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तेज हवा के साथ बूंदाबांदी
ब्यूरो/अमर उजाला, मिर्जापुर।
Updated Sun, 13 Mar 2016 12:46 AM IST
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शनिवार को मौसम बिगड़ जाने से बारिश हुई। बारिश समाप्त होने के बाद वाहनों से जाते लोग।
- फोटो : mirzapur
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मौसम का मिजाज बदलने से एक बार फिर जनपद के किसानों को पसीने छूटने लगे हैं। शनिवार की दोपहर बाद तेज हवा के साथ बूंदाबांदी से जहां एक ओर खेतों में खड़ी गेहूं की फसल लोट गई, वहीं पूरे दिन भगवान भास्कर लूका-छिपी करते रहे।
चानक मौसम का रूख बदलने से जहां गेहूं के पौधे में दाने पड़ने की कम संभावना है, वहीं किसानों की दलहनी और तिलहनी की फसल चौपट होने के कगार पर है। शनिवार दोपहर बाद अचानक मौसम के यू टर्न लेने से किसान सिर पर हाथ रखकर बैठ गए। तेज हवा के साथ हुई बारिश से दलहनी व तिलहनी फसल को भारी नुकसान पहुंचा है।
किसान दलहनी और तिलहनी की खेती कर फसल खलिहान तक पहुंचा चुके हैं, शनिवार को दोपहर बाद से हुई बूंदाबांदी के चलते किसानों को चिंता सताने लगी है। मौसम का रूख बदलने से जहां गेहूं के पौधे में दाने पड़ने की कम संभावना है, वहीं दलहनी और तिलहनी की फसल चौपट होने के कगार पर है।
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किसान नवंबर और दिसंबर माह से लेकर अब तक अपने खून पसीने की कमाई को लगकार फसल को तैयार किए थे, किसानों को उम्मीद बंधी थी कि अच्छी पैदावार हो जाएगी मौसम बिगड़ने से किसानों के उम्मीदों पर पानी फिरता नजर रहा है।
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चानक मौसम का रूख बदलने से जहां गेहूं के पौधे में दाने पड़ने की कम संभावना है, वहीं किसानों की दलहनी और तिलहनी की फसल चौपट होने के कगार पर है। शनिवार दोपहर बाद अचानक मौसम के यू टर्न लेने से किसान सिर पर हाथ रखकर बैठ गए। तेज हवा के साथ हुई बारिश से दलहनी व तिलहनी फसल को भारी नुकसान पहुंचा है।
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किसान दलहनी और तिलहनी की खेती कर फसल खलिहान तक पहुंचा चुके हैं, शनिवार को दोपहर बाद से हुई बूंदाबांदी के चलते किसानों को चिंता सताने लगी है। मौसम का रूख बदलने से जहां गेहूं के पौधे में दाने पड़ने की कम संभावना है, वहीं दलहनी और तिलहनी की फसल चौपट होने के कगार पर है।
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किसान नवंबर और दिसंबर माह से लेकर अब तक अपने खून पसीने की कमाई को लगकार फसल को तैयार किए थे, किसानों को उम्मीद बंधी थी कि अच्छी पैदावार हो जाएगी मौसम बिगड़ने से किसानों के उम्मीदों पर पानी फिरता नजर रहा है।