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समाज का प्रहरी है आर्य समाज
ब्यूरो/अमर उजाला, हापुड़
Updated Mon, 07 Mar 2016 09:35 PM IST
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शिव मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
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समाज का प्रहरी आर्य समाज है। महर्षि दयानंद तो सच्चे शिव के दर्शन कराना चाहते थे। आर्य समाज शिवराजी को बौद्ध पर्व व संकल्प दिवस के रूप में मनाता है। उक्त विचार आर्य समाज मंदिर में ऋषि बोधोत्सव के समापन के अवसर पर चंडीगढ़ से पधारे आर्य जगत के वैदिक विद्वान डा. जगदीश शास्त्री ने व्यक्त किए।
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उन्होंने कहा कि मूल शंकर ने संकल्प लिया और घर छोड़कर सच्चे शिव की खोज में लग गए। उन्होंने कहा कि योगियों ने इन्हें सच्चा जिज्ञासु मानते हुए उन्हें ज्ञान दिया। शिवानंद पुरी, ज्वाला सिंह गिरि ने इन्हें योग शिक्षा दी और दंडी विरजानंद ने इन्हें विद्या ज्ञान दिया।
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सृष्टि निर्माता शिव का कोई आकार नहीं है। वह सर्मत्यापक, निराकार व न्यायकारी हैं। उन्होंने मनुस्मृति तथा सत्यार्थ प्रकाश के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जीवन के लिए सत्संग, संस्कार, संध्या, स्वाध्याय, सेवा भाव तथा संगठन की भावना अति आवश्यक है।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रेम प्रकाश आर्य व संचालन कुंवर पाल सिंह ने किया। इस मौके पर सुरेंद्र कबाड़ी, संजय माहेश्वरी, सुरेश सिंहल, बीना आर्य, मंगल सैन गुप्ता, मुकेश शर्मा, सरजीत सिंह, अनिल कसेरा, पुष्पा आर्य, सुंदर लाल आर्य, रेखा गोयल आदि मौजूद रहे।