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मानदेय को लेकर बिफरीं आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 09 Mar 2016 01:07 AM IST
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मजदूरों के बराबर भी मानदेय नहीं मिलने से आक्रोशित आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने मंगलवार को महिला दिवस को काला दिवस के रूप में मनाया। मंझनपुर में बैठक करके केंद्र और प्रदेश सरकार पर अनदेखी का आरोप लगाया। प्रधानमंत्री को संबोधित 3 सूत्रीय ज्ञापन डीएम को दिया। इसमें कार्यकत्रियों को राज्यकर्मी का दर्जा दिए जाने और मानदेय 15 हजार रुपये किए जाने की मांग की।
मंगलवार को महिला दिवस था। अपेक्षाकृत कम मानदेय मिलने से भड़की आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने इसे काला दिवस के रूप में मनाया। माथे पर काली पट्टी बांधकर मंझनपुर में कार्यकत्रियों ने बैठक की। आंगनबाड़ी संघ की जिलाध्यक्ष माया सिंह ने केंद्र और प्रदेश सरकार पर आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की अनदेखी का आरोप लगाया। कहाकि प्रदेश सरकार ने स्कूलों में संविदा पर इतने ही मानदेय में पढ़ाने वाले शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक बनाकर उनकी जिंदगी संवार दी, लेकिन महिला और बच्चों के स्वास्थ्य की दिशा में काम करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों, सहायिकाओं की समस्या की ओर कोई भी अधिकारी अथवा सरकार तनिक भी ध्यान नहीं दे रही है। उन्हें दिहाड़ी मजदूरों से भी आधा मानदेय दिया जा रहा है। इससे महंगाई में उन्हें परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है।
ऐलान किया कि कार्यकत्रियां अब अपनी यह अनदेखी बर्दाश्त नहीं करेंगी। हक के लिए आरपार की लड़ाई लड़ी जाएगी। बैठक के बाद नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंची कार्यकत्रियों ने प्रधानमंत्री को संबोधित 3 सूत्रीय ज्ञापन जिलाधिकारी को दिया। इसमें आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को राज्यकर्मी का दर्जा देने, 15000 रुपये मानदेय दिए जाने और आईसीडीएस को निजी हाथों में नहीं दिए जाने की मांग की। इस मौके पर अर्चना सिंह, जीनत बानो, मनीषा श्रीवास्तव, शकुंतला देवी, सुमन देवी, कल्पना देवी, पुष्पा देवी, कौशल्या देवी, मीना देवी, साधना देवी, रानी देवी, मीना देवी, फूजिया बेगम, गीता देवी, राधिका देवी, सुधा देवी, सुनीता देवी, सरोज देवी, भानमती, रीता देवी, करूणा देवी, मिथिलेश देवी, आशा देवी आदि मौजूद रहीं।
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मंगलवार को महिला दिवस था। अपेक्षाकृत कम मानदेय मिलने से भड़की आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने इसे काला दिवस के रूप में मनाया। माथे पर काली पट्टी बांधकर मंझनपुर में कार्यकत्रियों ने बैठक की। आंगनबाड़ी संघ की जिलाध्यक्ष माया सिंह ने केंद्र और प्रदेश सरकार पर आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की अनदेखी का आरोप लगाया। कहाकि प्रदेश सरकार ने स्कूलों में संविदा पर इतने ही मानदेय में पढ़ाने वाले शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक बनाकर उनकी जिंदगी संवार दी, लेकिन महिला और बच्चों के स्वास्थ्य की दिशा में काम करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों, सहायिकाओं की समस्या की ओर कोई भी अधिकारी अथवा सरकार तनिक भी ध्यान नहीं दे रही है। उन्हें दिहाड़ी मजदूरों से भी आधा मानदेय दिया जा रहा है। इससे महंगाई में उन्हें परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है।
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ऐलान किया कि कार्यकत्रियां अब अपनी यह अनदेखी बर्दाश्त नहीं करेंगी। हक के लिए आरपार की लड़ाई लड़ी जाएगी। बैठक के बाद नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंची कार्यकत्रियों ने प्रधानमंत्री को संबोधित 3 सूत्रीय ज्ञापन जिलाधिकारी को दिया। इसमें आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को राज्यकर्मी का दर्जा देने, 15000 रुपये मानदेय दिए जाने और आईसीडीएस को निजी हाथों में नहीं दिए जाने की मांग की। इस मौके पर अर्चना सिंह, जीनत बानो, मनीषा श्रीवास्तव, शकुंतला देवी, सुमन देवी, कल्पना देवी, पुष्पा देवी, कौशल्या देवी, मीना देवी, साधना देवी, रानी देवी, मीना देवी, फूजिया बेगम, गीता देवी, राधिका देवी, सुधा देवी, सुनीता देवी, सरोज देवी, भानमती, रीता देवी, करूणा देवी, मिथिलेश देवी, आशा देवी आदि मौजूद रहीं।
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