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दुधवा में आठ मार्च तक हड़ताल थमी
ब्यूरो/अमर उजाला, लखीमपुर खीरी
Updated Sat, 05 Mar 2016 12:25 AM IST
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नारेबाजी करते करमचारी।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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पलियाकलां (लखीमपुर खीरी)। डीएम पर शोषण का आरोप लगाकर उन्हें हटाने और उन पर कार्रवाई करने को लेकर आंदोलन कर वन कर्मियों और जिप्सी चालकों को मनाने के लिए प्रधान मुख्य वन संरक्षक रूपक डे शुक्रवार को दुधवा पहुंचे। डे से वार्ता के बाद फेडरेशन ने फौरी तौर पर आठ मार्च तक पर्यटकों को दुधवा की सैर कराने के लिए हड़ताल स्थगित कर दी। हालांकि कार्यालय कार्य बहिष्कार जारी रहेगा। फेडरेशन ने शर्त भी रखी है कि आठ मार्च तक डीएम को हटाने के साथ उन पर कार्रवाई नहीं की गई तो नौ मार्च को वन कर्मी लखनऊ में रैली करेंगे और फिर दुधवा का पर्यटन ठप कर देंगे।
बताते चलें, डीएम पर दोबारा अभद्रता करने और गलत तरीके से जिप्सी सीज किए जाने आदि आरोप लगाते हुए दुधवा के वन कर्मी और जिप्सी चालक 27 जनवरी से हड़ताल पर हैं। शुक्रवार को दोपहर बाद प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव रूपक डे दुधवा बेस कैंप पहुंचे और सभी आंदोलित कर्मियों को बेस कैंप बुलवा कर बात की। फेडरेशन पदाधिकारियों के मुताबिक रूपक डे ने मांगों पर यथाशीघ्र कार्रवाई और किसी का उत्पीड़न न होने देने का आश्वासन दिया है। डे ने पर्यटन ठप होने से हो रहे नुकसान को सामने रखा। पदाधिकारियों के मुताबिक प्रमुख सचिव वन संजीव सरन, प्रधान मुख्य वन संरक्षक डे से हुई बातचीत और मुख्यमंत्री पर विश्वास करते हुए पर्यटन हड़ताल को आठ मार्च तक स्थगित कर दिया गया है।
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38 दिन बाद जंगल में घरघराएगी जिप्सी
क्रासर
प्राइवेट वाहनों से शुरू कराया जाएगा पर्यटन
हालांकि सैलानियों की तादाद कम रहने की आशंका
अमर उजाला ब्यूरो
पलियाकलां। फेडरेशन आफ फारेस्ट की माने तो पर्यटन शनिवार की सुबह प्राइवेट वाहनों से शुरू होगा और वॉचर सैलानियों को जंगल का भ्रमण कराएंगे। पार्क में अटैच जिप्सियां और रखे गए गाइडों का न जाना एक सवाल है जिसका जवाब कोई नहीं दे पा रहा है।
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बताते चलें दोबारा अभद्रता का आरोप लगाकर की गई हड़ताल करीब 37 दिन जारी रही है और इसमें तमाम सैलानी यहां आकर वापस भी जा चुके हैं इससे दुधवा की साख को बट्टा लगा है। सैलानियों के वापस जाने और आंदोलन के कारण उनमें यहां आने की रुचि कम हुई है। इससे सैलानियों के अभी कम ही आने के कयास लगाए जा रहे हैं।
प्रांतीय नेताओं के लगातार संपर्क में हैं कर्मी
फेडरेशन आफ फारेस्ट के पदाधिकारी, प्रांतीय नेताओं के अलावा कई जिलों के पदाधिकारियों के संपर्क में हैं। पदाधिकारियों के मुताबिक यह आला अधिकारियों के आश्वासन और विश्वास पर किया गया है। इसमें अगर उनके साथ कोई राजनीति की जाएगी तो वह आगे के लिए तैयार हैं और पूरे प्रदेश में संपर्क कर चुके हैं। उनकी माने तो अब विश्वास पर खरे उतरने का काम आला अधिकारियों और शासन का है।
कई घंटे चली वार्ता
दोपहर से शुरू हुई वार्ता दुधवा में कई घंटे चली और इसमें कई मोड़ भी आए। फिलहाल चार दिनों के लिए ही सही वनाधिकारियों ने राहत की सांस ली है।
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बताते चलें, डीएम पर दोबारा अभद्रता करने और गलत तरीके से जिप्सी सीज किए जाने आदि आरोप लगाते हुए दुधवा के वन कर्मी और जिप्सी चालक 27 जनवरी से हड़ताल पर हैं। शुक्रवार को दोपहर बाद प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव रूपक डे दुधवा बेस कैंप पहुंचे और सभी आंदोलित कर्मियों को बेस कैंप बुलवा कर बात की। फेडरेशन पदाधिकारियों के मुताबिक रूपक डे ने मांगों पर यथाशीघ्र कार्रवाई और किसी का उत्पीड़न न होने देने का आश्वासन दिया है। डे ने पर्यटन ठप होने से हो रहे नुकसान को सामने रखा। पदाधिकारियों के मुताबिक प्रमुख सचिव वन संजीव सरन, प्रधान मुख्य वन संरक्षक डे से हुई बातचीत और मुख्यमंत्री पर विश्वास करते हुए पर्यटन हड़ताल को आठ मार्च तक स्थगित कर दिया गया है।
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38 दिन बाद जंगल में घरघराएगी जिप्सी
क्रासर
प्राइवेट वाहनों से शुरू कराया जाएगा पर्यटन
हालांकि सैलानियों की तादाद कम रहने की आशंका
अमर उजाला ब्यूरो
पलियाकलां। फेडरेशन आफ फारेस्ट की माने तो पर्यटन शनिवार की सुबह प्राइवेट वाहनों से शुरू होगा और वॉचर सैलानियों को जंगल का भ्रमण कराएंगे। पार्क में अटैच जिप्सियां और रखे गए गाइडों का न जाना एक सवाल है जिसका जवाब कोई नहीं दे पा रहा है।
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बताते चलें दोबारा अभद्रता का आरोप लगाकर की गई हड़ताल करीब 37 दिन जारी रही है और इसमें तमाम सैलानी यहां आकर वापस भी जा चुके हैं इससे दुधवा की साख को बट्टा लगा है। सैलानियों के वापस जाने और आंदोलन के कारण उनमें यहां आने की रुचि कम हुई है। इससे सैलानियों के अभी कम ही आने के कयास लगाए जा रहे हैं।
प्रांतीय नेताओं के लगातार संपर्क में हैं कर्मी
फेडरेशन आफ फारेस्ट के पदाधिकारी, प्रांतीय नेताओं के अलावा कई जिलों के पदाधिकारियों के संपर्क में हैं। पदाधिकारियों के मुताबिक यह आला अधिकारियों के आश्वासन और विश्वास पर किया गया है। इसमें अगर उनके साथ कोई राजनीति की जाएगी तो वह आगे के लिए तैयार हैं और पूरे प्रदेश में संपर्क कर चुके हैं। उनकी माने तो अब विश्वास पर खरे उतरने का काम आला अधिकारियों और शासन का है।
कई घंटे चली वार्ता
दोपहर से शुरू हुई वार्ता दुधवा में कई घंटे चली और इसमें कई मोड़ भी आए। फिलहाल चार दिनों के लिए ही सही वनाधिकारियों ने राहत की सांस ली है।