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जर्जर सिस्टम, कैसे मिलेगी 24 घंटे बिजली
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
Updated Mon, 07 Mar 2016 02:34 AM IST
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पावर लाइन, फाइल फोटो।
- फोटो : अमर उजाला
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का गांवों को 14 घंटे और शहरों को 22 से 24 घंटे बिजली आपूर्ति के ड्रीम को झटका लगता नजर आ रहा है। सवाल उठता है कि हल्की बारिश और हवा में खराब होने वाला जर्जर पावर सिस्टम लगातार बिजली आपूर्ति को कैसे झेल पाएगा।
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सीएम अखिलेश यादव ने डेढ़ साल पहले विजन-2016 की घोषणा की थी। इसके तहत गांवों को 14 घंटे, जनपद मुख्यालय को 22 घंटे और मंडल मुख्यालय को 24 घंटे बिजली आपूर्ति की जानी है। इसके लिए प्रदेश में सैकड़ों नए बिजलीघर बनाए जा चुके हैं और पहले से ओवरलोड बिजलीघरों की क्षमतावृद्धि की जा चुकी है। गांव और जंगल की लाइनों को अलग किया जा चुका है। दिन-रात बिजली अधिकारी विजन को पूरा करने के लिए डटे हुए हैं।
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शनिवार को हुआ बारि कई फाल्टश से हुए
सिस्टम पर अरबों रुपये खर्च करने और तमाम दावों के बावजूद हल्की बारिश और हवा में ही बिजली आपूर्ति ठप हो जाती है। गांव से लेकर शहर तक का बिजली ढांचा इस कदर नाजुक है कि शनिवार को हुई बारिश और हवा के चलते शहर में दो दर्जन से ज्यादा फाल्ट हुए। शहर में तो देर रात तक फाल्ट ठीक करके आपूर्ति चालू कर दी गई थी, लेकिन गांव में ध्वस्त हुआ ढांचा रविवार को भी सही नहीं हो पाया था। ऐसे में सवाल उठता है कि इतना नाजुक सिस्टम 14 घंटे से लेकर 24 घंटे तक निर्बाध बिजली आपूर्ति का बोझ कैसे झेल पाएगा।
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काम नहीं हुआ समय से पूरा
विजन-2016 की शुरुआत छह मार्च से होनी थी। इसके लिए प्रदेश की पांचों बिजली कंपनियां जोर-शोर से लगी थीं। पीवीवीएनएल ने भी अपनी तैयारी लगभग पूरी कर ली थी। एमडी अभिषेक प्रकाश ने सभी अधिकारियों को रडार पर ले रखा था। लेकिन कुछ कंपनियों का समय से काम पूरा नहीं होने पर इसकी तारीख 15 मार्च तक बढ़ा दी है।