्क लोगों को सीधे तौर पर देना होगा। कुछ ऐसे भी टैक्स होंगे जो सीधे जनता से नहीं लिये जा सकते। ऐसे में गृहकर, जलकर आदि के जरिये वह कर वसूला जाएगा। नगर निगम मुरादाबाद ने स्मार्ट सिटी के प्रपोजल में पीपीपी माडल का लगभग बायकाट किया ताकि जनता पर कोई कर न लगे।
पीपीपी माडल पर नए सिरे से करेंगे मंथन
नगर आयुक्त एसके सिंह कहते हैं कि पीपीपी माडल पर प्रोजेक्ट बनाने को नए सिरे से मंथन होगा। कोशिश यह होगी कि जो भी प्रोजेक्ट बनें उनमें पीपीपी माडल पर तो काम हो लेकिन जनता पर टैक्स का बोझ अधिक न हो।इसके साथ ही जितना अधिक काम राज्य, केंद्र सरकार और नगर निगम की धनराशि से हो सके उस पर जोर रहेगा। अभी बहुत कुछ करने को है। नगर निगम के साथ जिला प्रशासन, एमडीएम सहित अन्य विभागों के साथ मिलकर नए सिरे से प्रयास होगा।