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26 लड़कियां और महिलाएं पर सिर्फ एक सुरक्षा गार्ड
ब्यूरो/लखीमपुर खीरी।
Updated Thu, 10 Mar 2016 11:34 PM IST
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फांसी
- फोटो : अमर उजाला
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अल्पावास गृह में न पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था न स्टाफ, किशोरी के फांसी लगाने से उठे तमाम सवाल
शहर से सटे सलेमपुर कोन स्थित एक मकान में संचालित अल्पावास गृह में न तो सुरक्षा व्यवस्था है और न ही स्टाफ। यहां भगवान भरोसे 26 लड़कियां और महिलाएं रह रही हैं। जिस रात 16 साल की किशोरी ने फांसी लगाई, उस दिन 16 महिलाएं थीं, रात में सिर्फ एक ही गार्ड था। नियमानुसार वह भी अंदर दाखिल नहीं हो सकता। इस तरह अल्पावास की सुरक्षा को लेकर न तो यहां की संचालिका राधा गुप्ता की संजीदगी नजर आती है और न ही प्रशासन की, क्योंकि राधा गुप्ता भी रात में अपने घर चली गईं थीं।
अल्पावास गृह में कुल 26 लड़कियां और महिलाएं रह रही हैं, जिनमें बुधवार की रात 16 लड़कियां एवं महिलाएं थीं, जबकि नैतिक खतरे से ग्रस्त 10 लड़कियां परिवार वालों के अनुरोध पर सभी औपचारिकताएं पूरी कर 15 दिन के लिए घर जा चुकी थीं। यहां के स्टाफ पर नजर डालें तो वार्डेन और संचालिका राधा गुप्ता, काउंसलर जया सैनी, क्लर्क कुसुम तिवारी और चपरासी बलराम ही तैनात हैं। बुधवार की रात किशोरी ने किस समय फांसी लगाई, इसका अंदाजा किसी को नहीं है।
23 दिन में विवेचक नहीं दर्ज कर सका बयान
लखीमपुर खीरी। पिछले 23 दिन से उसे हर सुबह खुद की आजादी की उम्मीद लगी रहती थी, लेकिन हर शाम उसे अपनों से दूरी उसे झकझोर देती थी। शाम होते होते गुमसुम सी रहने वाली किशोरी पिछले कई दिनों से अल्पावास गृह की दूसरी साथियों से बात भी नहीं कर रही थी। कुछ रोज पहले मां भी आई थी, लेकिन वह तब जाने को तैयार नहीं हुई थी, लेकिन अल्पावास गृह की संचालिका की माने तो किशोरी काउंसलिंग के बाद घर जाने को तैयार थी। आखिर ऐसी क्या बात हुई कि उसे मौत को गले लगाना पड़ गया।
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गुरुवार की सुबह शहर के महिला अल्पावास गृह में एक 16 साल की किशोरी ने दुपट्टे से फांसी लगा ली। यह किशोरी पिछले माह की 17 फरवरी को लाई गई थी। पिछले 23 दिन में विवेचक अब तक किशोरी के बयान तक नही दर्ज करा सके। खुली आजादी में सांस लेने वाली किशोरी के लिए अल्पावास गृह किसी जेल से कम नहीं था। किशोरी जिस युवक के साथ पकड़ी गई थी वह भी जेल में बंद है। कानूनी रूप से किशोरी को मजिस्ट्रेट के सामने बयान होने के बाद ही घर वालों को सौंपा जा सकता है। एक मार्च को मां भी आई थी, उसे काफी समझाया बुझाया, भरोसा दिलाया कि अगर वह इनके माफिक बयान दे देगी तो उसे जल्द ही इस कैद से छुट्टी मिल जाएगी। करीब 23 दिन से यहां बंद किशोरी अपनों से लंबे समय से दूर थी, उनसे दूरी ही किशोरी को इस मोड़ पर ले आई कि उसे जिंदगी मुश्किल लगने लगी। उसे यहां से छूटने के बाद समाज में रुसवाई का भी खौफ था। बुधवार की रात को उसने इस कैद से छुटकारा पाने के लिए अपनी जिंदगी ही खत्म कर ली। --
