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बहाल सिपाहियों को प्रोन्नत वेतनमान, वरिष्ठता,वेतन वृद्धि आदि पर फैसला लेने का डी जी पी को निर्देश
Sun, 27 Sep 2020 07:14 PM IST
अमर उजाला लोकल ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
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Published by: अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Sun, 27 Sep 2020 07:14 PM IST
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court
- फोटो : सोशल मीडिया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डीजीपी पुलिस मुख्यालय लखनऊ को मायावती राज में बर्खास्त और बाद में कोर्ट के आदेश से बहाल किए गए 22 हजार सिपाहियों को वेतन वृद्धि, प्रोन्नत वेतनमान, प्रशिक्षण अवधि सहित सेवा निरंतरता के साथ वरिष्ठता निर्धारण पर निर्णय लेने का निर्देश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता ने आधे दर्जन जिलों में तैनात पुलिसकर्मियो संजीव कुमार व कई अन्य की याचिकाओं को निस्तारित करते हुए दिया है। याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम ने बहस की। हापुड, कानपुर नगर, मेरठ,गौतमबुद्धनगर, इलाहाबाद, वाराणसी, मथुरा,गोरखपुर, गाजियाबाद में तैनात आरक्षियों ने हाईकोर्ट की शरण ली है। आरोप है कि 2007 में बर्खास्त सिपाहियों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 26मई2009को नियुक्ति तिथि से बहाल किया गया।
बर्खास्तगी अवधि को काम नही,वेतन नही के सिद्धांत पर अवकाश माना गया ।सेवा निरंतरता दी गई है किन्तु वरिष्ठता, वेतन वृद्धि, प्रोन्नत वेतनमान, 7वे आयोग की सिफारिशों का लाभ नही दिया जा रहा है। जो सुप्रीम कोर्ट के दीपक कुमार केस निर्देशों की अवहेलना है। याचियो को प्रशिक्षण अवधि को सेवा निरंतरता में शामिल कर वेतनमान पाने का अधिकार है। वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम का कहना था कि सरकार स्वयं अपने शासनादेश का पालन नही कर रही है।
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2005-06 पुलिस, पी ए सी भर्ती में चयनित 22 हजार सिपाहियों को भर्ती में धांधली के आधार पर 2007 में बर्खास्त कर दिया गया।इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। एकलपीठ ने याचिकाएं मंजूर कर ली और सेवा निरंतरता के साथ नियुक्ति तिथि से बहाल करने का निर्देश दिया।कोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बावजूद सरकार सिपाहियों को उन्हे मिलने वाले सेवा जनित लाभों से वंचित कर रही है। जिस पर यह याचिका दाखिल की गई थी।
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यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता ने आधे दर्जन जिलों में तैनात पुलिसकर्मियो संजीव कुमार व कई अन्य की याचिकाओं को निस्तारित करते हुए दिया है। याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम ने बहस की। हापुड, कानपुर नगर, मेरठ,गौतमबुद्धनगर, इलाहाबाद, वाराणसी, मथुरा,गोरखपुर, गाजियाबाद में तैनात आरक्षियों ने हाईकोर्ट की शरण ली है। आरोप है कि 2007 में बर्खास्त सिपाहियों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 26मई2009को नियुक्ति तिथि से बहाल किया गया।
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बर्खास्तगी अवधि को काम नही,वेतन नही के सिद्धांत पर अवकाश माना गया ।सेवा निरंतरता दी गई है किन्तु वरिष्ठता, वेतन वृद्धि, प्रोन्नत वेतनमान, 7वे आयोग की सिफारिशों का लाभ नही दिया जा रहा है। जो सुप्रीम कोर्ट के दीपक कुमार केस निर्देशों की अवहेलना है। याचियो को प्रशिक्षण अवधि को सेवा निरंतरता में शामिल कर वेतनमान पाने का अधिकार है। वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम का कहना था कि सरकार स्वयं अपने शासनादेश का पालन नही कर रही है।
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2005-06 पुलिस, पी ए सी भर्ती में चयनित 22 हजार सिपाहियों को भर्ती में धांधली के आधार पर 2007 में बर्खास्त कर दिया गया।इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। एकलपीठ ने याचिकाएं मंजूर कर ली और सेवा निरंतरता के साथ नियुक्ति तिथि से बहाल करने का निर्देश दिया।कोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बावजूद सरकार सिपाहियों को उन्हे मिलने वाले सेवा जनित लाभों से वंचित कर रही है। जिस पर यह याचिका दाखिल की गई थी।