{"_id":"56e43ca54f1c1b916c8b456a","slug":"nepali-bus-entered-in-india-with-fake-permit","type":"story","status":"publish","title_hn":"दूतावास के फर्जी परमिट पर भारत में घुसी नेपाली बस","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
दूतावास के फर्जी परमिट पर भारत में घुसी नेपाली बस
ब्यूरो/अमर उजाला, बहराइच
Updated Sat, 12 Mar 2016 09:28 PM IST
विज्ञापन
रुपईडीहा कस्टम बैरियर पर पकड़ी गई नेपाल की बस जो फर्जी परमिट के सहारे भारत सीमा में प्रवेश कर गई।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बहराइच
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रुपईडीहा (बहराइच)। भारतीय दूतावास के फर्जी परमिट के सहारे नेपाली बारातियों से भरी बस शुक्रवार देर रात भारतीय सीमा में प्रवेश कर गई।
कस्टम बैरियर पर जांच के दौरान अधिकारियों ने फर्जीवाड़ा पकड़ लिया। बस मालिक ने कस्टम अधिकारियों को जो परमिट दिखाया, उस पर दूतावास के जिस अधिकारी के हस्ताक्षर मौजूद थे, वह अरसे से अवकाश पर चल रहे हैं।
जांच के दौरान परमिट नंबर भी किसी दूसरी बस संख्या पर जारी मिला। बस सीज कर मालिक और चालक को जेल भेज दिया गया है, जबकि बारातियों को रात ही में दूसरी बस से रवाना किया गया।
नेपाल के सूरखेत जिले से बारातियों को लेकर बस (ना4ख 9750) शुक्रवार देर रात नेपाल सीमा में जमुनहा चौकी व भारतीय सीमा में एसएसबी तथा रुपईडीहा पुलिस बैरियर से पास हो गई।
विज्ञापन
बस जब रुपईडीहा कस्टम बैरियर पर पहुंची तो वहां तैनात सिपाहियों ने बस रोककर दस्तावेजों की जांच शुरू की।
बस चालक सुशील कुमार ने ड्राइविंग लाइसेंस और बस के कागजात तो वास्तविक दिखाए लेकिन भारतीय दूतावास और नेपाल दूतावास की संस्तुति से जारी बस की विदेशी आवागमन परमिट की जो छायाप्रति दिखाई, उस पर हस्ताक्षर और मुहर स्पष्ट नहीं थे।
इस पर सिपाहियों को शक हुआ तो सभी ने कस्टम अधीक्षक एसके तिवारी को सूचना दी। कस्टम अधीक्षक मौके पर पहुंचे और नेपाल में भारतीय दूतावास के अधिकारियों से संपर्क साधा।
पता चला कि कस्टम अधीक्षक के हाथ जिस परमिट संख्या 1370 की छायाप्रति है, उस नंबर पर 25 फरवरी को किसी दूसरे बस का परमिट जारी हुआ है।
जबकि छायाप्रति में 10 मार्च की तिथि पड़ी हुई थी। उस पर भारतीय दूतावास के परिवहन पटल के प्रथम सेक्रेटरी प्रणव गणेश के हस्ताक्षर थे, जबकि वह सप्ताह भर से अवकाश पर हैं।
उन्हें दूतावास से यह भी बताया गया कि बस संख्या ना4ख 9750 के नाम विदेशी आवागमन के लिए कोई परमिट जारी नहीं हुआ है।
इस पर कस्टम अधीक्षक ने तत्काल बस में सवार बारातियों को उतारकर बस सीज कर कब्जे में ले लिया।
कस्टम अधीक्षक ने बताया कि फर्जीवाड़ा करने के मामले में बस के चालक सूरखेत निवासी सुशील कुमार और बस मालिक सूरखेत के वीरेंद्र नगर वार्ड नंबर 13 निवासी रुद्र बहादुर गुरुंग को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।
दूसरी बस का इंतजाम कर रवाना हुए बाराती
नेपाल के सूरखेत जिला निवासी व्यवसायी जगदीश प्रसाद के बेटे पंकज का विवाह गोंडा इलाके से तय हुआ था। उसी के तहत जगदीश ने बस बुक कराई थी।
लेकिन, परमिट फर्जीवाड़े में बस के पकड़े जाने के बाद बस में सवार सभी 55 बारातियों को उतार दिया गया। इसके बाद दूसरे बस का इंतजाम कर बाराती गंतव्य को रवाना हुए।
बस मालिक बोला, जगदीश ने दिया था पेपर
कस्टम द्वारा पकड़े गए बस मालिक रुद्र बहादुर गुरुंग ने बताया कि बस बुक करने वाले जगदीश ने ही भारतीय और नेपाली दूतावास से संपर्क कर बस की परमिट बनवाने की बात कही थी। उसने ही फोटो स्टेट परमिट उपलब्ध कराई थी। कहा था काम चल जाएगा।
