मुसलमान देश की दूसरी बड़ी अकसरियत
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मौलाना ने कहा कि हिंदुस्तान में मुसलमानों को अल्पसंख्यक कहना ठीक नहीं। बल्कि उन्हें देश की दूसरी अकसरियत कहना ठीक होगा। मुसलमान अगर पसमांदा (पिछड़ा) रहेगा तो देश की तरक्की मुमकिन नहीं हो सकती। हुकमरानों को इस पर गौर फिक्र करना चाहिए। कहा मुसलमानों द्वारा जंगे आजादी में दी गई, कुर्बानियों को मिटाने की साजिश रची जा रही है। जबकि, वे मुसलमान ही थे जिन्होंने वर्ष 1919 में सबसे पहले अंग्रेजी हुकूमत से लोहा लिया था। कहा कि आज मुसलमानों के साथ नाइंसाफी हो रही है, जिसके लिए जमीअत ओलमा हिंद संघर्ष कर रही है। उन्होंने साफ किया कि हम लोग हुकूमत से इंसाफ चाहते हैं। मौलाना ने हालांकि यह भी कहा कि आज मुसलमानों के जो हालात हैं, उसके लिए पहले वे खुद जिम्मेदार हैं बाद में कोई और।
सदारत करते हुए वाराणसी के मुफ्ती मौ. अब्दुल बातिन नोमानी ने कहा कि हमारा राह से भटकना ही परेशानी का सबब है। कहा कि हमें अपना आमाल और किरदार ठीक करने की आवश्यकता। बाकी अल्लाह खुद सही कर देगा। अन्य वक्ताओं ने भी इस्लाम और उसके स्तंभों को बयान करते हुए उन पर अमल करने की बात कही। निजामत मुफ़्ती सुहैल कासमी ने की। मौ. मोईद अहमद, मौ. तौफीक कासमी, मौ. शाबान कासमी, मौ. अब्दुल रब आजमी, मौ. हकीमुद्दीन काजमी ने भी खिताब किया। नाते पाक का नजराना अब्दुल्लाह फूलपूरी नेे पेश किया। आगाजे कांफ्रेंस कारी मसूद के कलामे पाक की तिलावत से हुआ।