पांच लोगों की मौत पर भी नहीं पसीजा संवेदनहीन सिस्टम
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सरकारी संवेदनहीनता का इससे बड़ा उदाहरण कहीं नहीं मिलेगा। भीषण हादसे में पांच लोगों की मौत और कई लोगों के दबे होने की सूचना मिलने के बावजूद भी पुलिस और प्रशासनिक अफसर सोते रहे। दमकल की टीम जहां हादसे के 4:30 घंटे बाद तो सरकारी एंबुलेंस कई बार बुलाने के नौ घंटे बाद मौके पर पहुंची। एसएसपी भी छह घंटे बाद जबकि डीएम ने 13 घंटे बाद गांव में पहुंचकर हादसे की जानकारी ली। हद तो यह हो गई कि खुद सीओ किठौर भी करीब पांच घंटे बाद मौके पर पहुंचे। जबकि उन्हीं के सर्किल के थाना क्षेत्र में यह दर्दनाक हादसा हुआ था।
यह हादसा रविवार तड़के करीब 3:30 बजे हुआ था, जिसके बाद वहां सैकड़ों ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। विजयपाल का पूरा परिवार मलबे में दबा हुआ था। ग्रामीणों ने थाना पुलिस और 108 एंबुलेंस सेवा को सूचना दी, लेकिन काफी देर बाद तक भी कोई नहीं पहुंचा। जिसके बाद ग्रामीणों ने खुद ही एक ग्रामीण की जेसीबी से मलबा हटाना शुरू कर दिया। इस बीच एसओ खरखौदा पीयूष दीक्षित एक घंटे बाद मौके पर पहुंचे। सरकारी एंबुलेंस न पहुंचने पर ग्रामीण अपने ही वाहनों से घायलों को निजी अस्पतालों में लेकर पहुंचे, जहां विजयपाल, उसकी पुत्रवधू सुमन और तीनों बच्चों को मृत घोषित किया जा चुका था। जबकि मलबे से निकाले गए घायल कोई व्यवस्था न होने पर मौके पर ही तड़पते रहे।
कई घंटे बाद भी पुलिस या प्रशासन का कोई आला अधिकारी नहीं पहुंचा तो ग्रामीणों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। इस दौरान वहां पहले से मौजूद रहे तहसीलदार और सपा नेता ओमपाल गुर्जर ग्रामीणों को समझाकर शांत कराते रहे, लेकिन ग्रामीण हंगामा करते रहे। सुबह आठ बजे के आसपास चीफ फायर ऑफिसर आईएस सोनी और एफएसओ ज्ञानप्रकाश दमकल कर्मियों के साथ मौके पर पहुंचे तो उनके साथ ही एडीएम (ई) दिनेश चंद एसएसपी और एसपी देहात का वहां पहुंचना शुरू हुआ। कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर सुबह 10:06 बजे जब गांव में पहुंचे तो ग्रामीणों ने सरकारी अव्यवस्था पर कड़ा आक्रोश जताया। मीडियाकर्मियों के दबाव बनाने के बाद दोपहर करीब एक बजे 108 एंबुलेंस पहुंची, जिससे घायल देवीशरण को मेडिकल कॉलेज अस्पताल भिजवाया गया। जिलाधिकारी पंकज यादव शाम करीब 4:15 बजे गांव में पहुंचे।
जेसीबी ने बचाई तीन लोगों की जान
गांव के ही रणपाल की जेसीबी पीड़ित परिवार के लिए वरदान बन गई। जैसे ही रणपाल को विजयपाल का मकान का मकान गिरने से परिवार के दबने की सूचना मिली तो वह हादसे के करीब आधा घंटे बाद अपनी जेसीबी लेकर मौके पर पहुंच गया। चार बजे के आसपास उसने जनता की मदद से जेसीबी से मकान का मलबा हटाना शुरू कर दिया। जिससे मलबे में दबे देवीशरण, प्रिंस और आशू की जान बच पाई। अगर समय रहते इन तीनों को मलबे से निकाला जाता तो अनहोनी हो सकती थी।
पोते को बचाने के लिए दादा ने दे दी जान
विजयपाल ने अपने पोते आशू (4) को बचाने के लिए अपनी जान दे दी। लोगों ने बताया कि विजयपाल पोते आशू के साथ एक ही चारपाई पर सोया हुआ था। जैसे ही मकान का मलबा गिरना शुरू हुआ तो विजयपाल चारपाई को उल्टी करके अपने पोते के ऊपर लेट गया। जिससे आशू को तो खरोंच तक नहीं आयी, लेकिन दादा की मलबे में दबकर मौत हो गई। विजयपाल मरते-मरते भी मिसाल कायम कर गया। जिसने भी यह सुना, वह विजयपाल की तारीफ किए बिना नहीं रहा। वहीं, विजयपाल के अलावा पांच माह की गर्भवती सुमन और उसके तीन बच्चों की मौत पर परिजनों में कोहराम मच गया।