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ऐसा खौफ कि घर से दूर मनानी पड़ेगी होली
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 08 Mar 2016 02:29 AM IST
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कचरी पावर प्लांट
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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विकास के नाम पर यह कैसी सख्ती कि दर्जनों किसान अपने घर पर त्योहार भी न मना सकें। करछना पावर प्लांट से प्रभावित कचरी सहित सभी आठ गांवों में पुलिस का पहरा और सख्त हो गया है। तीन किसानों की गिरफ्तारियों और कई अन्य की तलाश शुरू किए जाने के बाद कई किसान घर छोड़कर चले गए हैं। परिवार के लड़के और मुखिया घर से दूर भटकते फिर रहे हैं। होली का त्योहार नजदीक है। पीड़ित परिवार वालों का आरोप है कि पुलिस के खौफ के कारण घर के पुरुष गांव लौटने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में होली का त्योहार सूना ही बीत जाएगा।
तीन दिन पहले ही करछना पावर प्लांट का काम अचानक रोक दिया गया था। मामला निपटाने के लिए शासन ने उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत निगम के परियोजना निदेशक राकेश त्रिवेदी को इलाहाबाद भेजा। उन्होंने स्थानीय स्तर पर किसानों और ठेकेदारों को आश्वस्त कर मौके पर काम शुरू कराया। वह तो लौट गए लेकिन मौके पर हालात जस के तस बने हुए हैं। प्रभावित गांवों में पुलिस का पहरा और बढ़ा दिया गया है। ऐसे में किसानों में खौफ बढ़ता जा रहा है। तीन किसानों की गिरफ्तारी के बाद अन्य को भी जेल न भेज दिया जाए, इस खौफ की वजह से बड़ी संख्या में किसानों ने घर-गांव छोड़कर कहीं और शरण ले रखी है।
‘ढाई लाख रुपये का नलकूप लगाया लेकिन भूमि अधिग्रहण के दौरान उसके लिए मुआवजे के नाम पर सिर्फ 20 हजार रुपये मिले। पेड़ों का मुआवजा भी नहीं मिला। बेटे ने आवाज उठाई तो प्रशासन और पुलिस की सख्ती का सामना करना पड़ा। किसी कार्रवाई की आशंका से बेटा राम सिंह और उसकी पत्नी गांव छोड़कर चले गए हैं। इस बार होली पर घर सूना रहेगा। त्योहार पर बेटा और बहू दोनों साथ नहीं होंगे।’ सोनकली, कचरा गांव
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‘24 फरवरी को बेटी की बारात आई। पुलिस ने बारातियों को इकट्ठा नहीं होने दिया। बाराती रात में ही लौट गए। बारातियों के साथ मेरे पति को भी धमकाया गया। जिस तरह से किसानों की गिरफ्तारी हो रही है, उसे देखते हुए पति घर छोड़कर एक रिश्तेदार के घर ठहरे हुए हैं। होली का त्योहार नजदीक है। अगर यही हाल रहा तो त्योहार सूना ही बीत जाएगा।’ लालती देवी, कचरा गांव
‘बेटा आशीष प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है। कुछ मामले सामने आए हैं, जब घर के युवक बाजार गए और पुलिस ने पूछताछ के दौरान उन्हें पकड़ लिया। बेटे का भविष्य खराब न हो, सो उसे गांव से हटा दिया है और एक रिश्तेदार के घर के भेज दिया है। गांव का माहौल ऐसा नहीं है कि बेटे को बेटे तो त्योहार पर बुलाया जा सके। आशंका सताती रहती है कि कहीं उसे आंदोलनकारी बताकर गिरफ्तार न कर लिया जाए।’ समरजीत, कचरी गांव
‘कचरी में पिछले साल पावर प्लांट के विरोध में सितंबर में हुए आंदोलन के दौरान बेटे को पुलिस पकड़ ले गई थी। बेटा जगत बहादुर पटेल अब तक जेल में है। घर में उसकी पत्नी और बच्चे हैं। मेरी उम्र भी इतनी हो चुकी है कि खेती-किसानी मेरे वश की बात नहीं रह गई है। आर्थिक स्थिति बेहद खराब है। दिवाली पर बेटा घर में नहीं था। होली भी सूनी ही बीत जाएगी।’ राम दुलारी, कचरी गांव
