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ऩिघासन में ग्रामीणों ने बहतिया नाले पर बनाया लकड़ी का पुल
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निघासन क्षेत्र में बहतिया नाले पर बनाया गया लकड़ी का पुल।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
क्षेत्रवासी लंबे समय से करते आ रहे थे जनप्रतिनिधियों से रपटापुल बनवाने की मांग
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पुल बनने से सात गांवों के लोगों की आवाजाही हुई आसान
निघासन। आजादी के दो दशक बाद भी बहतिया नाले पर कोई पुल न होने से परेशान ग्रामीणों ने खुद ही पहल कर लकड़ी का पुल बना डाला। पुल के बन जाने से क्षेत्र के सात गांव के लोगों की आवाजाही अब आसान हो गई है।
बैलहा के प्रधान रफीक और योगेंद्र भदौरिया ने बताया कि मटहिया, मिठुई, बैलहा, डीह, लोखंदर पुर, हड़ही पुरवा गांव के उत्तर की ओर बहतिया नाला पूरब की ओर निकलता है, जबकि पश्चिम-दक्षिण की ओर से नदी पूरब की ओर जाती है। नाला और नदी के बीच में ये गांव आते हैं।
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बरसात के दिनों में यह नाले नदी का रूप ले लेते है, जिसके चलते ग्रामीणों को आवागमन में काफी परेशानी होती है। ग्रामीणों ने बहतिया नाले पर रपटापुल बनवाने की मांग की थी, लेकिन किसी भी पार्टी के जनप्रतिनिधि ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया, जिससे ग्रामीण धनीराम, अमृत लाल, ताहिर, पतराखन, बबलू आदि ने आपस में सहयोग कर दो दिन में ही लकड़ी का पुल बना डाला। पुल पर बांस, बल्ली लगाकर उसके नीचे से ह्यूम पाइप को निकाला गया है। इस पर बाइक आदि तो निकल सकती हैं, लेकिन ज्यादा बाढ़ आने पर पुल बह सकता है।
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दूल्हे ने फीता काटकर किया शुभारंभ
गांव मिठुई निवासी सहब लाल के बेटे सोनू की बरात बहराइच जानी थी, लेकिन गांव के अंदर पानी अधिक होने के कारण वाहन जाने में समस्या हो रही थी। करीब दो किलोमीटर तक बराती पैदल चलकर आए। दूल्हे को आता हुआ देखकर ग्रामीणों ने उसी से फीता कटवाकर पुल का शुभारंभ करा दिया।
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पुल बनने से सात गांवों के लोगों की आवाजाही हुई आसान निघासन। आजादी के दो दशक बाद भी बहतिया नाले पर कोई पुल न होने से परेशान ग्रामीणों ने खुद ही पहल कर लकड़ी का पुल बना डाला। पुल के बन जाने से क्षेत्र के सात गांव के लोगों की आवाजाही अब आसान हो गई है।
बैलहा के प्रधान रफीक और योगेंद्र भदौरिया ने बताया कि मटहिया, मिठुई, बैलहा, डीह, लोखंदर पुर, हड़ही पुरवा गांव के उत्तर की ओर बहतिया नाला पूरब की ओर निकलता है, जबकि पश्चिम-दक्षिण की ओर से नदी पूरब की ओर जाती है। नाला और नदी के बीच में ये गांव आते हैं।
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बरसात के दिनों में यह नाले नदी का रूप ले लेते है, जिसके चलते ग्रामीणों को आवागमन में काफी परेशानी होती है। ग्रामीणों ने बहतिया नाले पर रपटापुल बनवाने की मांग की थी, लेकिन किसी भी पार्टी के जनप्रतिनिधि ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया, जिससे ग्रामीण धनीराम, अमृत लाल, ताहिर, पतराखन, बबलू आदि ने आपस में सहयोग कर दो दिन में ही लकड़ी का पुल बना डाला। पुल पर बांस, बल्ली लगाकर उसके नीचे से ह्यूम पाइप को निकाला गया है। इस पर बाइक आदि तो निकल सकती हैं, लेकिन ज्यादा बाढ़ आने पर पुल बह सकता है।
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दूल्हे ने फीता काटकर किया शुभारंभ
गांव मिठुई निवासी सहब लाल के बेटे सोनू की बरात बहराइच जानी थी, लेकिन गांव के अंदर पानी अधिक होने के कारण वाहन जाने में समस्या हो रही थी। करीब दो किलोमीटर तक बराती पैदल चलकर आए। दूल्हे को आता हुआ देखकर ग्रामीणों ने उसी से फीता कटवाकर पुल का शुभारंभ करा दिया।