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प्रभावी ढंग से लागू नहीं हो पा रही एमडीएम योजना
अमरउजाला ब्यूरो
Updated Thu, 10 Mar 2016 12:11 AM IST
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एमडीएम की रसोई
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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परिषदीय विद्यालयों में छात्र छात्राओं की संख्या बढ़ाए जाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही महत्वपूर्ण योजनाओं में से एक मध्याह्न भोजन योजना जिले में लगातार बदहाली का सबब बनी हुई है। विभाग का रोना यह कि शासन से मांगी गई धनराशि के सापेक्ष आवश्यक धनराशि उपलब्ध ही नहीं हो सकी।
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ऐसे में कभी खाद्यान्न की कमी के चलते योजना का लाभ छात्र छात्राओं को नहीं मिल सका, तो कभी कन्वर्जन कास्ट की कमी का खामियाजा छात्र छात्राओं को भुगतना पड़ा। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2015-16 में 2 हजार 17 विद्यालयों में योजना का संचालन किया जा रहा है।
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इसमें प्राथमिक विद्यालय में अध्यनरत 1 लाख 35 हजार 686 व उच्च प्राथमिक विद्यालय के 72 हजार 477 छात्र छात्राओं को योजना का लाभ मिल रहा है। योजना के सुचारु संचालन के लिए प्राथमिक विद्यालय के लिए 1 हजार 682 मीट्रिक टन खाद्यान्न के लिए 6 करोड़ 49 लाख रुपये की मांग की गई, लेकिन अब तक मात्र 3 करोड़ 54 लाख 92 हजार रुपये विभाग को शासन से मिल सका। इसी प्रकार उच्च प्राथमिक विद्यालय के लिए 1 हजार 298 मीट्रिक टन खाद्यान्न के लिए 5 करोड़ 1 लाख रुपये की मांग की गई, जबकि मात्र 2 करोड़ 45 लाख 70 हजार रुपये की धनराशि ही विभाग को मिल सकी।
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विभाग के इन आंकड़ों पर गौर किया जाए, तो मांग के सापेक्ष धनराशि की कमी है, लेकिन अभिभावकों व अन्य लोगों का मानना है कि जरूरत इस योजना में भ्रष्टाचार व लापरवाही दूर करने की है। ऐसा होने पर ही एमडीएम का समुचित लाभ छात्र छात्राओं को मिल पाएगा। उधर वर्ष 2016-17 में एमडीएम के लिए प्राथमिक विद्यालय में 1 लाख 38 हजार 42 प्राथमिक विद्यालय तथा उच्च प्राथमिक विद्यालय में 72 हजार 671 छात्र संख्या भेजी गई है।