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महिला थाने ने सुनी होती, तो शीला जिंदा होती

Tue, 08 Mar 2016 01:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूूराो ललितपुर
अमर उजाला ब्यूूराो ललितपुर Updated Tue, 08 Mar 2016 01:18 AM IST
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woman crime
अपराध्‍ा स्‍त्री - फोटो : demo pic
ललितपुर। महिला उत्पीड़न के मामलों का बेहतर व प्राथमिक स्तर पर निपटारा हो सके,  इसी परिकल्पना से महिला थाने स्थापित किए गए हैं। लेकिन, जनपद के महिला थाने में महिलाओं को न्याय दिलाने के बजाए गुड वर्क दिखाने पर जोर दिया जा रहा है। इसी गुड वर्क के फेर में एक नाबालिग विवाहिता को उसके ससुरालीजनों ने जलाकर मार डाला।
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27 जुलाई 2015 को बानपुर थाना के ग्राम कचनौंदा के पढराई मुहल्ला में शीला कुशवाहा का जला हुआ शव बरामद हुआ था। मृतका के पिता कढोरे पुत्र कूरे कुशवाहा निवासी ग्राम दावनी थाना जाखलौन ने तहरीर देकर पुत्री को जलाने का आरोप उसके पति किशन, ससुर मूलचंद्र व सास पर लगाया था। बानपुर पुलिस ने तीनों के खिलाफ दहेज उत्पीड़न, दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज किया था। सास-ससुर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया और फास्ट ट्रैक कोर्ट में मामला लंबित है। वहीं, आरोपी पति के नाबालिग होने के कारण उसका वाद जुबेनाइल कोर्ट में चल रहा है।
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सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता बृजेंद्र सिंह यादव ने बताया कि मृतका के पिता ने कोर्ट में आरोप लगाते हुए बयान दर्ज कराए हैं कि अप्रैल 2015 में उसकी बेटी को ससुराली जनों ने घर से बाहर निकाल दिया था। वह लोग दहेज में एक लाख रुपये व बाइक की मांग कर रहे थे। इस मामले की शिकायत महिला थाने में की गई थी। शिकायत प्राप्त होने के बाद महिला थाने में दोनों पक्षों को बुलाया गया और शीला को ससुराल में रहने को कहा गया। हालांकि, शीला ने मना किया, तो महिला थाना पुलिस ने समझाबुझाकर ससुराल भिजवा दिया। इस घटना के दो हफ्ते बाद ही उसकी पुत्री को जलाकर मार डाला गया।
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नाबालिग जोड़े को क्यों नहीं दिया परामर्श?
महिला थाने में हर शनिवार को पारिवारिक विवादों को सुलह-समझौते से निपटाने के लिए कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। शीला व किशन नाबालिग विवाहित थे। अगर उनके नाबालिग होने पर गंभीरता से ध्यान दिया गया होता, तो शीला को ससुुराल भेजने के बजाय बालिग होने तक मायके में रखने का आदेश दिया गया होता। पुलिस के इस निर्णय को कानून के जानकार सही नहीं मान रहे हैं।

परामर्श केंद्र की जांच से होगा खुलासा
हर शनिवार को महिला थाने में आयोजित होने वाले परिवार परामर्श केंद्र में अक्सर एक-दो मामले नाबालिग वैवाहिक जोड़े के आते हैं। लेकिन, महिला थाना द्वारा ऐसे विवाह के मामलों में कोई गंभीरता नहीं दिखाई जाती है। पिछले दिनों ही नाबालिग जोड़े का एक मामला थाने में आया था, जिसमें लड़का अपनी पत्नी के मायके से नहीं लौटने पर जहर खाकर आत्महत्या की धमकी दे रहा था। महिला थाने में इस नाबालिग जोड़े को साथ रहने का फरमान सुना दिया गया था, जबकि महिला थाना पुलिस को नाबालिग जोड़ों की शिकायत सामने आने पर उनकी विशेष काउंसिलिंग करनी चाहिए।


इनका कहना है
महिला थाने के परामर्श केंद्र में नाबालिग वैवाहिक जोड़ों के मामले आने पर विशेष काउंसलिंग के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया जाएगा। साथ ही विधिक राय के अनुरूप मामले का निस्तारण किया जाएगा।
- मो. इमरान
पुलिस अधीक्षक
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