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आफत बनकर बरसे बादल
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
Updated Sun, 06 Mar 2016 10:53 PM IST
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कुसमिलिया में तहसनहस गेहूं की फसल।
- फोटो : अमर उजाला
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मौसम एक बार फिर किसानों के लिए बेरहम हो गया है। शनिवार की देर रात तेज हवाओं और गरज-चमक के साथ बादल किसानों पर आफत बनकर बरसे है। इस बारिश ने फसलों को तहस नहस कर दिया। सबसे अधिक नुकसान दलहनी फसलों में हुआ है जो खेतों में पक कर तैयार खड़ी थी। इसके अलावा गेहूं भी तेज हवाओं के चलते खेतों में बिछ गया है। वहीं कुछेक
इलाके में गेहूं के लिए यह पानी अमृत के समान रहा। किसानों का कहना है कि प्रकृति उनकी परीक्षा ले रही है। इसमें कोई कर भी क्या सकता है? किसान की बची उम्मीदों पर भी पानी फिर गया है। मौसम में हो रहे बदलाव ने किसानों की खुशियों को छीन सा लिया है। पहले सूरज की तपन से खेतों की नमी खत्म हो गई और दलहनी फसलें समय से पहले पक कर तैयार हो
गई। किसान गेहूं की फसल को बचाने के लिए पानी को भटकता रहा, तब उसे पानी नहीं मिला और जब मिला तो बर्बादी की कहानी लिख गया। शनिवार को यकायक मौसम में बदलाव आया और देर रात बारिश होने लगी। शहर में तो तेज बारिश हुई वहीं पर मुहम्मदाबाद समेत कई क्षेत्रों में हल्की बारिश हुई। इससे दलहनी फसलें मटर, मसूर, चना की फसलें बुरी तरह
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प्रभावित हुई हैं। जो फसल पक कर तैयार खड़ी थी वह गीली हो गई और अब धूप में उसके चटकने की आशंका बढ़ गई है। तेज हवाओं ने गेहूं की फसलों को भी तहसनहस कर दिया। जिन खेतों में नलकूप से पानी लग चुका था उनमें गेहूं की फसल खेत में बिछ गई। इससे अब दाना हल्का हो जाएगा। रविवार की सुबह जब किसान खेतों पर पहुंचे तो खेतों में फसल देखकर कर
मायूस हो गए। मुहम्मदाबाद के किसान देवेंद्र सिंह, महपाल सिंह, चरन सिंह, राजकुमार, संतोष सिंह, कृष्ण दत्त तिवारी, याकूब अली, शशिकांत राजपूत आदि ने बताया कि पूर्व में किसान फसलों की तबाही से बर्बादी की कगार पर पहले ही पहुंच गया था। इस बार भी सूखे के हालातों से कुछ खास फसलें नहीं थीं और उसमें भी इस बारिश ने किसानों के सारे सपने चकनाचूर कर दिए।
-मौसम की मार झेल रहे किसानों पर एक बार फिर से आफत का पहाड़ टूटा है। शनिवार की रात हुई बारिश से दलहनी फसलें बर्बाद हो गई है। तकरीबन 50 फीसदी नुकसान तो हो ही गया। दाना चटक जाएगा जो खेत में ही गिर जाएगा। किसान के हाथ तो परेशानी ही आनी है। प्रशासन नुकसान का आंकलन कराए।
राजवीर सिंह जादौन
मंडल अध्यक्ष भाकियू
बारिश से गेहूं को फायदा हुआ है। जिस खेत में पानी नहीं लगा था उसमें कोई नुकसान नहीं है। जिन खेतों में पानी लगा है उनमें पानी से नहीं हवा से नुकसान हुआ है। मौसम किसानों का साथ नहीं दे रहा है। रबी फसल से जो उम्मीदें थी तो वह भी टूट गई है। रही सही कसर मौसम में फिर आए बदलाव से पूरी हो गई।
लक्ष्मी नारायण चतुर्वेदी
किसान सुढ़ार सालाबाद
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इलाके में गेहूं के लिए यह पानी अमृत के समान रहा। किसानों का कहना है कि प्रकृति उनकी परीक्षा ले रही है। इसमें कोई कर भी क्या सकता है? किसान की बची उम्मीदों पर भी पानी फिर गया है। मौसम में हो रहे बदलाव ने किसानों की खुशियों को छीन सा लिया है। पहले सूरज की तपन से खेतों की नमी खत्म हो गई और दलहनी फसलें समय से पहले पक कर तैयार हो
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गई। किसान गेहूं की फसल को बचाने के लिए पानी को भटकता रहा, तब उसे पानी नहीं मिला और जब मिला तो बर्बादी की कहानी लिख गया। शनिवार को यकायक मौसम में बदलाव आया और देर रात बारिश होने लगी। शहर में तो तेज बारिश हुई वहीं पर मुहम्मदाबाद समेत कई क्षेत्रों में हल्की बारिश हुई। इससे दलहनी फसलें मटर, मसूर, चना की फसलें बुरी तरह
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प्रभावित हुई हैं। जो फसल पक कर तैयार खड़ी थी वह गीली हो गई और अब धूप में उसके चटकने की आशंका बढ़ गई है। तेज हवाओं ने गेहूं की फसलों को भी तहसनहस कर दिया। जिन खेतों में नलकूप से पानी लग चुका था उनमें गेहूं की फसल खेत में बिछ गई। इससे अब दाना हल्का हो जाएगा। रविवार की सुबह जब किसान खेतों पर पहुंचे तो खेतों में फसल देखकर कर
मायूस हो गए। मुहम्मदाबाद के किसान देवेंद्र सिंह, महपाल सिंह, चरन सिंह, राजकुमार, संतोष सिंह, कृष्ण दत्त तिवारी, याकूब अली, शशिकांत राजपूत आदि ने बताया कि पूर्व में किसान फसलों की तबाही से बर्बादी की कगार पर पहले ही पहुंच गया था। इस बार भी सूखे के हालातों से कुछ खास फसलें नहीं थीं और उसमें भी इस बारिश ने किसानों के सारे सपने चकनाचूर कर दिए।
-मौसम की मार झेल रहे किसानों पर एक बार फिर से आफत का पहाड़ टूटा है। शनिवार की रात हुई बारिश से दलहनी फसलें बर्बाद हो गई है। तकरीबन 50 फीसदी नुकसान तो हो ही गया। दाना चटक जाएगा जो खेत में ही गिर जाएगा। किसान के हाथ तो परेशानी ही आनी है। प्रशासन नुकसान का आंकलन कराए।
राजवीर सिंह जादौन
मंडल अध्यक्ष भाकियू
बारिश से गेहूं को फायदा हुआ है। जिस खेत में पानी नहीं लगा था उसमें कोई नुकसान नहीं है। जिन खेतों में पानी लगा है उनमें पानी से नहीं हवा से नुकसान हुआ है। मौसम किसानों का साथ नहीं दे रहा है। रबी फसल से जो उम्मीदें थी तो वह भी टूट गई है। रही सही कसर मौसम में फिर आए बदलाव से पूरी हो गई।
लक्ष्मी नारायण चतुर्वेदी
किसान सुढ़ार सालाबाद