फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   जांच के नाम पर फाइलों में कैद पुलिस का भ्रष्टाचार

जांच के नाम पर फाइलों में कैद पुलिस का भ्रष्टाचार

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Sun, 22 May 2022 04:17 PM IST
विज्ञापन
जांच के नाम पर फाइलों में कैद पुलिस का भ्रष्टाचार
विज्ञापन
- रिपोर्ट दर्ज होने के बाद ठंडे बस्ते में डाल दिए कई मामले - क्राइम ब्रांच के रिश्वत के बंटवारे के वीडियो की भी नहीं हो सकी जांच अमर उजाला ब्यूरो बरेली। पुलिसकर्मियों के भ्रष्टाचार के कई मामले फाइलों में कैद होकर रह गए हैं। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद जांच के नाम पर इन मामलों को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। अक्तूबर 2020 में क्राइम ब्रांच की टीम का रिश्वत के रुपयों का बंटवारा करते वीडियो वायरल हुआ था। एसएसपी रोहित सिंह सजवाण ने क्राइम ब्रांच के दरोगा अब्बास हैदर, गिरीश चंद्र जोशी, सिपाही रवि प्रताप, पुष्पेंद्र कुमार, विकास कुमार, वीरेंद्र कुमार, रविशंकर, चालक जितेंद्र राणा, पुष्पेंद्र और हेड कांस्टेबल तैय्यब अली को निलंबित कर कोतवाली में भ्रष्टाचार की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इस मामले की विभागीय जांच एसपी देहात राजकुमार अग्रवाल ने की, जिसमें सभी पुलिसकर्मी दोषी पाए गए। कोतवाली में दर्ज मुकदमे की जांच सीओ सिटी श्वेता यादव कर रही हैं। उन्होंने रिश्वत का वीडियो जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेजा है लेकिन साल भर बीतने के बावजूद इसकी रिपोर्ट नहीं आ सकी है। इस बीच सभी दोषी पुलिसकर्मी दूसरे जिलों में ट्रांसफर होकर पोस्टिंग पा चुके हैं। आरोपी दरोगा गिरीश चंद्र जोशी तो हाल ही में प्रमोशन पाकर इंस्पेक्टर बन चुका है।
विज्ञापन
सर्विलांस के सिपाहियों का मामला भी ठंडे बस्ते में मार्च में बसंतविहार में रहने वाले राजकुमार ने एसपी सिटी कार्यालय की सर्विलांस सेल में तैनात सतीश समेत दो सिपाहियों के खिलाफ थाना इज्जतनगर में भ्रष्टाचार की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इन सिपाहियों ने राजकुमार को मोबाइल चोरी में जेल भेजने की धमकी देकर 10 हजार रुपये वसूल लिए थे। आईजी रमित शर्मा के आदेश पर जांच के बाद इस मामले में रिपोर्ट दर्ज की गई थी। रिपोर्ट के बाद दोनों सिपाहियों को सस्पेंड कर दिया गया लेकिन अब तक उनके खिलाफ चार्जशीट नहीं लग सकी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबूत गायब करने वाले विवेचक पर भी कार्रवाई नहीं आनंद विहार कॉलोनी निवासी दूरदर्शन के इंजीनियर मोहन सिंह नयाल ने दो जून 2021 को अपने बेटे शिखर और बहू निधि के खिलाफ थाना प्रेमनगर में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप था कि बेटे-बहू उनका उत्पीड़न करते हैं और इससे बीमार होकर उनकी पत्नी कमलेश की 30 अप्रैल 2021 को मौत हो गई। मगर इस मामले में विवेचक शनिदेव ने मोहन सिंह नयाल द्वारा सौंपे गए सबूत गायब कर दिए और मुकदमे से गिरफ्तारी की धाराएं भी हटा दीं। जांच में इसकी पुष्टि हो चुकी है लेकिन शनिदेव के खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
सिपाही और पीआरडी जवान के खिलाफ भी चार्जशीट नहीं जनवरी 2021 में फतेहगंज पूर्वी का सिपाही जगदीश सिंह बिलपुर रेलवे क्रासिंग के पास दातागंज रोड पर पीआरडी जवान बूटा सिंह के साथ चेकिंग कर रहा था। चेकिंग के नाम पर उसने राहगीरों से वसूली की। आटा लेने चक्की जा रहे लड़के को पकड़ लिया और फिर रुपये लेकर छोड़ा। Iस पर लोगों ने उसका रिश्वत लेते हुए वीडियो बना लिया। ये वीडियो वायरल होने पर दोनों को सस्पेंड कर रिपोर्ट लिखाई गई लेकिन अब तक चार्जशीट नहीं लग सकी है। वर्जन सभी मामलों में विवेचना चल रही है। विवेचकों से प्रगति रिपोर्ट लेकर शीघ्र कार्रवाई पूरी कराई जाएगी। रोहित सिंह सजवाण, एसएसपी
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed