फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   Resort to organic farming to increase fertility

उर्वरा शक्ति बढ़ाने को जैविक खेती का सहारा

Mon, 07 Mar 2016 01:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/झांसी
अमर उजाला ब्यूरो/झांसी Updated Mon, 07 Mar 2016 01:23 AM IST
विज्ञापन
Resort to organic farming to increase fertility
agriculture new, news in jhansi - फोटो : demo pic
झांसी। रासायनिक उर्वरकों के लगातार प्रयोग से दिनों दिन घटती जमीन की उर्वरा शक्ति को फिर से बढ़ाने की कोशिश सरकार ने शुरू कर दी है। इसके तहत उत्तम किस्म और ज्यादा पैदावार के लिए जिले में जैविक खेती की जाएगी। इसके लिए जनपद के आठों में ब्लाक में पचास क्लस्टर बनाकर जैविक खेती का प्रयोग शुरू हो गया है।  
विज्ञापन


गौरतलब है कि परंपरागत खेती विकास योजना का मुख्य उद्देश्य रासायनिक खादों पर किसानों की बढ़ती निर्भरता खत्म करना है। पहले चरण में यह योजना तीन वित्तीय वर्ष के लिए बनाई गई है। इस योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए एनजीओ का चयन किया जाएगा।
विज्ञापन


योजना के तहत हजारों किसानों को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य है। क्लस्टर को जैविक खेती की पूरी जानकारी के साथ बेहतर क्रियान्वयन की तकनीकी एवं तमाम संसाधन भी उपलब्ध कराए जाएंगे। केंद्र सरकार की परंपरागत खेती विकास योजना के तहत पहले चरण में बुंदेलखंड के सातों जनपदों समेत प्रदेश के कुल 15 जिलों को चुना गया है। इसमें जैविक खेती करने वाले किसानों के रजिस्ट्रेशन किए जा रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


उप कृषि निदेशक डॉ. यूपी सिंह के अनुसार बुंदेलखंड के जनपद झांसी में स्थित आठ ब्लाकों में पचास क्लस्टर का गठन कर लिया गया है। प्रत्येक क्लस्टर में पचास किसान हैं। सबसे ज्यादा क्लस्टर बबीना क्षेत्र में बनाए गए हैं। प्रत्येक क्लस्टर पर आने वाला अनुमानित खर्च लगभग 14.35 लाख रुपये होगा, जो तीन वर्ष का बजट है। प्रत्येक किसान को एक यूनिट के तहत एक एकड़ खेती की जमीन के लिए चुना गया है।

इन सभी को कम पानी में होने वाली फसलों को बढ़ावा देने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें कटिया गेहूं, मूंगफली, अदरक आदि की फसलें शामिल हैं। उन्होेंने बताया कि प्रत्येक किसान को वर्मी कंपोस्ट का अधिकाधिक प्रयोग करने की सलाह दी जा रही है। जिससे उसे पैदावार में मदद मिल सके।

यह है जैविक खेती का स्वरूप
पूर्ण रूप से जैविक खादों पर आधारित फसल पैदा करना जैविक खेती कहलाता है। दुनिया के लिए भले ही यह नई तकनीक हो, मगर देश में परंपरागत रूप से जैविक खाद पर आधारित खेती होती है। जैविक खाद का इस्तेमाल करना देश में परंपरागत रूप से होता रहा है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में रासायनिक खादों पर निर्भरता बढ़ने के बाद से जैविक खाद का इस्तेमाल नगण्य हो गया है।

जन-धन योजना के खाते में आ रहा पैसा
उप निदेशक कृषि के अनुसार किसानों के जनधन योजना के खाते में शासन से आए रुपयों को भेजा जा रहा है। प्रत्येक किसान को फिलहाल वर्मी कंपोस्ट के लिए पांच-पांच हजार रुपये भेजे गए हैं। इसके अलावा अन्य मदों में आने वाली धनराशि भी इसी जनधन योजना खाते में भेजी जाएगी। उन्होंने बताया कि इन रुपयों का इस्तेमाल किसानों को जैविक खेती के बारे में बताने के लिए होने वाली बैठक, एक्सपोजर, विजिट, ट्रेनिंग सत्र, ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन, मृदा परीक्षण, आर्गेनिक खेती, नर्सरी की जानकारी, लिक्विड बायो फर्टिलाइजर लिक्विड बायो पेस्टीसाइड आदि को उपलब्ध कराने में किया जाएगा।
 
एक माह में तैयार हो जाती है वर्मी कंपोस्ट
जयगोपाल कंपनी का केंचुआ महज सात दिनों में अपने अंडे देकर उन्हें विकसित कर लेता है। घरों में बने गड्ढों में अनुपयोगी भोजन, कचरा एवं अन्य पदार्थ फेंके जाते हैं। इसमें ही केंचुआ को भी छोड़ दिया जाए। यह केंचुआ महज 45 डिग्री तापमान पर जीवित रहता है। इसलिए जैविक खेती में इसे सबसे अच्छा माना जाता है। उप कृषि निदेशक ने बताया कि यह केंचुआ निष्प्रयोज्य खाद्य पदार्थों व अन्य मैटेरियल को गलाकर महज 25 से 30 दिनों में ही खाद तैयार कर देता है। जो जैविक खेती के लिए सबसे बेहतर मानी जाती है।


केंद्र सरकार की वेबसाइट पीजीएफ इंडिया पर होगा ब्योरा
उप कृषि निदेशक का कहना है कि परंपरागत खेती विकास योजना के तहत गठित क्लस्टर एवं उनमें कार्यरत किसानों का संपूर्ण ब्योरा केंद्र सरकार की वेबसाइट पीजीएफ इंडिया पर होगा। इसमें कहीं कोई भी व्यक्ति क्लिक कर जैविक खेती करने वाले किसान का रजिस्ट्रेशन, उसकी खेती की उन्नत तकनीक एवं अन्य जानकारियां हासिल कर सकेगा। इसके अलावा कृषि विभाग के राष्ट्रीय पोर्टल राष्ट्रीय जैविक केंद्र पर भी उक्त जानकारियां एवं खेती की उन्नत तकनीक उपलब्ध है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed