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लॉकडाउन में बुजुर्गों की लकीरों ने दिया धोखा तो कोटेदारों ने नहीं दिया राशन

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Tue, 07 Apr 2020 02:04 PM IST
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old lady not get rashan
बरेली। लॉकडाउन में बड़ी संख्या में वे गरीब बुजुर्ग कोटे की दुकान से राशन पाने के लिए दौड़ ही लगाते रहे गए, जिनकी ऊंगलियों की लकीरें मिट गई हैं। कोटेदार से लेकर अधिकारियों तक दौड़ लगाने के बावजूद उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। बेसहारा बुजुर्ग इस समय एक-एक  दाने के मोहताज हैं। ऐसे समय में कोटेदार के राशन न देने पर उनका दर्द और भी ज्यादा बढ़ता जा रहा है।
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यही दिक्कत किला छावनी होली चौराहा मस्जिद वाली गली में रहने वाली करीब 85  वर्षीय रमाकांती को भी भुगतनी पड़ रही है। पति को गुजरे काफी समय हो गया। कार्ड पर  अकेला उनका ही नाम चढ़ा है। बुढ़ापे में एकमात्र सहारा बेटी के पास जैसे-तैसे गुजर बसर करती हैं। कोटे की दुकान पर पहले पांच किलो राशन मिलता था लेकिन कई महीने से कोटेदार राशन ही नहीं दे रहा। बायोमैट्रिक मशीन पर उनका अंगूठा ही नहीं लग पा रहा है। इसलिए कोटेदार राशन देने से मना कर देता है। वह कहता है कि राशनकार्ड में किसी दूसरे का नाम भी जुड़वाया ताकि उनका अंगूठा मशीन में लगाया जा सके, जबकि बुजुर्ग के परिवार में और कोई  नहीं है। ऐसे में लॉकडाउन के दौरान जहां लोग राशन ले जा रहे थे, वहीं ये बुजुर्ग कोटेदार से राशन देने की गुजारिश कर रही थी लेकिन उसे राशन नहीं मिल सका। ऐसे तमाम बुजु्र्ग भी हैं, जिन्हें इस दिक्कत की वजह से राशन नहीं मिल पा रहा है।
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