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न हार मिल रहा न कंगन, कैसे निभाएं रस्म

Wed, 09 Mar 2016 01:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Updated Wed, 09 Mar 2016 01:18 AM IST
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strike of jwellary traders
शादी की तैयारी फीकी कर रही सराफा की बंदी - फोटो : shivharsh
एक्साइज ड्यूटी के विरोध में सराफा की अनिश्चितकालीन बंदी से अब ग्राहक भी परेशान होने लगे हैं। खासकर जिनके यहां शादी है, उनके लिए मुश्किलें कुछ ज्यादा ही बढ़ गई हैं। कोई नकली गहने से काम चला रहा है तो कोई रिश्तेदारों से मांग कर। जिनके घर पुराने गहने हैं, वे चाहकर भी उनका इस्तेमाल नहीं कर पा रहे क्योंकि हड़ताल के चलते गहनों की सफाई का काम ठप पड़ा है।
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एक हफ्ते से चल रही बंदी से शादी समारोह की तैयारी फीकी पड़ गई है। शादी में आभूषण की अदायगी का रिवाज निभाने के लिए लोग परेशान हैं। जिनके यहां शादी पड़ी है वे रिश्तेदार से मांगकर काम चला रहे हैं या फिर नकली जेवर लेकर। जिनके पास पुराने जेवर रखे भी हैं वे उसकी सफाई इसलिए नहीं करा पा रहे हैं क्योंकि हड़ताल के चलते कारीगर भी काम नहीं कर रहे। सराफा कारोबारियों ने एक्साइज ड्यूटी के खिलाफ पहले तीन बंदी का एलान किया। उसे तीन दिन बढ़ा दिया गया और अब हड़ताल अनिश्चितकालीन कर दी गई है। ऐसे में यह भी पता नहीं चल पा रहा है कि दुकानें कब खुलेंगी।
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नकली जेवर से चलाएंगे काम
घर में देवर की शादी की तैयारी चल रही है, पर आभूषण की दुकानें बंद होने से परेशानी बढ़ गई है। चाहकर भी खरीदारी नहीं हो पा रही है। कई बार इस उम्मीद में बाजार गई कि शायद कोई दुकान खुली हो, मगर निराशा ही हाथ लगी। गांवों में भी पता कराया, मगर वहां भी दुकानें बंद चल रही हैं। पुराने जेवर की भी सफाई नहीं हो पा रही। अब एक ही रास्ता बचा है कि नकली जेवर खरीदा या किराए पर लिया जाए ताकि शादी में काम चले। जब दुकान खुलेगी तो असली जेवर खरीदा जाएगा।
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- ममता सिंह, रुस्तमपुर

रिश्तेदार से मांगे हैं गहने
मेरे घर में शादी पड़ी है। बिना जेवर के कई रिवाज पूरे ही नहीं हो सकते हैं। दुकानें बंद होने से दिक्कत बढ़ गई है। हाल ही में मेरे एक रिश्तेदार के यहां शादी हुई थी। उनसे हमने निवेदन किया है कि वे अपने जेवर दे दें ताकि रिवाज निभाया जा सके। दुकान खुलने पर उनके गहने लौटाकर दूसरे खरीद लूंगी। सराफा की बंदी से बहुत परेशानी हो रही है। हम लोगों ने सोचा था कि पहले खरीदने से अच्छा है कि शादी नजदीक आने पर ही गहने लिए जाएं। हमें क्या मालूम था कि शादी के वक्त दुकानें ही बंद हो जाएंगी।
- शृंखला उपाध्याय, विवेकपुरम
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