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कांग्रेसी होने पर संदेह न करें, सपा में नहीं जा रहा : बेनी
ब्यूरो/अमर उजाला, बाराबंकी
Updated Sat, 05 Mar 2016 05:48 PM IST
सार
सोनिया और राहुल गांधी से मतभेद नहीं है। मेरे कांग्रेसी होने पर संदेह न करें। तबियत खराब होने से दिल्ली की बैठक में नहीं गया।
मुलायम ने मुझे सपा से निकाला नहीं था। कुछ मतभेद के कारण मैं ही अलग हुआ था।
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मैं कांग्रेस में तब गया जब प्रदेश में उसका कुछ नहीं था।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पूर्व केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा कांग्रेस नेतृत्व से नाराजगी और सपा से नजदीकियों की अटकलें खारिज करते हैं। कहते हैं, सोनिया और राहुल गांधी से मतभेद नहीं है। मेरे कांग्रेसी होने पर संदेह न करें। तबियत खराब होने से दिल्ली की बैठक में नहीं गया।
बेनी ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में कहा कि प्रदेश के 40-50 कांग्रेसी दिल्ली गए हैं। यह जनरल बॉडी मीटिंग जैसी है। मेरी तबियत ठीक नहीं, इसलिए नहीं गया। मीटिंग में जो होगा, पता लग जाएगा। इस संबंध में दिल्ली से कोई फोन या पत्र नहीं आया था। पीसीसी से जरूर एक नेता का फोन आया।
उन्होंने कहा, मेरे सोनिया और राहुल से मतभेद नहीं हैं। लोकल लेवल पर छोटे मोटे मतभेद सभी दलों में रहते हैं। मैं पदलोलुप नहीं हूं। यह बात सच है कि मैं सपा का फाउंडर मेंबर हूं, 30-35 साल हम और मुलायम सिंह साथ रहे।
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मुलायम ने मुझे सपा से निकाला नहीं था। कुछ मतभेद के कारण मैं ही अलग हुआ था। पहले अपनी पार्टी बनाई और फिर कांग्रेस में शामिल हुआ। कांग्रेस में तब गया जब प्रदेश में उसका कुछ नहीं था।
बेनी बोले, मेरा चरित्र नहीं रहा कि जल्दी-जल्दी दल बदलूं। मैं सपा में शामिल नहीं हो रहा हूं। मुलायम से मुलाकात पर कहा कि कुछ महीने पहले जब वह मेदांता से छुट्टी मिलने पर लखनऊ आए तब मिलने गया था। मैंने अखिलेश यादव की कभी आलोचना नहीं की। मेरे मतभेद मुलायम से थे। हमने सपा को जीरो से यहां तक पहुंचाया।
जहां तक बाराबंकी में सपा प्रत्याशी को समर्थन का सवाल है, यह कोई चोरी छिपे नहीं दिया। मेरे जन्मदिन पर 10-12 हजार लोगों की भीड़ थी। इसमें 400-500 लोग एमएलसी चुनाव के वोटर थे। सभी कन्फ्यूजन में थे।
यहां जो लड़का (राजेश यादव) चुनाव लड़ रहा है, वह कुछ समय हमारे साथ काम कर चुका है। कांग्रेस ने रायबरेली के अलावा कहीं प्रत्याशी खड़ा नहीं किया, इसलिए सपा उम्मीदवार का समर्थन किया।
मेरे खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही की बात कही गई लेकिन इसकी परवाह किए बगैर हम सपा प्रत्याशी को सपोर्ट कर रहे हैं। भाजपा और बसपा से मेरी विचारधारा मेल नहीं खाती। इसलिए इन दलों में जाने की अटकलें बेबुनियाद हैं।
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बेनी ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में कहा कि प्रदेश के 40-50 कांग्रेसी दिल्ली गए हैं। यह जनरल बॉडी मीटिंग जैसी है। मेरी तबियत ठीक नहीं, इसलिए नहीं गया। मीटिंग में जो होगा, पता लग जाएगा। इस संबंध में दिल्ली से कोई फोन या पत्र नहीं आया था। पीसीसी से जरूर एक नेता का फोन आया।
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उन्होंने कहा, मेरे सोनिया और राहुल से मतभेद नहीं हैं। लोकल लेवल पर छोटे मोटे मतभेद सभी दलों में रहते हैं। मैं पदलोलुप नहीं हूं। यह बात सच है कि मैं सपा का फाउंडर मेंबर हूं, 30-35 साल हम और मुलायम सिंह साथ रहे।
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मुलायम ने मुझे सपा से निकाला नहीं था। कुछ मतभेद के कारण मैं ही अलग हुआ था। पहले अपनी पार्टी बनाई और फिर कांग्रेस में शामिल हुआ। कांग्रेस में तब गया जब प्रदेश में उसका कुछ नहीं था।
बेनी बोले, मेरा चरित्र नहीं रहा कि जल्दी-जल्दी दल बदलूं। मैं सपा में शामिल नहीं हो रहा हूं। मुलायम से मुलाकात पर कहा कि कुछ महीने पहले जब वह मेदांता से छुट्टी मिलने पर लखनऊ आए तब मिलने गया था। मैंने अखिलेश यादव की कभी आलोचना नहीं की। मेरे मतभेद मुलायम से थे। हमने सपा को जीरो से यहां तक पहुंचाया।
जहां तक बाराबंकी में सपा प्रत्याशी को समर्थन का सवाल है, यह कोई चोरी छिपे नहीं दिया। मेरे जन्मदिन पर 10-12 हजार लोगों की भीड़ थी। इसमें 400-500 लोग एमएलसी चुनाव के वोटर थे। सभी कन्फ्यूजन में थे।
यहां जो लड़का (राजेश यादव) चुनाव लड़ रहा है, वह कुछ समय हमारे साथ काम कर चुका है। कांग्रेस ने रायबरेली के अलावा कहीं प्रत्याशी खड़ा नहीं किया, इसलिए सपा उम्मीदवार का समर्थन किया।
मेरे खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही की बात कही गई लेकिन इसकी परवाह किए बगैर हम सपा प्रत्याशी को सपोर्ट कर रहे हैं। भाजपा और बसपा से मेरी विचारधारा मेल नहीं खाती। इसलिए इन दलों में जाने की अटकलें बेबुनियाद हैं।