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बालिका विद्यालय भवन के लिए महिलाओं का प्रदर्शन
BEARU, MAU
Updated Sat, 05 Mar 2016 11:55 PM IST
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DEMANDING FOR BUILDING
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विकास खंड क्षेत्र के लखनौर में राजकीय बालिका सीनियर बेसिक विद्यालय का अपना भवन नहीं है। यह विद्यालय 1968 से किराए के भवन में संचालित किया जा रहा था। ढाई साल पूर्व इसे एक परिषदीय प्राथमिक विद्यालय में संबद्ध कर दिया गया। गांव की महिलाओं ने शनिवार को विद्यालय भवन के लिए प्रदर्शन किया औरविभागीय अधिकारियों पर अनदेखी का आरोप लगाया।
लखनौर में 1968 में राजकीय बालिका सीनियर बेसिक विद्यालय की स्थापना तत्कालीन ग्रामप्रधान के मकान में की गई थी। उसके बाद से 50 रुपये मासिक किराए पर यह विद्यालय 45 सालों तक चलता रहा। किसी ने विद्यालय भवन के निर्माण की जरूरत ही नहीं समझी।
दो साल पहले इसे गांव के परिषदीय प्राथमिक विद्यालय में शिफ्ट कर दिया गया। इस विद्यालय में कक्षा छह से आठवीं तक की 60 छात्राएं अध्ययन कर रही हैं। इसमें तीन अध्यापक थे लेकिन उनमें से एक सेवानिवृत्त हो गए ।
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अब केवल दो ही शिक्षक तीनों कक्षाओं को संचालित करते हैं। राजकीय सीनियर बेसिक बालिका विद्यालय की उपेक्षा का आलम यह है कि विद्यालय के नाम चार एकड़ भूमि आवंटित होने के बाद भी यह अब तक भवनविहीन है।
राजकीय बालिका सीनियर बेसिक विद्यालय की इस उपेक्षा से आहत गांव की महिलाओं ने शनिवार को गांव में विरोध जुलूस निकाला और प्रदर्शन किया। महिलाओं ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों के विरुद्घ नारेबाजी की।
उनका कहना था कि इस स्कूल की उपेक्षा अफसर और जनप्रतिनिधि दोनों ही कर रहे हैं। ग्राम प्रधान कृष्ण प्रताप मल्ल का कहना है कि इस बाबत विभागीय अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराया गया लेकिन कोई हल नहीं निकला। इस बाबत खंड शिक्षा अधिकारी श्रवण कुमार यादव का कहना है कि शासन को पत्र लिखा गया है । सर्व शिक्षा अभियान से राजकीय बालिका विद्यालय के लिए धन स्वीकृत होने में कुछ वैधानिक अड़चन है।
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लखनौर में 1968 में राजकीय बालिका सीनियर बेसिक विद्यालय की स्थापना तत्कालीन ग्रामप्रधान के मकान में की गई थी। उसके बाद से 50 रुपये मासिक किराए पर यह विद्यालय 45 सालों तक चलता रहा। किसी ने विद्यालय भवन के निर्माण की जरूरत ही नहीं समझी।
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दो साल पहले इसे गांव के परिषदीय प्राथमिक विद्यालय में शिफ्ट कर दिया गया। इस विद्यालय में कक्षा छह से आठवीं तक की 60 छात्राएं अध्ययन कर रही हैं। इसमें तीन अध्यापक थे लेकिन उनमें से एक सेवानिवृत्त हो गए ।
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अब केवल दो ही शिक्षक तीनों कक्षाओं को संचालित करते हैं। राजकीय सीनियर बेसिक बालिका विद्यालय की उपेक्षा का आलम यह है कि विद्यालय के नाम चार एकड़ भूमि आवंटित होने के बाद भी यह अब तक भवनविहीन है।
राजकीय बालिका सीनियर बेसिक विद्यालय की इस उपेक्षा से आहत गांव की महिलाओं ने शनिवार को गांव में विरोध जुलूस निकाला और प्रदर्शन किया। महिलाओं ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों के विरुद्घ नारेबाजी की।
उनका कहना था कि इस स्कूल की उपेक्षा अफसर और जनप्रतिनिधि दोनों ही कर रहे हैं। ग्राम प्रधान कृष्ण प्रताप मल्ल का कहना है कि इस बाबत विभागीय अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराया गया लेकिन कोई हल नहीं निकला। इस बाबत खंड शिक्षा अधिकारी श्रवण कुमार यादव का कहना है कि शासन को पत्र लिखा गया है । सर्व शिक्षा अभियान से राजकीय बालिका विद्यालय के लिए धन स्वीकृत होने में कुछ वैधानिक अड़चन है।