काउंसर ने डिप्रेशन में पाया था किशोरी को
17 फरवरी 2016 से अल्पावास में रह रही किशोरी से मिलने के लिए उसकी मां कई बार आ चुकी थी। इस दौरान उसने अल्पावास गृह के स्टाफ से बेटी को घर ले जाने की बात कही थी, लेकिन स्टाफ ने कोर्ट के समक्ष पेश करने के बाद कोई निर्णय होने का हवाला देते हुए मना कर दिया था, वहीं कई दिनों से अल्पावास में कैदी की तरह रहने के कारण किशोरी डिप्रेशन का शिकार होती चली गई। हालांकि इस दौरान काउंसलर जया सैनी ने कई बार किशोरी को समझाने का प्रयास किया और अच्छे-बुरे फैसलों के बारे में बताते हुए उसके बयान भी दर्ज किए।
बयान में देरी भी बनी वजह
किशोरी के डिप्रेशन में होने की बजह उसका कोर्ट में बयान न होना और अल्पावास गृह में अपनों से दूर रहना भी माना जा रहा है। काउंसलर के मुताबिक एक मार्च 2016 को महिला आरक्षी रेखारानी पांडेय से किशोरी को कोर्ट में पेश कराने की बावत बातचीत की गई थी, लेकिन आरक्षी ने कहा कि दरोगा (विवेचक) अभी बैठ नहीं रहे हैं।
समझाने पर घर जाने को तैयार हो गई थी किशोरी
दो मार्च को हुई काउंसलिंग में किशोरी ने पहले घर जाने की बात से इंकार किया, लेकिन काउंसलर के समझाने पर वह घर जाने के लिए तैयार हो गई थी। बस कोर्ट के समक्ष 164 के बयान न हो पाने की वजह से उसे घर नहीं जाने दिया गया।
एसपी ने सौंपी सीओ धौरहरा को जांच
एसपी अखिलेश चौरसिया ने फूलबेहड़ थाने के एसआई एवं विवेचक मंजेश कुमार यादव को बयान करने में देरी के लिए जिम्मेदार माना है। उन्होंने मामले की जांच सीओ धौरहरा मनोज यादव को सौंपते हुए पूरी रिपोर्ट तलब की है।
बेटी की मौत पर मां ने उठाए तमाम सवाल
शहर से सटे सलेमपुर कोन स्थित एक मकान में संचालित अल्पावास गृह में किशोरी के फांसी लगाकर जान देने की खबर पर पहुंची मां ने चीखकर कहा, सभी ने मिलकर बेटी को परेशान किया। उसे स्टाफ ने मिलने नहीं दिया। मुलाकात के लिए रुपये मांगे गए। पुलिस भी मिली रही। यह सब कहकर मां बिलखती रही।
किशोरी के पिता ने अल्पावास गृह के स्टाफ पर प्रताड़ना और मारकर लटका देने का आरोप लगाया है। साथ ही फूलबेहड़ पुलिस के रवैये को कटघरे में खड़ा किया है। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने ढाढ़स बंधाते हुए जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।
बिस्तर पर तकिया लगाकर ओढ़ाई रजाई
बुधवार की रात सभी लड़कियां कमरे में सो रही थीं। सुबह किशोरी के न जागने पर अन्य लड़कियों ने उसकी रजाई हटाई, तो उसके नीचे तकिया रखी थी।
तीन डॉक्टरों के पैनल ने किया पोस्टमार्टम
मामला पुलिस और अल्पावास गृह से जुड़ा होने के कारण किशोरी के शव का पोस्टमार्टम तीन डॉक्टरों डॉ रोहित पाठक, डॉ राजकुमार और डॉ यामिनी बादल के पैनल से कराया गया है। साथ ही वीडियोग्राफी भी कराई गई है।
हो सकती है मजिस्ट्रेटी जांच
जिला प्रोबेशन अधिकारी बीके सिंह ने घटनास्थल का निरीक्षण किया हैै। उन्होंने अल्पावास अधीक्षिका राधा गुप्ता सहित समस्त स्टाफ और लड़कियों के बयान लिए हैं। उन्होंने बताया है कि जरूरत पड़ी तो घटना की मजिस्ट्रेटी जांच कराई जा सकती हैै।
