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नेपाली वन माफिया उजाड़ रहे तराई के जंगल
ब्यूरो/लखीमपुर खीरी।
Updated Thu, 10 Mar 2016 11:35 PM IST
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पाौधाराोपण
- फोटो : अमर उजाला
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नेपाल से सटा है खीरी जिले का 75 किलोमीटर जंगल
पड़ोसी देश नेपाल में सीमा पर जंगलों के सफाए के बाद अब खीरी समेत तराई के जंगल नेपाली वन माफिया के निशाने पर हैं। हाल ही में वन विभाग की उच्चस्तरीय टीम की जांच में इस बात का खुलासा हुआ है। अवैध कटान के मामले में हाल ही में डीएफओ नार्थ डॉ. मनोज शुक्ला और संपूर्णानगर के रेंजर राकेश चतुर्वेदी सस्पेंड हो चुके हैं। कई अफसर जांच के दायरे में हैं।
दुधवा नेशनल पार्क की 55 किलोमीटर और उत्तर खीरी वन प्रभाग की करीब 20 किलोमीटर सीमा नेपाल से सटी हुई है। सीमा पर जंगलों की सुरक्षा का दायित्व वन विभाग के साथ-साथ एसएसबी के हवाले है। तमाम खुफिया एजेंसियों, वन विभाग और एसएसबी की तैनाती के बावजूद वन माफिया खुली सीमा से जंगल में घुस कर रातों रात सीमा पार कर पेड़ों को काटकर लकड़ी नेपाल उठा ले जाते हैं। पिछले कुछ वर्षों में नेपाल में सीमा के पास कई आरा मशीनें लग गई हैं। जहां लकड़ियों का चिरान हो रहा है। इसमें वन कर्मियों और दूसरी एजेंसियों की मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता।
दुधवा नेशनल पार्क के साथ उत्तर खीरी वन प्रभाग के संपूर्णानगर रेंज के अलावा पीलीभीत के जंगल भी नेपाली वन माफिया के निशाने पर हैं। चौकसी के तमाम तामझाम के बाद भी दुधवा नेशनल पार्क के संरक्षित वन क्षेत्र और उत्तर खीरी वन प्रभाग के जंगलों से पेड़ों का कटान नहीं रुक रहा है। यह बात शासन के संज्ञान में भी है। वन विभाग के उच्चाधिकारियों के अलावा प्रमुख सचिव वन संजीव सरन भी इस मामले की जांच कर चुके हैं।
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दुधवा नेशनल पार्क समेत खीरी के जंगल कीमती साल और सागौन के पेड़ों से भरे हैं। पिछले कुछ वर्षों में कितने पेड़ों का कटान हुआ, इसका आकलन किया जा रहा है। एक अनुमान के मुताबिक पिछले तीन वर्षों में सैकड़ों पेड़ों का कटान हो चुका है।
खीरी के वन प्रभागों में जंगल की स्थिति
दुधवा नेशनल पार्क 68000 हैक्टेयर
उत्तर खीरी वन प्रभाग 40000 हैक्टेयर
दक्षिण खीरी वन प्रभाग 44000 हैक्टेयर
किशनपुर सेंक्चुरी 20400 हैक्टेयर
दुधवा की नेपाल से लगी सीमा 55 किलोमीटर
उत्तर खीरी वन प्रभाग की सीमा 20 किलोमीटर
भारत-नेपाल की खुली सीमाएं होने के कारण अक्सर नेपाली वन माफिया सीमा पार कर जंगल में घुसपैठ कर यहां की वन संपदा को नुकसान पहुंचा रहे हैं। यह बात जांच में सामने आई है। इन गतिविधियों को रोकने और जंगल की सुरक्षा का पूरा प्रयास किया जा रहा है।
-इवा शर्मा, मुख्य वन संरक्षक, लखनऊ मंडल
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पड़ोसी देश नेपाल में सीमा पर जंगलों के सफाए के बाद अब खीरी समेत तराई के जंगल नेपाली वन माफिया के निशाने पर हैं। हाल ही में वन विभाग की उच्चस्तरीय टीम की जांच में इस बात का खुलासा हुआ है। अवैध कटान के मामले में हाल ही में डीएफओ नार्थ डॉ. मनोज शुक्ला और संपूर्णानगर के रेंजर राकेश चतुर्वेदी सस्पेंड हो चुके हैं। कई अफसर जांच के दायरे में हैं।
दुधवा नेशनल पार्क की 55 किलोमीटर और उत्तर खीरी वन प्रभाग की करीब 20 किलोमीटर सीमा नेपाल से सटी हुई है। सीमा पर जंगलों की सुरक्षा का दायित्व वन विभाग के साथ-साथ एसएसबी के हवाले है। तमाम खुफिया एजेंसियों, वन विभाग और एसएसबी की तैनाती के बावजूद वन माफिया खुली सीमा से जंगल में घुस कर रातों रात सीमा पार कर पेड़ों को काटकर लकड़ी नेपाल उठा ले जाते हैं। पिछले कुछ वर्षों में नेपाल में सीमा के पास कई आरा मशीनें लग गई हैं। जहां लकड़ियों का चिरान हो रहा है। इसमें वन कर्मियों और दूसरी एजेंसियों की मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता।
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दुधवा नेशनल पार्क के साथ उत्तर खीरी वन प्रभाग के संपूर्णानगर रेंज के अलावा पीलीभीत के जंगल भी नेपाली वन माफिया के निशाने पर हैं। चौकसी के तमाम तामझाम के बाद भी दुधवा नेशनल पार्क के संरक्षित वन क्षेत्र और उत्तर खीरी वन प्रभाग के जंगलों से पेड़ों का कटान नहीं रुक रहा है। यह बात शासन के संज्ञान में भी है। वन विभाग के उच्चाधिकारियों के अलावा प्रमुख सचिव वन संजीव सरन भी इस मामले की जांच कर चुके हैं।
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दुधवा नेशनल पार्क समेत खीरी के जंगल कीमती साल और सागौन के पेड़ों से भरे हैं। पिछले कुछ वर्षों में कितने पेड़ों का कटान हुआ, इसका आकलन किया जा रहा है। एक अनुमान के मुताबिक पिछले तीन वर्षों में सैकड़ों पेड़ों का कटान हो चुका है।
खीरी के वन प्रभागों में जंगल की स्थिति
दुधवा नेशनल पार्क 68000 हैक्टेयर
उत्तर खीरी वन प्रभाग 40000 हैक्टेयर
दक्षिण खीरी वन प्रभाग 44000 हैक्टेयर
किशनपुर सेंक्चुरी 20400 हैक्टेयर
दुधवा की नेपाल से लगी सीमा 55 किलोमीटर
उत्तर खीरी वन प्रभाग की सीमा 20 किलोमीटर
भारत-नेपाल की खुली सीमाएं होने के कारण अक्सर नेपाली वन माफिया सीमा पार कर जंगल में घुसपैठ कर यहां की वन संपदा को नुकसान पहुंचा रहे हैं। यह बात जांच में सामने आई है। इन गतिविधियों को रोकने और जंगल की सुरक्षा का पूरा प्रयास किया जा रहा है।
-इवा शर्मा, मुख्य वन संरक्षक, लखनऊ मंडल