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शौचालयों के लिए धन दे सकेंगे सांसद
ब्यूरो अमर उजाला/ देवरिया
Updated Mon, 07 Mar 2016 11:55 PM IST
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स्वच्छ भारत अभियान में सांसद भी अपनी निधि से शौचालयों के लिए धन मुहैया करा सकेंगे।
- फोटो : getty images
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पीएम नरेंद्र मोदी का स्वच्छ भारत अभियान अब परवान चढ़ेगा। सांसद भी अपनी निधि से शौचालयों के लिए धन मुहैया करा सकेंगे। नियमों को स्पष्ट करने के बाद ऐसा संभव हो पाया है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के निदेशक ने नियमों को स्पष्ट करते हुए पत्र जारी कर दिया है।
पीएम नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ भारत अभियान को मजबूत करने के लिए सांसदों को अपनी निधि से शौचालयों के निर्माण पर जोर दिया था। लेकिन एमपीलैड्स के अंतर्गत व्यक्तिगत शौचालयों के निर्माण का प्रावधान न होने से अभियान गति नहीं पकड़ रहा था। इसको देखते हुए सांसदों ने सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय को पत्र लिखकर नियमों को स्पष्ट करने को कहा। मंत्रालय के निदेशक (एमपीलैड्स) तपन मित्र ने साफ किया है कि एमपीलैड्स के अंतर्गत सार्वजनिक शौचालयों और स्नानघरों के निर्माण की अनुमति है। लेकिन व्यक्तिगत/पारिवारिक लाभों के लिए धन देने की मनाही है। इसलिए व्यक्तिगत शौचालयों के निर्माण की अनुमति नहीं है।
लेकिन एमपीलैड्स के दिशा निर्देेशों के पैरा 3.18 में प्रावधान है कि सांसद भौगोलिक क्षेत्र और अनुशासित राशि को दर्शाते हुए किसी केंद्र की योजना में एमपीलैड्स के तहत धन देने की अनुशंसा कर सकते हैं। लेकिन लाभार्थियों को दर्शाने की अनुमति उन्हें नहीं होगी। जिला प्रशासन की ओर से पहले से तैयार की गई पूर्व सूची प्राथमिकता सूची के अनुसार ही बने रहेंगे।
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सांसद के अनुरोध पर सूची में बदलाव करना अपेक्षित नहीं होगा। उन्होंने साफ किया कि स्वच्छ भारत अभियान जैसी योजनाओं में व्यक्तिगत शौचालय का प्रावधान है। सांसद इसके धनराशि में बढ़ोत्तरी के लिए निधियों की सिफारिश कर सकते हैं। उन्होंने सक्षम प्राधिकारी से अनुमोदन होने की जानकारी पांच फरवरी को सभी डीएम, सांसदों, एमपीलैड्स से संबंधित नोडल विभागों के सचिवों, राज्य सभा समिति, लोक सभा समिति को पत्र भेजकर दी है।
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पीएम नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ भारत अभियान को मजबूत करने के लिए सांसदों को अपनी निधि से शौचालयों के निर्माण पर जोर दिया था। लेकिन एमपीलैड्स के अंतर्गत व्यक्तिगत शौचालयों के निर्माण का प्रावधान न होने से अभियान गति नहीं पकड़ रहा था। इसको देखते हुए सांसदों ने सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय को पत्र लिखकर नियमों को स्पष्ट करने को कहा। मंत्रालय के निदेशक (एमपीलैड्स) तपन मित्र ने साफ किया है कि एमपीलैड्स के अंतर्गत सार्वजनिक शौचालयों और स्नानघरों के निर्माण की अनुमति है। लेकिन व्यक्तिगत/पारिवारिक लाभों के लिए धन देने की मनाही है। इसलिए व्यक्तिगत शौचालयों के निर्माण की अनुमति नहीं है।
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लेकिन एमपीलैड्स के दिशा निर्देेशों के पैरा 3.18 में प्रावधान है कि सांसद भौगोलिक क्षेत्र और अनुशासित राशि को दर्शाते हुए किसी केंद्र की योजना में एमपीलैड्स के तहत धन देने की अनुशंसा कर सकते हैं। लेकिन लाभार्थियों को दर्शाने की अनुमति उन्हें नहीं होगी। जिला प्रशासन की ओर से पहले से तैयार की गई पूर्व सूची प्राथमिकता सूची के अनुसार ही बने रहेंगे।
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सांसद के अनुरोध पर सूची में बदलाव करना अपेक्षित नहीं होगा। उन्होंने साफ किया कि स्वच्छ भारत अभियान जैसी योजनाओं में व्यक्तिगत शौचालय का प्रावधान है। सांसद इसके धनराशि में बढ़ोत्तरी के लिए निधियों की सिफारिश कर सकते हैं। उन्होंने सक्षम प्राधिकारी से अनुमोदन होने की जानकारी पांच फरवरी को सभी डीएम, सांसदों, एमपीलैड्स से संबंधित नोडल विभागों के सचिवों, राज्य सभा समिति, लोक सभा समिति को पत्र भेजकर दी है।