फांसी लगाने वाली किशोरी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हैंगिंग की पुष्टि हुई है। इसके अलावा शरीर पर कोई चोट के निशान नहीं मिले हैं।
-अखिलेश चौरसिया, एसपी
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शहर से सटे सलेमपुर कोन स्थित एक मकान में संचालित अल्पावास गृह में न तो सुरक्षा व्यवस्था है और न ही स्टाफ। यहां भगवान भरोसे 26 लड़कियां और महिलाएं रह रही हैं। जिस रात 16 साल की किशोरी ने फांसी लगाई, उस दिन 16 महिलाएं थीं, रात में सिर्फ एक ही गार्ड था। नियमानुसार वह भी अंदर दाखिल नहीं हो सकता। इस तरह अल्पावास की सुरक्षा को लेकर न तो यहां की संचालिका राधा गुप्ता की संजीदगी नजर आती है और न ही प्रशासन की, क्योंकि राधा गुप्ता भी रात में अपने घर चली गईं थीं।
अल्पावास गृह में कुल 26 लड़कियां और महिलाएं रह रही हैं, जिनमें बुधवार की रात 16 लड़कियां एवं महिलाएं थीं, जबकि नैतिक खतरे से ग्रस्त 10 लड़कियां परिवार वालों के अनुरोध पर सभी औपचारिकताएं पूरी कर 15 दिन के लिए घर जा चुकी थीं। यहां के स्टाफ पर नजर डालें तो वार्डेन और संचालिका राधा गुप्ता, काउंसलर जया सैनी, क्लर्क कुसुम तिवारी और चपरासी बलराम ही तैनात हैं। बुधवार की रात किशोरी ने किस समय फांसी लगाई, इसका अंदाजा किसी को नहीं है।
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23 दिन में विवेचक नहीं दर्ज कर सका बयान
लखीमपुर खीरी। पिछले 23 दिन से उसे हर सुबह खुद की आजादी की उम्मीद लगी रहती थी, लेकिन हर शाम उसे अपनों से दूरी उसे झकझोर देती थी। शाम होते होते गुमसुम सी रहने वाली किशोरी पिछले कई दिनों से अल्पावास गृह की दूसरी साथियों से बात भी नहीं कर रही थी। कुछ रोज पहले मां भी आई थी, लेकिन वह तब जाने को तैयार नहीं हुई थी, लेकिन अल्पावास गृह की संचालिका की माने तो किशोरी काउंसलिंग के बाद घर जाने को तैयार थी। आखिर ऐसी क्या बात हुई कि उसे मौत को गले लगाना पड़ गया।
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गुरुवार की सुबह शहर के महिला अल्पावास गृह में एक 16 साल की किशोरी ने दुपट्टे से फांसी लगा ली। यह किशोरी पिछले माह की 17 फरवरी को लाई गई थी। पिछले 23 दिन में विवेचक अब तक किशोरी के बयान तक नही दर्ज करा सके। खुली आजादी में सांस लेने वाली किशोरी के लिए अल्पावास गृह किसी जेल से कम नहीं था। किशोरी जिस युवक के साथ पकड़ी गई थी वह भी जेल में बंद है। कानूनी रूप से किशोरी को मजिस्ट्रेट के सामने बयान होने के बाद ही घर वालों को सौंपा जा सकता है। एक मार्च को मां भी आई थी, उसे काफी समझाया बुझाया, भरोसा दिलाया कि अगर वह इनके माफिक बयान दे देगी तो उसे जल्द ही इस कैद से छुट्टी मिल जाएगी। करीब 23 दिन से यहां बंद किशोरी अपनों से लंबे समय से दूर थी, उनसे दूरी ही किशोरी को इस मोड़ पर ले आई कि उसे जिंदगी मुश्किल लगने लगी। उसे यहां से छूटने के बाद समाज में रुसवाई का भी खौफ था। बुधवार की रात को उसने इस कैद से छुटकारा पाने के लिए अपनी जिंदगी ही खत्म कर ली। --
काउंसर ने डिप्रेशन में पाया था किशोरी को