रुद्र बहादुर नहीं है बस का असली मालिक
बस मालिक रुद्र बहादुर गुरुंग बस का असली मालिक नहीं है। जांच में पता चला है कि माह भर पूर्व उसने किसी से बस खरीदी है लेकिन अब तक बस के अभिलेखों में उसका नाम दर्ज नहीं है। सिर्फ एक शपथ पत्र ही उसके पास है।
विज्ञापन
कस्टम बैरियर पर जांच के दौरान अधिकारियों ने फर्जीवाड़ा पकड़ लिया। बस मालिक ने कस्टम अधिकारियों को जो परमिट दिखाया, उस पर दूतावास के जिस अधिकारी के हस्ताक्षर मौजूद थे, वह अरसे से अवकाश पर चल रहे हैं।
जांच के दौरान परमिट नंबर भी किसी दूसरी बस संख्या पर जारी मिला। बस सीज कर मालिक और चालक को जेल भेज दिया गया है, जबकि बारातियों को रात ही में दूसरी बस से रवाना किया गया।
विज्ञापन
नेपाल के सूरखेत जिले से बारातियों को लेकर बस (ना4ख 9750) शुक्रवार देर रात नेपाल सीमा में जमुनहा चौकी व भारतीय सीमा में एसएसबी तथा रुपईडीहा पुलिस बैरियर से पास हो गई।
विज्ञापन
बस जब रुपईडीहा कस्टम बैरियर पर पहुंची तो वहां तैनात सिपाहियों ने बस रोककर दस्तावेजों की जांच शुरू की।
बस चालक सुशील कुमार ने ड्राइविंग लाइसेंस और बस के कागजात तो वास्तविक दिखाए लेकिन भारतीय दूतावास और नेपाल दूतावास की संस्तुति से जारी बस की विदेशी आवागमन परमिट की जो छायाप्रति दिखाई, उस पर हस्ताक्षर और मुहर स्पष्ट नहीं थे।
इस पर सिपाहियों को शक हुआ तो सभी ने कस्टम अधीक्षक एसके तिवारी को सूचना दी। कस्टम अधीक्षक मौके पर पहुंचे और नेपाल में भारतीय दूतावास के अधिकारियों से संपर्क साधा।
पता चला कि कस्टम अधीक्षक के हाथ जिस परमिट संख्या 1370 की छायाप्रति है, उस नंबर पर 25 फरवरी को किसी दूसरे बस का परमिट जारी हुआ है।
जबकि छायाप्रति में 10 मार्च की तिथि पड़ी हुई थी। उस पर भारतीय दूतावास के परिवहन पटल के प्रथम सेक्रेटरी प्रणव गणेश के हस्ताक्षर थे, जबकि वह सप्ताह भर से अवकाश पर हैं।
उन्हें दूतावास से यह भी बताया गया कि बस संख्या ना4ख 9750 के नाम विदेशी आवागमन के लिए कोई परमिट जारी नहीं हुआ है।
इस पर कस्टम अधीक्षक ने तत्काल बस में सवार बारातियों को उतारकर बस सीज कर कब्जे में ले लिया।
कस्टम अधीक्षक ने बताया कि फर्जीवाड़ा करने के मामले में बस के चालक सूरखेत निवासी सुशील कुमार और बस मालिक सूरखेत के वीरेंद्र नगर वार्ड नंबर 13 निवासी रुद्र बहादुर गुरुंग को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।
दूसरी बस का इंतजाम कर रवाना हुए बाराती
नेपाल के सूरखेत जिला निवासी व्यवसायी जगदीश प्रसाद के बेटे पंकज का विवाह गोंडा इलाके से तय हुआ था। उसी के तहत जगदीश ने बस बुक कराई थी।
लेकिन, परमिट फर्जीवाड़े में बस के पकड़े जाने के बाद बस में सवार सभी 55 बारातियों को उतार दिया गया। इसके बाद दूसरे बस का इंतजाम कर बाराती गंतव्य को रवाना हुए।
बस मालिक बोला, जगदीश ने दिया था पेपर
कस्टम द्वारा पकड़े गए बस मालिक रुद्र बहादुर गुरुंग ने बताया कि बस बुक करने वाले जगदीश ने ही भारतीय और नेपाली दूतावास से संपर्क कर बस की परमिट बनवाने की बात कही थी। उसने ही फोटो स्टेट परमिट उपलब्ध कराई थी। कहा था काम चल जाएगा।
रुद्र बहादुर नहीं है बस का असली मालिक
बस मालिक रुद्र बहादुर गुरुंग बस का असली मालिक नहीं है। जांच में पता चला है कि माह भर पूर्व उसने किसी से बस खरीदी है लेकिन अब तक बस के अभिलेखों में उसका नाम दर्ज नहीं है। सिर्फ एक शपथ पत्र ही उसके पास है।