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पांच घंटे मौत से जंग, फिर हार गया किसान
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
Updated Mon, 14 Mar 2016 02:14 AM IST
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किसान की मौत
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खेत में अरसे से बंद पड़े कुएं की ईटें निकालने को उतरे किसान के ऊपर ढांग गिर गई। पांच घंटे तक बीस फुट गहराई में दबे किसान को निकालने की प्रशासन ने हरसंभव कोशिश की। जेसीबी से खुदाई के बाद उसे जिंदा निकाल भी लिया गया, हालांकि अस्पताल ले जाते वक्थ उसने दम तोड़ दिया। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम को भेजा है।
गांव चुरला निवासी 60 साल के रघुवीर रविवार सुबह सवा दस बजे अपने खेत में बरसों से बंद पडे़ कुएं की ईटें निकालने गए थे। वह बीस फुट गहरे कुएं में उतर गये। हालांकि ईटें निकालने के दौरान ऊपर से मिट्टी की ढांग उन पर गिर गई जिसमें वह दब गये। उनकी चीख सुनकर पास में खेत पर काम कर रहे छोटे भाई टीकम सिंह और आसपास खेतों पर काम कर रहे किसान मौके पर पहुंच गये। कुछ देर यह लोग रस्सी के सहारे रघुवीर को बाहर निकालने का प्रयास करते रहे। कामयाबी न मिलने पर घरवालों ने पुलिस और लेखपाल को सूचना दी। एसडीएम आरएन तिवारी और कोतवाल बृजराज सिंह जेसीबी लेकर मौके पर पहुंच गये। रघुवीर को निकालने की हरसंभव कोशिश की गई। हालांकि जल्दबाजी में तीन बार मिट्टी की ढांग गिरने से अभियान में रुकावट आई। बावजूद कड़ी मशक्कत से पांच घंटे बाद रघुवीर को गंभीर हालत में निकाला गया तो परिवार और ग्रामीणों को बड़ी आस बंधी। तत्काल ही मौके पर खड़ी एंबुलेंस से रघुवीर को सीएचसी भेज दिया गया। वहां पहुंचने से पहले ही किसान की मौत हो गई। रघुवीर अपने परिवार में पत्नी के अलावा दो लड़के और पांच बेटियां छोड़ गये हैं। एसडीएम आरएन तिवारी ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद परिवार को किसान बीमा दुर्घटना का लाभ मिलेगा।
काश भाई की बात मानी होती
रघुवीर के खेत में बने कुएं में बोरिंग फेल हो गया तो उन्होंने पास में ही नया बोरिंग करा लिया। पुराना कुआं करीब 40 फुट गहरा था और उसमें से करीब बीस फुट मिट्टी से पट चुका था। ऐसे मेें रघुवीर चाहते थे कि कुएं की मन के चारों ओर लगी ईटें निकालकर दूसरे उपयोग में ले ली जाएं। छोटे भाई टीकम ने उन्हें ऐसा करने से मना किया, पर वह नहीं माने। टीकम की खेत में मौजूदगी के दौरान ही उन्होंने ईटें निकालनी शुरू कर दीं और यह हादसा हो गया।
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गांव चुरला निवासी 60 साल के रघुवीर रविवार सुबह सवा दस बजे अपने खेत में बरसों से बंद पडे़ कुएं की ईटें निकालने गए थे। वह बीस फुट गहरे कुएं में उतर गये। हालांकि ईटें निकालने के दौरान ऊपर से मिट्टी की ढांग उन पर गिर गई जिसमें वह दब गये। उनकी चीख सुनकर पास में खेत पर काम कर रहे छोटे भाई टीकम सिंह और आसपास खेतों पर काम कर रहे किसान मौके पर पहुंच गये। कुछ देर यह लोग रस्सी के सहारे रघुवीर को बाहर निकालने का प्रयास करते रहे। कामयाबी न मिलने पर घरवालों ने पुलिस और लेखपाल को सूचना दी। एसडीएम आरएन तिवारी और कोतवाल बृजराज सिंह जेसीबी लेकर मौके पर पहुंच गये। रघुवीर को निकालने की हरसंभव कोशिश की गई। हालांकि जल्दबाजी में तीन बार मिट्टी की ढांग गिरने से अभियान में रुकावट आई। बावजूद कड़ी मशक्कत से पांच घंटे बाद रघुवीर को गंभीर हालत में निकाला गया तो परिवार और ग्रामीणों को बड़ी आस बंधी। तत्काल ही मौके पर खड़ी एंबुलेंस से रघुवीर को सीएचसी भेज दिया गया। वहां पहुंचने से पहले ही किसान की मौत हो गई। रघुवीर अपने परिवार में पत्नी के अलावा दो लड़के और पांच बेटियां छोड़ गये हैं। एसडीएम आरएन तिवारी ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद परिवार को किसान बीमा दुर्घटना का लाभ मिलेगा।
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काश भाई की बात मानी होती
रघुवीर के खेत में बने कुएं में बोरिंग फेल हो गया तो उन्होंने पास में ही नया बोरिंग करा लिया। पुराना कुआं करीब 40 फुट गहरा था और उसमें से करीब बीस फुट मिट्टी से पट चुका था। ऐसे मेें रघुवीर चाहते थे कि कुएं की मन के चारों ओर लगी ईटें निकालकर दूसरे उपयोग में ले ली जाएं। छोटे भाई टीकम ने उन्हें ऐसा करने से मना किया, पर वह नहीं माने। टीकम की खेत में मौजूदगी के दौरान ही उन्होंने ईटें निकालनी शुरू कर दीं और यह हादसा हो गया।
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