17 फरवरी 2016 से अल्पावास में रह रही किशोरी से मिलने के लिए उसकी मां कई बार आ चुकी थी। इस दौरान उसने अल्पावास गृह के स्टाफ से बेटी को घर ले जाने की बात कही थी, लेकिन स्टाफ ने कोर्ट के समक्ष पेश करने के बाद कोई निर्णय होने का हवाला देते हुए मना कर दिया था, वहीं कई दिनों से अल्पावास में कैदी की तरह रहने के कारण किशोरी डिप्रेशन का शिकार होती चली गई। हालांकि इस दौरान काउंसलर जया सैनी ने कई बार किशोरी को समझाने का प्रयास किया और अच्छे-बुरे फैसलों के बारे में बताते हुए उसके बयान भी दर्ज किए।
बयान में देरी भी बनी वजह
किशोरी के डिप्रेशन में होने की बजह उसका कोर्ट में बयान न होना और अल्पावास गृह में अपनों से दूर रहना भी माना जा रहा है। काउंसलर के मुताबिक एक मार्च 2016 को महिला आरक्षी रेखारानी पांडेय से किशोरी को कोर्ट में पेश कराने की बावत बातचीत की गई थी, लेकिन आरक्षी ने कहा कि दरोगा (विवेचक) अभी बैठ नहीं रहे हैं।
समझाने पर घर जाने को तैयार हो गई थी किशोरी
दो मार्च को हुई काउंसलिंग में किशोरी ने पहले घर जाने की बात से इंकार किया, लेकिन काउंसलर के समझाने पर वह घर जाने के लिए तैयार हो गई थी। बस कोर्ट के समक्ष 164 के बयान न हो पाने की वजह से उसे घर नहीं जाने दिया गया।
एसपी ने सौंपी सीओ धौरहरा को जांच
एसपी अखिलेश चौरसिया ने फूलबेहड़ थाने के एसआई एवं विवेचक मंजेश कुमार यादव को बयान करने में देरी के लिए जिम्मेदार माना है। उन्होंने मामले की जांच सीओ धौरहरा मनोज यादव को सौंपते हुए पूरी रिपोर्ट तलब की है।
बेटी की मौत पर मां ने उठाए तमाम सवाल
शहर से सटे सलेमपुर कोन स्थित एक मकान में संचालित अल्पावास गृह में किशोरी के फांसी लगाकर जान देने की खबर पर पहुंची मां ने चीखकर कहा, सभी ने मिलकर बेटी को परेशान किया। उसे स्टाफ ने मिलने नहीं दिया। मुलाकात के लिए रुपये मांगे गए। पुलिस भी मिली रही। यह सब कहकर मां बिलखती रही।
किशोरी के पिता ने अल्पावास गृह के स्टाफ पर प्रताड़ना और मारकर लटका देने का आरोप लगाया है। साथ ही फूलबेहड़ पुलिस के रवैये को कटघरे में खड़ा किया है। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने ढाढ़स बंधाते हुए जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।
बिस्तर पर तकिया लगाकर ओढ़ाई रजाई
बुधवार की रात सभी लड़कियां कमरे में सो रही थीं। सुबह किशोरी के न जागने पर अन्य लड़कियों ने उसकी रजाई हटाई, तो उसके नीचे तकिया रखी थी।
तीन डॉक्टरों के पैनल ने किया पोस्टमार्टम
मामला पुलिस और अल्पावास गृह से जुड़ा होने के कारण किशोरी के शव का पोस्टमार्टम तीन डॉक्टरों डॉ रोहित पाठक, डॉ राजकुमार और डॉ यामिनी बादल के पैनल से कराया गया है। साथ ही वीडियोग्राफी भी कराई गई है।
हो सकती है मजिस्ट्रेटी जांच
जिला प्रोबेशन अधिकारी बीके सिंह ने घटनास्थल का निरीक्षण किया हैै। उन्होंने अल्पावास अधीक्षिका राधा गुप्ता सहित समस्त स्टाफ और लड़कियों के बयान लिए हैं। उन्होंने बताया है कि जरूरत पड़ी तो घटना की मजिस्ट्रेटी जांच कराई जा सकती हैै।
फांसी लगाने वाली किशोरी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हैंगिंग की पुष्टि हुई है। इसके अलावा शरीर पर कोई चोट के निशान नहीं मिले हैं।
-अखिलेश चौरसिया, एसपी