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सूतक से बंद हुए मंदिरों के कपाट, सूर्यग्रहण आज
अमर उजाला ब्यूरो/फैजाबाद
Updated Tue, 08 Mar 2016 11:48 PM IST
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सूर्यग्रहण को लेकर बंद हुए मंदिरों के कपाट।
- फोटो : अमर उजाला
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पूर्ण सूर्यग्रहण नौ मार्च लगेगा। मंगलवार की शाम सूर्यग्रहण के सूतक (छूत) को लेकर नगरी के मठ-मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए। सूर्यग्रहण का स्पर्श नौ मार्च को सुबह 5:15 बजे पर होगा और ग्रहण का मोक्ष सुबह 6:45 बजे पर होगा। ग्रहण की कुल अवधि डेढ़ घंटे तक रहेगी। ग्रहण सुबह 5:37 से 6:07 बजे तक रहेगा, जो देश में सुबह 6:38 से 7:02 बजे तक ग्रस्तोदय की स्थिति में देखा जा सकेगा।
इस प्रकार पूर्ण ग्रहण लगभग 24 मिनट तक दिखाई देगा। सूर्यग्रहण के सूतक (छूत) 12 घंटे पूर्व लगने के कारण मंगलवार शाम सवा लगभग पांच बजते-बजते प्रमुख मंदिरों हनुमानगढ़ी, कनक भवन, श्रीराम जन्मभूमि, नागेश्वरनाथ, क्षीरेश्वरनाथ, श्रीकालेराम मंदिर, हनुमत सदन, हनुमत निवास, श्रीराम वल्लभाकुंज, तुलसी दास जी की छावनी, श्रीमणिराम दास जी की छावनी आदि मंदिरों के कपाट बंद हो गए।
यहां दर्शनार्थियों का दर्शन-पूजन बंद कर दिया गया। दर्शनार्थी मंदिर के बाहर कपाट पर ही मत्था टेककर दर्शन करते रहे। प्रसिद्ध हनुमान गढ़ी के पुजारी रमेश दास ने बताया कि सूर्यग्रहण के पश्चात समूचे मंदिर परिसर की साफ-सफाई व पूजन-अर्चन के बाद दर्शनार्थियों के लिए मंदिर का पट बुधवार को 8:30 बजे के बाद खुलेगा।
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पं. श्रुतिधर द्विवेदी व पं. संतोष वैदिक के बताते हैं कि शास्त्रानुसार ग्रहण के दौरान पूजा-पाठ, गुर मंत्र का जप तथा भजन-कीर्तन करना चाहिए। ग्रहण व सूतक की अवधि के दौरान गर्भवती महिलाओं को ग्रहण देखने से बचना चाहिए। ग्रहण के दौरान ईश्वर प्रतिमा को छूना, मनोरंजन करना, भोजन पकाना या खाना एवं पीना, सोने आदि का त्याग करना चाहिए।
ग्रहण का सूतक काल आरंभ होने के पूर्व ही जल, भोजन और खाने-पीने के सामानों में कुश, दूर्वा अथवा तुलसी के पत्ते डाल दें, इससे इन वस्तुओं पर ग्रहण का असर समाप्त हो जाएगा। ग्रहण बाद पूरे घर की शुद्धि तथा स्नान कर गरीबों को दान-दक्षिणा दें।
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इस प्रकार पूर्ण ग्रहण लगभग 24 मिनट तक दिखाई देगा। सूर्यग्रहण के सूतक (छूत) 12 घंटे पूर्व लगने के कारण मंगलवार शाम सवा लगभग पांच बजते-बजते प्रमुख मंदिरों हनुमानगढ़ी, कनक भवन, श्रीराम जन्मभूमि, नागेश्वरनाथ, क्षीरेश्वरनाथ, श्रीकालेराम मंदिर, हनुमत सदन, हनुमत निवास, श्रीराम वल्लभाकुंज, तुलसी दास जी की छावनी, श्रीमणिराम दास जी की छावनी आदि मंदिरों के कपाट बंद हो गए।
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यहां दर्शनार्थियों का दर्शन-पूजन बंद कर दिया गया। दर्शनार्थी मंदिर के बाहर कपाट पर ही मत्था टेककर दर्शन करते रहे। प्रसिद्ध हनुमान गढ़ी के पुजारी रमेश दास ने बताया कि सूर्यग्रहण के पश्चात समूचे मंदिर परिसर की साफ-सफाई व पूजन-अर्चन के बाद दर्शनार्थियों के लिए मंदिर का पट बुधवार को 8:30 बजे के बाद खुलेगा।
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पं. श्रुतिधर द्विवेदी व पं. संतोष वैदिक के बताते हैं कि शास्त्रानुसार ग्रहण के दौरान पूजा-पाठ, गुर मंत्र का जप तथा भजन-कीर्तन करना चाहिए। ग्रहण व सूतक की अवधि के दौरान गर्भवती महिलाओं को ग्रहण देखने से बचना चाहिए। ग्रहण के दौरान ईश्वर प्रतिमा को छूना, मनोरंजन करना, भोजन पकाना या खाना एवं पीना, सोने आदि का त्याग करना चाहिए।
ग्रहण का सूतक काल आरंभ होने के पूर्व ही जल, भोजन और खाने-पीने के सामानों में कुश, दूर्वा अथवा तुलसी के पत्ते डाल दें, इससे इन वस्तुओं पर ग्रहण का असर समाप्त हो जाएगा। ग्रहण बाद पूरे घर की शुद्धि तथा स्नान कर गरीबों को दान-दक्षिणा दें।