‘पूर्व में कचरी में हुए आंदोलन के बाद पुलिस की सख्ती के कारण घर छोड़कर जाना पड़ा था। मैं और मेरी पत्नी दोनों ही नि:शक्त हैं। मेरा पैर काम नहीं करता। जैसे-तैसे घर का खर्च चल रहा है। दो दिन पहले ही गांव लौटे हैं। गांव में माहौल अच्छा नहीं है। हर तरफ सन्नाटा पसरा हुआ है और पुलिस का पहरा है। लगता है फिर गांव छोड़कर जाना होगा और होली घर के बाहर ही बीतेगी।’ श्रीकांत पटेल, कचरी गांव
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तीन दिन पहले ही करछना पावर प्लांट का काम अचानक रोक दिया गया था। मामला निपटाने के लिए शासन ने उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत निगम के परियोजना निदेशक राकेश त्रिवेदी को इलाहाबाद भेजा। उन्होंने स्थानीय स्तर पर किसानों और ठेकेदारों को आश्वस्त कर मौके पर काम शुरू कराया। वह तो लौट गए लेकिन मौके पर हालात जस के तस बने हुए हैं। प्रभावित गांवों में पुलिस का पहरा और बढ़ा दिया गया है। ऐसे में किसानों में खौफ बढ़ता जा रहा है। तीन किसानों की गिरफ्तारी के बाद अन्य को भी जेल न भेज दिया जाए, इस खौफ की वजह से बड़ी संख्या में किसानों ने घर-गांव छोड़कर कहीं और शरण ले रखी है।
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‘ढाई लाख रुपये का नलकूप लगाया लेकिन भूमि अधिग्रहण के दौरान उसके लिए मुआवजे के नाम पर सिर्फ 20 हजार रुपये मिले। पेड़ों का मुआवजा भी नहीं मिला। बेटे ने आवाज उठाई तो प्रशासन और पुलिस की सख्ती का सामना करना पड़ा। किसी कार्रवाई की आशंका से बेटा राम सिंह और उसकी पत्नी गांव छोड़कर चले गए हैं। इस बार होली पर घर सूना रहेगा। त्योहार पर बेटा और बहू दोनों साथ नहीं होंगे।’ सोनकली, कचरा गांव
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‘24 फरवरी को बेटी की बारात आई। पुलिस ने बारातियों को इकट्ठा नहीं होने दिया। बाराती रात में ही लौट गए। बारातियों के साथ मेरे पति को भी धमकाया गया। जिस तरह से किसानों की गिरफ्तारी हो रही है, उसे देखते हुए पति घर छोड़कर एक रिश्तेदार के घर ठहरे हुए हैं। होली का त्योहार नजदीक है। अगर यही हाल रहा तो त्योहार सूना ही बीत जाएगा।’ लालती देवी, कचरा गांव
‘बेटा आशीष प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है। कुछ मामले सामने आए हैं, जब घर के युवक बाजार गए और पुलिस ने पूछताछ के दौरान उन्हें पकड़ लिया। बेटे का भविष्य खराब न हो, सो उसे गांव से हटा दिया है और एक रिश्तेदार के घर के भेज दिया है। गांव का माहौल ऐसा नहीं है कि बेटे को बेटे तो त्योहार पर बुलाया जा सके। आशंका सताती रहती है कि कहीं उसे आंदोलनकारी बताकर गिरफ्तार न कर लिया जाए।’ समरजीत, कचरी गांव
‘कचरी में पिछले साल पावर प्लांट के विरोध में सितंबर में हुए आंदोलन के दौरान बेटे को पुलिस पकड़ ले गई थी। बेटा जगत बहादुर पटेल अब तक जेल में है। घर में उसकी पत्नी और बच्चे हैं। मेरी उम्र भी इतनी हो चुकी है कि खेती-किसानी मेरे वश की बात नहीं रह गई है। आर्थिक स्थिति बेहद खराब है। दिवाली पर बेटा घर में नहीं था। होली भी सूनी ही बीत जाएगी।’ राम दुलारी, कचरी गांव
‘पूर्व में कचरी में हुए आंदोलन के बाद पुलिस की सख्ती के कारण घर छोड़कर जाना पड़ा था। मैं और मेरी पत्नी दोनों ही नि:शक्त हैं। मेरा पैर काम नहीं करता। जैसे-तैसे घर का खर्च चल रहा है। दो दिन पहले ही गांव लौटे हैं। गांव में माहौल अच्छा नहीं है। हर तरफ सन्नाटा पसरा हुआ है और पुलिस का पहरा है। लगता है फिर गांव छोड़कर जाना होगा और होली घर के बाहर ही बीतेगी।’ श्रीकांत पटेल, कचरी गांव