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अखाड़ा परिषद ने पारित किया काशी मथुरा की मुक्ति का प्रस्ताव

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Mon, 07 Sep 2020 10:09 PM IST
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अखाड़ा परिषद ने पारित किया काशी-मथुरा की मुक्ति का प्रस्ताव
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क्रासर प्रयागराज में परिषद की बैठक में सभी 13 अखाड़ों ने मिलकर लिया फैसला, आरएसएस और विहिप से मांगा सहयोग माघ मेले की परंपरा बचाने के लिए योगी सरकार से रास्ता निकालने का साधु-संतों ने किया आग्रह अमर उजाला ब्यूरो प्रयागराज। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण आरंभ होने के बाद सोमवार को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने काशी और मथुरा को भी मुक्त कराने के लिए आवाज उठा दी। अखाड़ा परिषद की प्रयागराज में हुई बैठक में काशी, मथुरा को मुक्त कराने समेत आठ प्रस्ताव पारित किए गए। साधु-संतों ने सनातनी आस्था के प्रतीक इन दोनों महत्वपूर्ण तीर्थों को स्वेच्छा से छोड़ने और हिंदुओं को सौंपने की अपील की। बाघंबरी गद्दी मठ में हुई परिषद की बैठक में सभी 13 अखाड़ों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में सनातनी आस्था के दोनों बड़े तीर्थों को मुक्त कराने के लिए आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद से भी सहयोग मांगा गया। अखाड़ा परिषद ने कहा कि काशी और मथुरा को मुक्त कराने के लिए वीएचपी और आरएसएस के साथ ही अन्य हिंदूवादी संगठनों की मदद से अखाड़ा परिषद बड़ा आंदोलन खड़ा करेगा। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि और महामंत्री महंत हरि गिरि ने कहा कि आम सहमति न बनने पर संवैधानिक तरीके से कोर्ट के माध्यम से कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी। इसके अलावा जनवरी में संगम की रेती पर लगने वाले माघ मेले पर रोक न लगाने की भी अखाड़ा परिषद ने योगी आदित्यनाथ सरकार से अपील की। कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की गाइड लाइन के मुताबिक ही माघ मेले का आयोजन कराया जाना चाहिए। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने संगम की रेती पर माघ मेला बसाने के लिए सरकार को सुझाव भी दिया है। परिषद ने कहा है कि मेले में शिविर लगाने वाली करीब पांच हजार से अधिक संस्थाओं को इस बार रोक दिया जाना चाहिए। अलबत्ता सिर्फ संत-महात्माओं और कल्पवासियों को ही स्थान दिया जाए, ताकि मेले की परंपरा बचाई जा सके। इसके अलावा कोरोना संक्रमण को देखते हुए प्रयागराज की परिक्रमा में इस बार कम संख्या में साधु-संतों के शामिल होने की बात कही गई।
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