फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   There is no need for hunger. Walk on foot

भुखमरी की नौबत है.. पैदल ही चल पड़े

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Sun, 29 Mar 2020 05:19 PM IST
विज्ञापन
There is no need for hunger. Walk on foot
लॉकडाउन का ताला तोड़ कर जिंदगी की तलाश में हजारों लोग सड़क पर
विज्ञापन
प्वाइंटर जीटी रोड हाईवे पर भीड़ का रैला पुलिस वाहनों को रोक कर बैठा रही दिल्ली, एनसीआर, हरियाणा से हजारों कामगारों का पूर्व की ओर पलायन राजा तिवारी अलीगढ़। दिल्ली-अलीगढ़ के बीच जीटी रोड पर मजदूरों की खत्म नहीं होने वाली लाइनें चल रही हैं। कहीं १०, कहीं ५० तो कहीं ६० और १०० की तादाद में मजदूर अपनी पत्नी व बच्चों और जरूरी सामान के साथ आगे बढ़ रहे हैं। किसी को एटा, मैनपुरी जाना है तो कोई कानपुर और उससे आगे का सफर तय करना है। न पास में खाना है, न पानी और न कोई साधन। बच्चों का हाल बेहाल है। मां भी अब गोद में इनको नहीं उठा पा रही हैं। वो भी थक कर चूर हो गई है। खैरेश्वर मंदिर चौराहा पर ऐसे मजदूरों व लोगों की भीड़ लगातार आ रही है। पुलिस वाले इनकी मदद के लिए कुछ वाहनों को रोक कर उसमें इनको बैठा रहे हैं। कुछ लोग यहां मजदूरों को खाना भी दे रहे हैं लेकिन इन पलायन करने वालों की हजारों की संख्या के आगे सभी मदद बहुत कम है। एक भी बस, ट्रक या ट्रैक्टर देखते ही उसमें चढऩे की होड़ शुरू हो जाती है। किसी तरह से जगह मिले तो बस या ट्रक में चढ़ जाएं। बीते तीन दिन से यही नजारा है। लगातार भीड़ बढ़ती जा रही है। केस एक भुखमरी की नौबत थी तो पैदल चले ८० किमी अलीगढ़। नंदु पुत्र बबली निवासी खैर अड्डा अजीरा गली लुधियाना से आए हैं। वह लुधियाना से शुक्रवार को दोपहर १२ बजे चले थे। लुधियाना के समराज चौक से अंबाला तक उन्होंने ८० किमी का सफर पैदल ही तय किया। इसके बाद अंबाला से ट्रक मिला जिसने अलीगढ़ पहुंचाया। सिलाई मशीन फैक्ट्री में काम करने वाले नंदू ने बताया कि खाली पेट चले थे, घर से लेकर आए खाने को रास्ते में खाया। घर से खाली पेट चले ताकि चलने में परेशानी न हो। उनके साथ जीजा टिंकू और बहन आशा देवी निवासी चमन नगरिया खैर भी आए हैं। जीजा भी साथ ही काम करते हैं। लॉकडाउन के बाद काम बंद हो या था, भुखमरी की नौबत थी तो अपने घर लौट आए। यहां जो मिलेगा उससे ही गुजारा कर लेंगे।  २०० २०० रुपये लेकर चले थे। रास्ते में कुछ बिस्किट लिए थे।
विज्ञापन
केस दो ४३७ किमी का सफर चार दिन में, पांव में पड़ गए छाले अलीगढ़। खैर अड्डा निवासी मनोज देवी, शिशुपाल, छोटूलाल और गुडिय़ा देवी भी  लुधियाना से पैदल आए हैं, चार दिन पहले चले थे। जनता कर्फ्यू के दिन रविवार को उनको ट्रेन से आना था, लेकिन ट्रेन रद हो गई। इसके बाद बुधवार को ट्रेनें बंद हो गई। जिससे बात की उसने किराये में सैकड़ों रुपये मांगे। इसलिए पैदल ही चल दिए। बीच बीच में कुछ सफर फुटकर वाहनों में भी किया। ४३७ किमी लंबा लुधियाना अलीगढ़ का सफर तय करते हुए गुडिय़ा के पैरों में छाले पड़ गए। बाकी सभी के पांव सूज गए। आराम करने के बाद फिर चल देते हैं। एक ही परिवार के ये लोग वहां  मजदूरी करते हैं। ज्यादा रुपये नहीं थे, इसलिए वहां से यहां वापस आए।
विज्ञापन
विज्ञापन
केस तीन हरियाणा से कानपुर पहुंचना है, कोई मदद करो अलीगढ़। हरियाणा से कानपुर के लिए निकले सचिन नंगे पैर थे, चप्पल टूट गई थी। पैर में जख्म बन गए। सचिन के पिता राधेश्याम, मां रीता, बहन सीमा भी साथ थी। पास में कोई जमा पूंजी नहीं थी, रोजाना कमाना और खाना। परिवार हरियाणा के पलवल में मजदूरी करता है। रुपये कम थे तो शुक्रवार को पैदल सफर ही चल दिए। बीच में पुलिस की मदद से कुछ दूरी फुटकर वाहन में तय किया। बमुश्किल शनिवार की रात अलीगढ़ पहुंचे। अब यहां पुलिस से मदद मांग रहे हैं कि कानपुर का कोई वाहन हो तो उसमें बैठा दें।
केस चार छर्रा के लोग भी दिल्ली से लौटे अलीगढ़। छर्रा निवासी लकी दिल्ली में एक सरकारी विभाग में संविदा कर्मी हैं। लॉकडाउन के बाद उनका काम भी बंद हो गया। पैसा नहीं था तो वापस छर्रा आने को चल दिए। लकी के साथ अर्जुन, छाया और प्रीति दोस्त हैं। ये सभी छर्रा के हैं। दिल्ली से १३५ किमी लंबा सफर उन्होंने शुक्रवार को शुरू किया था। बीच बीच में कुछ किमी के लिए साधन मिला लेकिन ज्यादातर दूरी पैदल ही तय की गई। रविवार को ये छर्रा पहुंचे। बकौल, लकी सरकार को मजदूरों की चिंता होती तो उन्हें कम से कम घर पहुंचने का समय और साधन दिया जाता है लेकिन ऐसा कुछ नहीं किया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed