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भुखमरी के कगार पर पहुंचे 20हजार नाविक परिवार

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Thu, 09 Apr 2020 02:15 PM IST
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20thousand sailor families reached the brink of starvation
संगम पर नावों का संचालन ठप होने से नाविकों पर संकट - फोटो : AMAR UJALA
प्रयागराज। मंदिरों के घंटे-घड़ियाल हों या मस्जिदों से अजान या फिर त्रिवेणी संगम पर स्नान-ध्यान, सबकुछ ठहर गया है। घाटों पर न तिलक लगाते पंडे हैं, ना नावों पर खेवा मारने वाले मल्लाह। रोज नाव चलाकर, देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालुओं को त्रिवेणी संगम स्नान और दर्शन कराकर परिवार की जीविका चलाने वाले 20 हजार से अधिक नाविक परिवारों पर कोरोना वायरस का कोप मुसीबतों का पहाड़ बनकर टूट पड़ा है। नावें खड़ीं और घरों में आटा-चावल केलाले पड़ गए हैं। किसी को दो दिन पर खाना मिल रहा है तो कोई भूखे पेट ही सोने को मजबूर है। ऐसे में अगर उनको सरकारी या गैर सरकारी स्तर पर मदद नहीं मिली तो दो दर्जन से अधिक गांवों के नाविक परिवारों का संकट बढ़ने से इंकार नहीं किया जा सकता।
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मछली पकड़ने और नाव चलाकर जीविकोपार्जन करने वाले लवाइन से लेकर तारापुर तक के मल्लाहों का दर्द एक जैसा ही है। बसवार गांव के चंदू कुमार निषाद बताते हैं कि उनकी बस्ती में लोग अब बर्तन बेचकर खाने लगे हैं। इस आपदा के बीच मदद देना तो दूर, उनका भी नाम कोटेदार केराशन रजिस्टर से काट दिया गया है। चंदू मछली पकड़कर बाजार में बेचते थे, लेकिन अब कोरोना वायरस फैलने के डर से मछली पकड़ने और बेचने पर रोक लगा दी गई है। घाटों पर पुलिस का सख्त पहरा लगा दिया गया है। ऐसे में लोग घरों से नहीं निकल रहे है। अब खाने के लिए कुछ भी नहीं रह गया है। चंदू के मुताबिक गांव में कई परिवारों के नाम राशन रजिस्टर से कट गए हैं। पांच दिन पहले अनाज वितरण कराने के लिए मुनादी कराई गई थी, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ। न तो कहीं काम मिल रहा है न अपना पारंपरिक धंधा ही करने दिया जा रहा है। यही हाल रहा तो भूखों मरने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा। चंदू की ही तरह मानपुर, जलालपुर, फुलवा, मझियारी, मैनापुर, मनैया, जगदीशपुर, महेवा, नीवी, महेवा, लवाइन, मोहब्बतगंज समेत कई गांवों में मल्लाह परिवारों की जीविका पर संकट के बादल छा गए हैं। नावें खड़ी होने से उनके सामने रोजी रोटी का संकट पैदा हो गया है। महीने भर से नावें खड़ी होने की वजह से उनके पास गुजारा करने के लिए कुछ भी नहीं बचा है। कुछ लोग कर्ज लेकर बीबी-बच्चों का पेट भर रहे हैं तो बड़ी संख्या में घर बैठे नाविकों को सामाजिक संगठनों और सरकारी सहायता की राह देख रहे हैं। बक्सी दारागंज के संजू निषाद, तुलसी निषाद, मुकेश निषाद, फूलचंद, सोनू निषाद, महेंद्र निषाद, प्रेम निषाद, पप्पू निषाद, उर्मिला देवी निषाद, बच्चा लाल निषाद, ननकी देवी, कंजी देवी, पवन निषाद, भल्लू निषाद, डूंगर निषाद की आंखों में सोमवार को आंसू तैर रहे थे। उनका कहना था कि नावें न चलने से बच्चों और बुजुर्गों की दवाई कराना भी मुश्किल हो गया है। कर्ज लेकर किसी तरह जिंदगी की गाड़ी खींची जा रही है। कोट तीन हजार से अधिक नावें खड़ी हैं। हर परिवार में छह से सात सदस्य हैं। नावों का संचान बंद होने से स्थिति यह है कि कोरोना वायरस से पहले लोग अब भूख से मरने लगेंगे। ऐसे में योगी सरकार को प्रयागराज में नाविकों की मदद के लिए शीघ्र ठोस पहल करनी चाहिए। पप्पू लाल निषाद- अध्यक्ष, नाविक संघ- प्रयागराज। 
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20thousand sailor families reached the brink of starvation
चूल्हे जलने बंद, भूखों पेट सोने को मजबूर मल्लाह परिवार - फोटो : AMAR UJALA
चूल्हे जलने बंद, भूखों पेट सोने को मजबूर मल्लाह परिवार
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